हकीकत से कोसों दूर है लतीफपुर के विकास का सच


LEKHRAM MAURYA 22/09/2019 15:27:40
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LUCKNOW. केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना की तर्ज पर पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई 'आई स्पर्श स्मार्ट ग्राम योजना' के अन्तर्गत राजधानी स्थित विकास खण्ड माल के लतीफपुर ग्राम का चयन किया गया था। उस समय लोगों ने इस योजना का जो स्वरूप कागजों में देखा और सुना था, उससे ग्राम वासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रह गया था।

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गांव का चयन हुए तीन साल का समय बीत चुका है। अब तक दर्जनों अधिकारी इस गांव का दौरा कर चुके हैं, लेकिन जो तस्वीर सरकार और अधिकारियों के सामने पेश की गयी वह कितनी सच है। इसी की पड़ताल के लिए न्यूज टाइम्स ने रविवार को गांव की हकीकत जानने का प्रयास किया। क्योंकि एक बार फिर सोमवार को प्रदेश सरकार के ग्राम विकास मंत्री इस गांव में आने वाले हैं। उससे पहले यहां अधिकारी दूसरे ब्लाक से सफाई कर्मियों को लगाकर सड़कों की सफाई करा रहे हैं। 

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लतीफपुर का नाम सुनकर बाहरी लोग जितना खुश होते हैं, गांव वाले उतने ही मायूस

एक ओर जहां मंत्री जी को इस गांव के चमक-दमक वाले रास्तों और बहुउद्देशीय भवन तक सीमित रखने की योजना है। वहीं, गांव की हकीकत कुछ इस प्रकार है। इस गांव में घुसते ही आपको तीन साल पहले पक्का नाला बनवाने के लिए खोदे गए गन्दे नाले के दर्शन हो जाएंगे। इसके बाद अभी तक गांव के दो रास्तों पर खडंजा ही लगा है।

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गांव के बाहर पहुंचते ही यहां प्राथमिक विद्यालय के शौचालय ध्वस्त पड़े हैं। हैण्डपाइप का चबूतरा नहीं बना है, स्कूल के दरवाजे पल्ले टूटे हैं, जो हमेशा खुले पड़े रहते हैं। यहां चहारदीवारी भी नहीं है। इसी इसी गांव के मजरे में दलथम्भा में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी शौचालय ध्वस्त पड़ा है। यहां भी चहारदीवारी नहीं है।

लतीफपुर में ही बंजरंग बली का मंदिर है, जिसको पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए 46.57 लाख का स्टीमेट बना दिया गया। इसको विकसित करने के लिए 23.29 लाख की धनराशि भी अवमुक्त कर दी गयी, जिससे मंदिर की चहार दीवारी के अलावा एक कमरा है, जो बिना दरवाजे के अधूरा बना पड़ा है। इसी के पीछे शौचालय का खुला टैंक अधूरा पड़ा है, इसका शौचालय कहां है पता नहीं। इसी के पास रामपती पत्नी स्व0 रमजान, तिरपाल तानकर रह रही हैं, जिन्हे आवास की जरूरत है, लेकिन कोई पुरसाहाल नहीं  है।

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इसी गांव के मजरे दलथम्भा में एक मोहल्ला है, जहां तालाब का पानी घरों में भर जाता है। रास्तों से खड़ंजा तक गायब हो गया है। लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। नाली के पत्थर टूटे पड़े हैं। गांव के रामसनेही, रामबिलास, राम प्रकाश संजय, विशुनदयाल, शिवपाल कल्लू, मटरू आदि ने बताया कि उनके मोहल्ले में अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।

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इस सम्बन्ध में प्रधान पति अखिलेश सिंह ने कहा कि मंदिर की आधी धनराशि मिली है, पूरी धनराशि मिलने पर काम शुरू कराएंगे। स्कूलों के संबन्ध में कहा कि प्राथमिक विद्यालय जर्जर है कि उसे गिराकर दोबारा बनवाना है। इसलिए उसमें पैसा नहीं लगाया। कल मंत्री जी उसके भवन का शिलान्यास करेंगे। 

Web Title: truth of the development of Latifpur is far from reality ( Hindi News From Newstimes)


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