Ayodhya Case: आखिरी सुनवाई में दोनों पक्षों ने पेश की ये अहम दलीलें और साक्ष्य


NP1509 17/10/2019 09:17 AM
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New Delhi. देश के सबसे संवेदनशील मुद्दे अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में निरंतर चल रही सुनवाई आखिरकार 40वें दिन खत्म हो गयी। कोर्ट ने बुधवार को शाम चार बजे अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में फैसला 17 नवंबर से पहले आना तय माना जा रहा है, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी इसी दिन सेवानिवृत्त हो रहे हैं। फिलहाल कोर्ट की ओर से फैसले को लेकर कोई भी टिप्पणी नहीं की गयी है। 

इस मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आखिरी सुनवाई में दोनों ही पक्षों से कई सवाल किए और दलीलों के समर्थन में साक्ष्य भी मांगे। वहीं, भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका को हटा दिया और कहा कि इसे बाद में सुना जाएगा।

Ayodhya Case: In the last hearing, both sides presented these important arguments and evidence

आखिरी दिन सुनवाई

हिन्दू पक्ष

रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कोर्ट से कहा कि बाबर ने वहां स्थित भव्य मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया था और मंदिर के खंभों आदि का ही इस्तेमाल मस्जिद बनाने में किया गया। खंभों पर मूर्तियां इसका प्रमाण हैं।

वहीं, निर्मोही और निर्वाणी अखाड़ा ने अपनी दलील में कहा कि 1885 से ही इस संपत्ति पर उनका कब्जा है और मुस्लिम पक्ष ने ईमानदारी से इस तथ्य को स्वीकार किया है। 1934 से इस विवादित ढांचे में किसी भी मुस्लिम को प्रवेश की इजाजत नहीं थी।

मुस्लिम पक्ष

हिंदू पक्षों के दावों पर मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वकील वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष के पास यात्रियों की किताबों के अलावा जमीन पर मालिकाना हक का कोई सबूत नहीं। कभी मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई। उन्होंने कहा कि 1886 में फैजाबाद की कोर्ट भी कह चुकी है कि विवादित जमीन पर हिन्दू मंदिर होने के कोई सबूत नहीं मिले। 

आखिरी दिन की सुनवाई में बड़ी दलीलें और साक्ष्य

हिंदू पक्ष की बड़ी दलील और साक्ष्य 

हिंदू पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि एएसआई को खुदाई के दौरान मंदिर का ढांचा मिला। पुराणों में भी जन्मस्थान का जिक्र किया गया है। वहीं, साक्ष्य पेश करते हुए कहा गया कि खुदाई के दौरान पत्थरों पर मगरमच्छ-कछुओं के चित्र मिले थे। मगरमच्छ और कछुओं का मुस्लिम संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है।

मुस्लिम पक्ष की बड़ी दलील और साक्ष्य 

हिंदू पक्ष की दलील पर जवाब देते हुए मुस्लिम पक्ष ने कहा कि ढांचा तो मस्जिद का भी हो सकता है। जन्मस्थान का कोई सबूत नहीं। 1949 में यहां गुंबद के नीचे मूर्ति रखी गई। मुस्लिम पक्ष की साक्ष्य पेश करते हुए कहा गया कि एएसआई साबित नहीं कर पाया कि वहां मंदिर है जबकि मस्जिद के संबंध में ऐसे साक्ष्य हैं।

 

 

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Web Title: Ayodhya Case: In the last hearing, both sides presented these important arguments and evidence ( Hindi News From Newstimes)


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