जानिए CJI दफ्तर को RTI दायरे में लाने के लिए मुहिम चलाने वाले शख्स के बारे में


NAZO ALI SHEIKH 14/11/2019 16:40:57
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New Delhi. आरटीआई नागरिकों के लिए एक मौलिक अधिकारों की तरह है। सुप्रीम कोर्ट ने आरटीआई कानून के दायरे में मुख्य न्यायाधीश के दफ्तर को भी लाने का फैसला सुना दिया है। अब आरटीआई का प्रयोग कर लोग इसकी जानकारी पा सकेंगे। आपको बता दें कि इस कार्य का श्रेय सुभाष चंद्र अग्रवाल आरटीआई कार्यकर्ता को जाता है। उन्होंने ही इसके लिए मुहिम चलाई थी।

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बताते चलें कि सीजेआई दफ्तर को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र ने 2007 में मुहिम की शुरुआत की थी। उन्होंने याचिका डालकर सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति के बारे में जानकारियां मांगी थी। उनकी याचिका पर जवाब देने से मना कर दिया गया था। जब उनको सूचना नहीं मिली तो सीआईसी के पास पहुंचे और सीआईसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चूंकि सीजेआई का दफ्तर भी आरटीआई कानून के अंतर्गत आता है। ऐसे में इस आधार पर आरटीआई के तहत जानकारी दी जा सकती है। सीआईसी के इस निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि सीजेआई का दफ्तर एक सार्वजनिक प्राधिकरण है। ऐसे में आरटीआई कानून के दायरे में इसे लाया जाना चाहिए। इसके बाद पीठ ने प्रकरण को सुरक्षित रख लिया था। अब इस पर फैसला सुना दिया गया है। फैसला आरटीआई कार्यकर्ता के पक्ष में आया। इससे आरटीआई कार्यकर्ताओं में खुशी भी है।

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आपको बता दें कि सुभाष दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से स्नातक हैं। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से मार्केटिंग और सेल्स मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री भी प्राप्त की है। वह एक आईएएस अफसर बनना चाहते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण व्यववसाय से जुड़ गए। सुभाष ने पहली बार यह खुलासा किया कि बस कंडक्टर टिकट के बिना यात्रियों से रुपए वसूल रहा था।

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सुभाष ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी। इसके बाद रेल मंत्रालय के सामने ताज एक्सप्रेस ट्रेन के अनियमित समय को लेकर आवाज बुलंद की। वह अखबारों को 3700 भी अधिक पत्र लिख चुके हैं। यही नहीं उनके नाम सबसे अधिक संख्या में संपादक के नाम पत्र प्रकाशित होने का गिनिज रिकॉर्ड भी है।

अमेरिकी के एक स्वयंसेवी संगठन जिराफ हीरोज प्रोजेक्ट 22 जनवरी 2015 में सुभाष चंद्र अग्रवाल जिराफ हीरो पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। यह पुरस्कार उनको आरटीआई का प्रयोग कर लोगों की भलाई करने के लिए दिया गया। जिराफ हीरोज प्रोजेक्ट एक गैर लाभकारी समूह है। यह संस्था ऐसे लोगों को सम्मनित करती है, बड़े पैमाने पर अनजान लोगों जिनमें अमेरिका और दुनिया के आम लोगों के लिए जोखिम उठाने का साहस हो।

Web Title: Know about the person who is campaigning to bring the CJI office in the RTI realm ( Hindi News From Newstimes)


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