इस दीपावली पर्यावरण संरक्षण के लिए जलाएं ग्रीन पटाखे


NP1591 21/10/2019 13:07:44
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Burn green firecrackers for environmental protection this Deepawali

सुशील द्विवेदी, विज्ञान संचारक

Lucknow: पिछले वर्ष दीपावली से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे जलाने और बिक्री से संबंधित एक याचिका पर फैसले के दौरान ग्रीन पटाखों का जिक्र किया था। कोर्ट ने मशविरा दिया था कि त्योहारों पर कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन पटाखे ही बेचे और जलाएं जाने चाहिए। आपको बता दें कि इन ग्रीन पटाखों की खोज भारतीय संस्था राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने की है। दुनियाभर में इन्हें प्रदूषण से निपटने के एक बेहतर तरीके की तरह देखा जा रहा है। 'ग्रीन पटाखे ' राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी संस्थान (नीरी) की खोज हैं जो पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं पर इनके जलने से कम प्रदूषण होता है। नीरी एक सरकारी संस्थान है जो वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अंतर्गत आता है।  

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ग्रीन पटाखों के बारे में चर्चा करते हुए विज्ञान संचारक सुशील द्विवेदी ने बताया कि ग्रीन पटाखों  का इस्तेमाल दुनिया के किसी देश में नहीं होता है। यह विचार पुर्णतः भारतीय वैज्ञानिकों  का है और हम भारत में ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करके पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं।

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क्या होते हैं ग्रीन पटाखे-

ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं, लेकिन इनसे प्रदूषण कम होता है। सामान्य पटाखों की तुलना में इन्हें जलाने पर 40 से 50 फीसदी तक कम हानिकारण गैस पैदा होती हैं। सामान्य पटाखों के जलाने से भारी मात्रा में नाइट्रोजन और सल्फर गैस निकलती है, लेकिन ग्रीन पटाखों के जलने से  40 से 50 फीसदी तक कम  हानिकारक गैसें निकलेंगी। ऐसा भी नहीं है कि इससे प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं होगा। पर ये कम हानिकारक पटाखे होंगे। ध्वनि प्रदुषण की दृष्टी से भी ये कम ध्वनि प्रदुषण करेंगे। 

कितने तरह के ग्रीन पटाखे 

विज्ञान संचारक सुशील द्विवेदी के अनुसार नीरी ने कुछ रासायनिक फार्मूला विकसित किये हैं इसी अनुसार ग्रीन पटाखों में इस्तेमाल होने वाले अलग मसाले बहुत हद तक सामान्य पटाखों से अलग होते हैं। जिससे पटाखे जलने के बाद कम हानिकारक गेसें बनेगी एवं रासायनिक अभिक्रिया से पानी बनेगा जिसमें हानिकारक गेसें घुल जायेंगी। सी.एस.आई.आर. नीरी ने चार प्रकार के पटाखे बनाये हैं।

1. सेफ वाटर रिलिजर पटाखे- इन  पटाखों के  जलने से  पानी के कण पैदा होंगे, जिसमें सल्फ़र और नाइट्रोजन के कण घुल जाएंगे है.अकसर जब किसी शहर में प्रदुषण ज्यादा होता है तब पानी के छिड़काव से प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है 

2. अरोमा क्रैकर्स अर्थात खुशबु वाले क्रैकर्स- इन पटाखों को जलाने से न केवल कम हानिकारक गैस पैदा होगी बल्कि वातावरण में  बेहतर खुशबू भी बिखरेगी

3. सफल अर्थात सेफ मिनिमल एल्यूमीनियम क्रैकर्स- इन पटाखे में सामान्य पटाखों की तुलना में 50 से 60 फीसदी तक कम एल्यूमीनियम का इस्तेमाल होता है अर्थात ऐसे ग्रीन  पटाखों के जलने से वातावरण में कम एल्यूमीनियम के कण मुक्त होंगे।

4. स्टार क्रैकर यानी सेफ थर्माइट क्रैकर- इन क्रैकर्स में ऑक्सीडाइजिंग एजेंट का उपयोग होता है जिससे जलने के बाद सल्फर और नाइट्रोजन के हानिकारक ऑक्साइड कम मात्रा में पैदा होते हैं। इसके लिए खास तरह के केमिकल का इस्तेमाल होता है।

आप कहीं भी पटाखों की दुकानों से इन्हें खरीद सकते हैं। अलबत्ता एक बार दुकानदार से ये कन्फर्म जरूर कर लें कि ये ग्रीन पटाखे हैं या नहीं  या ग्रीन पटाखों की पैकिंग के ऊपर अलग से लगे होलोग्राम या लेबल को देखकर आप सुनिश्चित कर सकते हैं। ये पटाखे सामान्य पटाखों से थोड़े महंगे जरूर है लेकिन पर्यावरण हितैषी हैं।       

Web Title: Burn green firecrackers for environmental protection this Deepawali ( Hindi News From Newstimes)


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