कश्मीर से धारा 370 हटने से इमरान सरकार को हुआ ये बड़ा फायदा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट


SUKIRTI MISHRA 20/09/2019 16:23:55
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Lucknow. जम्‍मू कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटने के बाद पाकिस्‍तान लगातार भारत को परमाणु अटैक की गीदड़ भभकी देने से लेकर चीन, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र सहित तमाम देशाें का दरवाजा खटखटा चुका है, लेकिन पाकिस्तान को हर जगह से मुंह की खानी पड़ी है। वहींं, भारत के इस फैसले से पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान को काफी फायदा भी हुआ है, क्‍योंं‍कि पा‍किस्‍तान में अर्थव्‍यवस्‍था बुरे दौर से गुजर रही है। भुखमरी, बेरोजगारी से जूझ रही पाकिस्‍तानी जनता को कश्‍‍‍‍मीर मुद्दे पर भटकाने में इमरान सरकार सफल हुई। बता दें कि 5 अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश से जम्मू कश्मीर से धारा 370 के प्रावधानों को हटा दिया था। राज्‍यसभा में बयान देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। इस बयान के बाद से ही पाकिस्तान ने हाय तौबा मचाना शुरू कर दिया।

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मोदी फोबिया

भारत को बार-बार परमाणु अटैक की गीदड़ भभकी देने से लेकर चीन, अमेरिका समेत संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटा चुके पाकिस्तान को हर तरफ से निराशा हाथ लगी है। इमरान खान की सनक का आलम यह है कि 5 अगस्त से 12 सितंबर तक किये 95 ट्वीट में से 71 बार भारत के संदर्भ में है, 56 बार कश्मीर या कश्मीरी शब्द का प्रयोग किया, जबकि 19 बार मोदी का जिक्र है। दुनिया में भारत के बढ़ते रुतबे से इमरान खान के हौसले किस कदर पस्त हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इमरान ने 30 मिनट सिर्फ भारत और मोदी पर ही भाषण दिया। 

कश्मीर मुद्दे पर हर तरह से अलग थलग पड़ चुके पाकिस्तान के पास तिलमिलाहट दिखाने का तरीका भी नहीं बचा है। इस मसले को द्विपक्षीय वार्ता से निपटाने की सलाह देकर अंतर्राष्‍ट्रीय समि‍तियों और दूसरे देशों ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। आज हम आपको बताएंगे कि कश्मीर से धारा 370 हटने पर इमरान सरकार के हड़कंप मचाने की असलियत क्या है? 

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धराशायी अर्थव्यवस्था

पाकिस्तान की धराशायी हो चुकी अर्थव्यवस्था का सच पूरी दुनिया जानती है। पाकिस्तानी जनता से लचर अर्थव्यवस्था (economy) सुधारने के वादे के दम पर इमरान खान ने पिछले साल जुलाई में सत्ता संभाली थी, लेकिन एक साल से ज्यादा होने के बाद भी हालात बदतर हैं। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) से 6 बिलियन डॉलर का लोन लेने के अलावा चीन और सउदी अरब (Saudi Arabia) से भी पाकिस्तान ने कर्ज लिया है। 

बता दें कि यूएस डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपये की कीमत एक तिहाई कम हुई है। विदेशी मुद्रा खत्म होने के संकट से बचने के लिए 2018-19 में पाकिस्तान ने 16 बिलियन का कर्ज लिया है। जबकि उसकी लाइबिलिटी 40 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई है। 

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FATF ब्लैक लिस्टिंग

इसके अलावा फाइनेंशियल टास्क फोर्स (FATF) ने काले धन से निपटने की लचर कानून व्यवस्था और आतंकवाद में पैसा लगाने के चलते पाकिस्तान को ग्रे-लिस्टेड कर दिया है। देश को ब्लैक लिस्ट में आने से बचाना भी इमरान सरकार की बड़ी चुनौती है। ब्लैक लिस्टेड होने से अर्थव्यवस्था तो चरमराएगी ही साथ ही विदेशी व्यापार पर भी प्रतिबंध झेलने पड़ेंगे।  

आतंकवाद नामक रोग से पाकिस्तान हमेशा ग्रसित रहा है और इसी वजह से अमेरिकी ड्रोन हमलों का शिकार बनता रहा। कुछ समय पहले ही अमेरिका (US) ने ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन के अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में मारे जाने की पुष्टि की थी। इतनी मुसीबतें झेल रही इमरान सरकार के तरकश में सिर्फ "कश्मीर आवर" जैसे तीर बचे हैं जिससे पाकिस्तानी जनता का ध्यान आतंकवाद, भुखमरी, बेरोजगारी, इंनफ्लेशन जैसे गंभीर मुद्दों से भटका सके। 

Web Title: This is how Imran Khan's govt benefits from Article 370 abrogation from Kashmir ( Hindi News From Newstimes)


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