Dhanteras से होती है दीवाली की शुरुआत, जानिए इस दिन क्यों खरीदते हैं झाड़ू?


NP1591 25/10/2019 15:13:44
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Lucknow: धनतेरस  (Dhanteras) से ही दीवाली की शुरुआत होती है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन झीर सागर में समुद्र-मन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी (Dhantrayodashi) के नाम से जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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पौराणिक कथा के अनुसार, धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन करने से घर धन-धान्यक से पूर्ण हो जाता है। इसी दिन यथाशक्ति खरीदारी और लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा को घर लाना भी शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन जिस भी चीज की खरीददारी की जाएगी, उसमें 13 गुणा वृद्धि होगी।

इस दिन यम पूजा का विधान भी है। मान्यदता है कि धनतेरस के दिन संध्या काल में घर के द्वार पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का योग टल जाता है। इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा भी जाती है। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक भी है। इसके बाद छोटी दीपावली या नरक चौदस और फिर बड़ी या मुख्य दीपावली मनाई जाती है। इसके बाद गोवर्द्धन पूजा और अंत में भाई दूज या भैया दूज का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस से एक दिन पहले रमा एकादशी पड़ती है।

धनतेरस पर क्यों खरीदते हैं झाड़ू?

धनतेरस या धन त्रयोदशी पर खरीदारी की परंपरा है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी गयी वस्तु का नाश नहीं होता और इसमें तेरह गुनी वृद्धि होती है। आम लोग इसलिए धनतेरस पर सोना, चांदी, भूमि, वाहन और घर में इस्तेमाल आने वाली चीजों की खरीदारी करते हैं।

इन वस्तुओं के साथ झाड़ू खरीदने की भी अनोखी परंपरा है। लोग सोना-चांदी या उसके गहने खरीदें या नहीं पर झाड़ू जरूर खरीदते हैं। धनतेरस के दिन हर शख्स के हाथ में एक झाड़ू जरूर दिख जाता है। मत्स्य पुराण के हवाले से बताया जाता है कि झाड़ू को मां लक्ष्मी का रूप माना गया है। 

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धनतेरस पर कैसे करें पूजा?

धनतेरस पर पूजा करने के लिए सबसे पहले अपने घर के उत्तर दिशा में किसी जगह पर साफ सफाई करके वहां लकड़ी की चौकी रखें और उस पर एक लाल रंग का आसन बिछाएं और इसके बीचों में बीच मुट्ठी भर अनाज रख दें। फिर इसके ऊपर एक कलश रखे।

इस कलश में तीन चौथाई पानी भरें और थोड़ा गंगाजल मिला दें। इसके बाद कलश में सुपारी, सिक्का, फूल, और अक्षत डाल दें। इसके बाद इसमें आम के पांच पत्ते लगा दें। इसके बाद पत्तों के ऊपर धान से भरा हुआ किसी धातु का बर्तन रख दें। धान पर हल्‍दी से कमल का फूल बनाएं मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए उसके ऊपर मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा रख दें।

कलश के सामने दाहिने ओर भगवान गणेश की प्रतिमा भी रख दें। तत्पश्चात पूजा में प्रयोग किये जाने वाले पानी में हल्‍दी और कुमकुम डाल दें। इसके बाद निम्न मंत्र का उच्चारण करें। ओम् श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमले प्रसीद प्रसीद। ओम् श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।।

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मंत्र के उच्चारण के बाद हाथों में फूल लेकर मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करें फूल अर्पित करें। मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को पंचामृत (दही, दूध, शहद, घी और चीनी का मिश्रण) से स्‍नान कराएं। इसके बाद पानी में सिक्का डालकर स्‍नान कराएं। फिर प्रतिमा को साफ कपड़े से पोंछकर कलश के ऊपर रखे बर्तन में रख दें। इसके बाद मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को चंदन, केसर, इत्र, हल्‍दी, कुमकुम, अबीर और गुलाल अर्पित करें।

तत्पश्चात् मां की प्रतिमा पर हार चढ़ाएं। साथ ही उन्‍हें बेल पत्र और गेंदे का फूल भी अर्पित कर धूप जलाएं। प्रतिमा को मिठाई, नारियल, फल आदि अर्पित करें। इस प्रकार पूजन के अंत में मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए आरती कर प्रसाद वितरित कर दें।

Web Title: Diwali starts with Dhanteras, know why buy a broom on this day? ( Hindi News From Newstimes)


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