#NewstimesTrending : थम नहीं रहा दिल्ली का विवाद, आसान नहीं होती पुलिस की बगावत


NP863 06/11/2019 11:40:17
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Lucknow. दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच 2 नवंबर को हुए विवाद के बाद मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस कड़ी में मंगलवार 5 नवंबर को पुलिसकर्मियों ने तकरीबन 11 घंटे तक पुलिस हेडक्वार्टर पर धरना प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों का कनहा था कि उनकी ही पिटाई होने के बावजूद उन पर ही कार्रवाई किया जाना शर्मनाक है। 

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देर रात पुलिसकर्मियों का धरना प्रदर्शन भले ही समाप्त हो गया हो लेकिन उसके बाद अगले दिन बुधवार को भी समस्याएं कम होती दिखाई नहीं दी। बुधवार को कोर्ट के बाहर एक बार फिर वकीलों का प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान एक वकील ने आत्मदाह की कोशिश भी की। जिसके बाद जानकारी मिली की कोर्ट परिसर का हालचाल जानने को लेकर जज दौरा भी कर सकते हैं। इस दौरान एलजी के घर पर अधिकारियों की बैठक का दौर भी जारी रहा। इस बैठक में सीपी, ज्वाइंट सीपी समेत कई अन्य अधिकारी मौजूद रहें।   

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बता दें कि वकीलों और पुलिस की यह नाराजगी जल्द ही समाप्त होने वाली नहीं लग रही है। ज्ञात हो कि पहले भी पुलिस की ही नाराजगी का खामियाजा सरकारों को पहले भी भुगतना पड़ चुका है। साल 1973 में यूपी में कांग्रेस सरकार के दौरान घटिया खाने को लेकर पीएसी के जवानों ने रोष प्रकट किया था। उस दौरान शुरुआती विरोध को नकार दिया गया। उस दौरान अखबारों में सिंगल कॉलम में खबर छपी, जिसमें घटिया खाने का जिक्र किया गया। इसके बाद मई 1973 में पीएसी के जवानों में असंतोष फूटा और बगावती स्वर प्रखर हुए। इस घटना के बाद राज्य सरकार के हाथ पांव फूले और दिल्ली तक खलबली मच गयी थी। आनन फानन में आलम यह हुआ कि लखनऊ की सड़को पर सेना के वाहन दौड़ने लगे। सेना ने पुलिस लाइन को चारों ओर से घेर लिया। जिसके बाद पीएसी और सेना को आमने सामने देखा गया। कथिततौर पर उस दौरान हुई गोलीबारी में तकरीबन तीस विद्रोही जवान मारे गये। वहीं, सौ से अधिक जवानों को गिरफ्तार किया गया। सेना ने भले ही उस दौरान हालात पर काबू पा लिया हो लेकिन मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी को उस दौरान कुर्सी गंवानी पड़ी थी। 12 जून 1973 को उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर दी इसके बाद यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा।
क्या था मामला 
दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के बाहर शनिवार को वकीलों और पुलिस के बीच हिंसक झड़क देखने को मिली। कथिततौर पर पुलिस की ओर से की गयी फायरिंग के बाद वकील भड़क गये। जिसके बाद गुस्साए वकीलों ने पुलिस की गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की। वकीलों ने कई गाड़ियों को आग के हवाले भी कर दिया। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गयी। विवाद इस कदर बढ़ा कि वकीलों ने परिसर में ही गाड़ी खड़ी करके तोड़फोड़ शुरु कर दी। फिर पुलिस की कई गाड़ियों में आग लगा दी। हिंसक झड़प में कई लोग घायल भी हो गयी जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 

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इस विवाद की शुरुआत तीस हजारी कोर्ट के लॉकअप के बार वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई से हुई। आरोप है कि थर्ड बटालियन के पुलिसकर्मियों ने वकीलों पर हमला किया। जिसके चलते कोर्ट में हंगामा शुरु हुआ। बता दें कि मुलजिम को पेश करने के बाद पुलिसकर्मी वापस आ रहा था तभी वकील सुरेंद्र उस मुलजिम से बात करने लगे। बात करते हुए वह मुलजिम के साथ लॉकअप तक जा पहुंचे जिस पर पुलिसकर्मी ने उन्हें रोंकते हुए कहा कि यहां वकील के आने की अनुमति नहीं है। जिस पर देखते ही देखते धक्का मुक्की शुरु हो गयी। मामूली कहासुनी से शुरु हुआ मामला इतना बढ़ गया कि पुलिसकर्मी और वकील आमने सामने आ गये। इसी बीच कथिततौर पर पुलिकर्मी की ओर से चलाई गयी गोली में सुरेंद्र घायल हो गये। जिस पर न सिर्फ पुलिस की जिप्सी में आग लगा दी गयी, बल्कि कई अन्य वाहनों को भी आग के हवाले किया गया। फिलहाल फायरिंग की घटना से इंकार किया जा रहा है औऱ अभी भी मौके पर काफी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

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