तकनीक: यहां रेगिस्तान की तपती रेत में समुद्र के खारे पानी से हो रही सब्जियों और फलों की खेती


DEEP KRISHAN SHUKLA 09/10/2019 12:34:10
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- गत्ते से बने कूल हाउसों में हो रही बम्पर पैदावार
- ब्रिटेन की कंपनी कई देशों में चला रही प्रोजेक्ट

New Delhi. क्या आप जानते है कि समुद्र के खारे पानी से रेगिस्तान की तपती रेत में भी खेती कर सब्जियों की अच्छी पैदावार हो सकती है। असंभव से लगने वाले इस काम को ब्रिटेन की कंपनी ने संभव कर दिखाया है। आस्ट्रेलिया, आबूधाबी, सोमालीलैंड, ओमान सरीखे देशों के रेगिस्तानों में इस परियोजना के जरिए गत्ते से बने विशेष ग्रीन हाउसों में सब्जियों की पैदावार की जा रही है। 

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ब्रिटेन की कंपनी ग्रीनहाउस सीवाटर ग्रीनहाउस के वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया, आबूधाबी, सोमालीलैंड, ओमान और टेनेराइफ जैसे सूखे और रेगिस्तानी इलाकों अत्यंत गर्म वातावरण के बावजूद बड़ी मात्रा सब्जियों और फलों का उत्पादन किया है। यह खेती मोटे गत्ते से बने खास किस्म के ग्रीन हाउसों में की गयी। 

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मालूम हो कि अमूमन शीशे से बने ग्रीन हाउसों में बगीचे को नम और गर्म रखने की व्यवस्था होती है लेकिन गत्ते से बनाए गए इन कूलिंग हाउस से बगीचा नम और ठंडा बना रहता है। 
इन्हें इस हिसाब से डिजाइन किया गया है कि जब  बाहर की गर्म हवा के थपेड़े गीते गत्तों पर पड़ते हैं तो उससे वाष्पीकरण की प्रक्रिया होती है। यह वाष्पीकरण ग्रीन हाउसे के अंदर का तापमान कम करता है। 

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इन विशेष गत्तों से निर्मित पैनल को गीला करने के लिए सोलर पंप के जरिए समुद्री पानी का छिड़काव किया जाता है। 
वाष्पीकरण के जरिए रेगिस्तान में खेती की यह नायाब तकनीक रेगिस्तानों के मील का पत्थर साबित होगी। 

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  आम के आम गुठलियों के भी दाम
यह तकनीकी 'आम के आम गुठलियों के भी दाम' वाली कहावत को चरित्रार्थ करती है। ऐसा इसलिए है क्यों कि खेती के साथ साथ नमक बेंच कर भी पैसा कमाया जा सकता है। दरअसल वाष्पीकरण के लिए गत्तों के पैनल पर जो लगातार समुद्री पानी का छिड़काव होता है उससे उसकी बाहरी दीवारों पर नमक जमा हो जाता है। इस नमक जमने के दो फायदे है एक तो इससे गत्तों को मजबूती मिलती है दूसरे यह नमक व्यवसायिक प्रयोग में भी लाकर अतिरिक्त पैसे भी कमाए जा सकते हैं। 

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  प्रतिवर्ष 750 टन टमाटर की हो रही पैदावार
ग्रीन हाउस बनाने वाली कंपनी का दावा है सोमालीलैंड में 2000 हेक्टेयर में इस तकनीकी से खेती कर वहां की 40 लाख की आबादी का पेट भरा जा सकता है। वहां पर इस तकनीक से हो रही खेती से तकरीबन 750 टन टमाटर की पैदावार प्रतिवर्ष हो रही है। गौरतलब हो कि सोमालीलैंड दुनिया के सबसे सूखे इलाकों में से एक है। 

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Web Title: Technique: Cultivation of vegetables and fruits from the salt water of the sea in the scorching sand of the desert here ( Hindi News From Newstimes)


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