दशहरा पर शमी के पूजन का जानें महत्व, घर में आती है शांति


NAZO ALI SHEIKH 08/10/2019 16:44:24
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Lucknow. 8 अक्टूबर को देश भर में धूम-धाम से विजयदशमी का त्योहार मनाया जाएगा। नवरात्रि समाप्ति के बाद ही दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को लंका से छुड़ाया था। इस दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का अंत किया था। दशहरा त्योहार का आयोजन सत्य की जीत को लेकर मनाया जाता है। विजयादशमी के दिन प्रदोषकाल में शमी वृक्ष के समीप जाकर उसे प्रणाम करें।  

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विजयदशमी के दिन रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन होता है। इस दिन शस्त्र और शमी के पौधे का पूजन काफी महत्व वाला होता है। इस दिन प्रदोषकाल में शमी वृक्ष का पूजन जरूर करना चाहिए। वहीं, कार्य सिद्धि का पूजन विजय काल में फलदायी रहेगा। शमी वृक्ष की कुछ पत्तियां अपने पूजाघर में रख दें। लाल कपड़े में अक्षत, एक सुपाड़ी के साथ इन पत्तियों को बांध लें। पोटली को गुरु या बुजुर्ग से प्राप्त करें और भगवान श्रीराम की परिक्रमा करें।

आपको बता दें कि दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नीलकंठ पक्षी भगवान शिव के गले से निकला था। इस कारण उसका नाम नीलकंठ पड़ गया। इस दिन अशमंतक अर्थात कचनार का वृक्ष लगाने का विशेष महत्व है। इसकी नियमित पूजा से परिवार में सुख-शांति आती है। विजयदशमी पर अपराजिता के पूजन का खास महत्व है।

अपराजिता का पूजन करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। इसका पूजन करने के लिए अपराजिता की पत्तियों को हल्दी से रंगे, दूर्वा और सरसों को मिलाकर एक डोरा बना लें। इसके बाद उस डोरे को दाहिने हाथ में बांध लें। यह करने से आपका आत्मविश्वास हमेशा ही बढ़ रहेगा। ग्रंथों में भी ऐसा उल्लेख मिलता है।

Web Title: Know the importance of worshiping Shami on Dussehra, peace comes at home ( Hindi News From Newstimes)


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