अखिलेश ने चला ऐसा दांव कि अब बेबस हो जाएंगे चाचा शिवपाल


ABHIMANYU VERMA 08/10/2019 14:30:56
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Lucknow. पिछले दिनों सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और शिवपाल यादव (Shivpal Singh Yadav) की ओर से दिये बयानों के बाद अटकलें लगाईं जा रही थीं कि मुलायम परिवार फिर एक होने जा रहा है। लेकिन शिवपाल यादव (Shivpal Singh Yadav) ने सपा (SP) में वापसी को पूरी तरह खारिज कर दिया और सपा (Samajwadi Party) को उनकी पार्टी से गठबंधन करने का ऑफर दिया। इसके बावजूद अखिलेश (Akhilesh yadav) ने हार नहीं मानी और चुपचाप चाचा को बेबस करने का दांव खेलते रहे। 

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दरअसल, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) इन दिनों यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के लिए अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। पिछले दिनों उन्होंने भाजपा (BJP), बसपा (BSP) और कांग्रेस (Congress) को एक साथ झटका दिया और उनके कई नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया। लेकिन कहीं-न-कहीं चाचा के बिना अखिलेश पिछले कुछ चुनावों में बेहद कमजोर नजर आए। 

अखिलेश यादव काे हार का सामना करना पड़ा

पिछले चुनावों पर नजर डालें तो सपा (Samajwadi Party) ने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के नेतृत्व में दो चुनाव लड़ें और दोनों में ही हार मिली। जिसमें पहला चुनाव यूपी विधानसभा 2017 रहा। इस चुनाव में अखिलेश ने कांग्रेस (Congress) से गठबंधन किया और हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद लोकसभा चुनाव 2019 में पुरानी दुश्मनी भुलाकर सपा (SP) और बसपा (BSP) एक हुए फिर हार भी का सामना करना पड़ा। इन दोनों ही चुनावों में हार की दो बड़ी वजहें निकलकर सामने आयीं। पहली वजह सपा का दूसरे दलों के साथ गठबंधन और दूसरी वजह चाचा शिवपाल के साथ अखिलेश का विवाद। 

सपा के परम्‍परागत वोटों में बीजेपी ने मारी सेंध

सपा (Samajwadi Party) के परम्परागत वोटरों में यादव के साथ अन्य पिछड़े जाति व मुस्लिम आते थे। जिसमें भाजपा (BJP) ने अन्य पिछड़ी जाति के वोट बैंक में सेंधमारी कर ली है। वहीं, सपा से शिवपाल के अलग होने के बाद यादव वोटरों में भी बंटवारा होने लगा था। अब अखिलेश की यही कोशिश है कि वह किसी भी तरह से शिवपाल (Shivpal Singh Yadav) की सपा में वापसी कराएं। जिससे सपा (SP) का परम्परागत वोटर फिर एक बार उसके साथ खड़ा हो। यही वजह है कि वह शिवपाल को लेकर नरम रुख अपनाए हुए हैं। 

शिवपाल ने अखिलेश के आफर को ठुकराया

चर्चा है कि सपा ने पहले शिवपाल यादव (Shivpal Singh Yadav) की विधानसभा से सदस्यता निरस्त करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे मुलायम सिंह (Mulayam Singh Yadav) व अखिलेश (Akhilesh Yadav) के हस्तक्षेप के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वहीं, अखिलेश (Akhilesh) ने खुले तौर पर शिवपाल (Shivpal Singh Yadav) को पार्टी में लौटने का ऑफर दिया, जिसे शिवपाल ने यह कहकर खारिज कर दिया कि वह सपा में पार्टी का विलय नहीं गठबंधन कर सकते हैं। लेकिन अखिलेश के इस ऑफर ने शिवपाल को बेबस करने का काम किया है। 

अखिलेश के लिए वोटरों का बदल सकता है नजरिया

जानकारों की मानें तो शिवपाल यादव अब अलग होकर भी चुनावी मैदान में अखिलेश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे, क्‍योंकि जो वोटर यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के एक होने का इंताजर कर रहे हैं और यह मानते थे कि शिवपाल यादव के साथ अन्याय हुआ, अब उनका नजरिया अखिलेश यादव के लिए बदलता नजर आ रहा है। इसकी मुख्य वजह अखिलेश की ओर से पारिवारिक विवाद को खत्म करने के लिए उठाया गया कदम है।

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Web Title: Special Story on Akhilesh Yadav and Shivpal Yadav ( Hindi News From Newstimes)


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