National Education Day 2019: ये हैं वे 6 विश्वगुरु जिनके योगदान को कभी नहीं भूल पाएगी दुनिया


NAZO ALI SHEIKH 11/11/2019 10:44:11
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Lucknow. 11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। ये दिवस भारत के पहले शिक्षा मंत्री और भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिन पर उनके सम्मान में मनाया जाता है। साल 2008 में वैधानिक रूप से इसकी शुरुआत की गई थी। भारतीय समाज में पौराणिक काल से ही शिक्षा और शिक्षक को उच्च दर्जा दिया जाता रहा है। गुरु-चेला परंपरा सनातन धर्म का आधार रही है। जाहां गुरु अपने शिष्यों को कोई शिक्षा या विद्या सिखाते हैं और फिर शिष्य गुरु के रूप में किसी और को शिक्षा देते है। शिक्षा दिवस के मौके पर हम आपको बताते हैं विश्व के उन 6 गुरुओं के बारे में, जिनके योगदान को दुनिया हमेश याद रखेगी। 

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  सर इसाक न्यूटन 

सर इसाख न्यूटन एक मैथेमैटिक्स और साइंस के जाने माने टीचर थे। जिन्होंने दुनिया को गुरत्वाकर्षण  के बारे में बताया। उन्होंने सूर्य और ग्रहों की गति को समझाने कि लिए लॉ ऑफ मोशन और गुरुत्वाकर्षण की थ्योरी का उपयोग किया। न्यूटन ने सबसे पहले पता लगाया की सफेद रोशनी असल में स्पेक्ट्रम यानी सात रंगो की रोशनी से मिलकर बनती है। उन्होंने साल 1687 में 'न्यूटनस रिसर्च' के नाम से किताब प्रकाशित की, जो बाद में प्रसिद्ध किताब 'परिनसिपिया' का आधार बनी। इन किताबों ने उस समय दुनिया को सोचने का नया नजरिया प्रदान किया। न्यूटन निश्चित ही दुनिया के सर्वश्रेछ शिक्षकों में से एक हैं।

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  पाइथागोरस

पाइथागोरस एक प्रसिद्ध दार्शनिक, गणितज्ञ और शिक्षक थे। उनके सिद्धांत आज भी स्कूलों में सिखाए जाते हैं। उन्हें पाइथागोरस थ्योरम के लिए जाना जाता है। पाइथागोरस को 'फादर ऑफ नंबर' की उपाधि भी दी गई है। उन्होंने गणित और संगीत के बीच संबंध का भी आविष्कार किया था। क्रोटोन में उन्होंने एक गुप्त समाज की स्थापना की, जहां लोगों ने एक संरचित जीवन का पालन किया।

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  डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी हुए। उन्होंने पश्चिमी आलोचकों से हमेशा हिंदू धर्म का बचाव किया और हिंदूओं को समकालीन पहचान दिलाने में भी योगदान दिया। डॉ. सर्वपल्ली ने भारत और पश्चिम देशों में हिंदू धर्म को समझाने में एक प्रभावशाली भूमिका निभाई, जिससे उन्हें दोनों ही जगहों पर खूब सम्मान मिला। वे भगवद गीता, उपनिषदों और ब्रह्म सूत्र पर अपनी टिप्पणियों के लिए भी जाने जाते थे। उन्हें साल 1954 में भारत रत्न (भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार) से सम्मानित किया गया था।

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  अल्बर्ट आइंस्टीन

अल्बर्ट आइंस्टीन एक भौतिक वैज्ञानिक, लेखक और एक शिक्षक थे। उन्हें रिलेटिविटी के क्षेत्र में योगदान के लिए जाना जाता है। अल्बर्ट आइंस्टीन को 'मास एनर्जी इक्वेशन' के लिए भी जाना जाता है, जिसने बाद में एटम बम बनाने वाली सबसे प्रसिद्ध इक्वेशन को जन्म दिया। जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी पर आज भी उनके द्वारा किए गए काम को सराहा जाता है। साल 1921 में आइंस्टीन को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

  सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षक और समाज सुधारक के रूप में जाना जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान महिलाओं के अधिकारों के लिए उन्होंने पुरजोर तरीके से आवाज उठाई। फुले ने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 18 स्कूलों का निर्माण कराया। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या, विधवाओं की हत्या और महिलाओं के खिलाफ होने वाली सामाजिक कुप्रथा को मिटाने के लिए भी काम किए। 19वीं सदी में केवल वही एकमात्र महिला नेत्री थी, जिन्होंने अपने प्रयासों से कई महिलाओं के जीवन को बदल दिया।

Web Title: National Education Day 2019: These are the 6 world gurus whose contribution will never be forgotten by the world ( Hindi News From Newstimes)


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