जंयती विशेष: आज ही के दिन हुआ था रानी लक्ष्मीबाई का जन्म


NP1591 19/11/2019 12:46:32
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Lucknow: आज 19 नवम्बर को अंग्रेजों को धूल चटाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) की जयंती है। आज ही दिन झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का जन्म हुआ था। रानी लक्ष्मी एक महान यौद्धा थीं। जिन्होंने अपने दम पर पड़ोसी राज्यों और अंग्रेजों को कई बार शिकस्त दी। 'खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी' ये कविता आज भी रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बयां करती है।

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एक समय था जब एक-एक कर कई राजाओं ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेक दिए थे लेकिन झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपने साहस के दम पर अंग्रेजों को धूल चटाई थी। उन्होंने केवल 29 साल की उम्र में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से युद्ध की और रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुईं। रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) ने झांसी की रक्षा के लिए सेना में महिलाओं की भर्ती की थी। साधारण जनता ने भी अंग्रेजों से झांसी को बचाने के लिए हुए इस संग्राम में सहयोग दिया था।

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म और बचपन

रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) जन्म का 19 नवम्बर 1828 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi) शहर में एक मराठी परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका (Manikarnika) था लेकिन प्यार से लोग उन्हें मनु कहकर पुकारते थे। उनकी मां का नाम भागीरथीबाई और पिता का नाम मोरोपंत तांबे था। मोरोपंत एक मराठी थे और मराठा बाजीराव की सेवा में थे। माता भागीरथीबाई एक सुसंस्कृत, बुद्धिमान और धर्मनिष्ठ की थी। रानी लक्ष्मीबाई जब महज 4 साल की थी तब उनकी मां का देहान्त हो गया।

घर में मनु की देखभाल के लिये कोई नहीं था इसलिए उनके पिता उन्हें अपने साथ पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में ले जाने लगे। जहां चंचल और सुन्दर मनु को सब लोग उसे प्यार से "छबीली" कहकर बुलाने लगे। मनु ने बचपन में शास्त्रों की शिक्षा के साथ शस्त्र की शिक्षा भी ली। सन् 1842 में उनका विवाह झांसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ और वे झांसी की रानी बनीं। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। सन् 1851 में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। परन्तु चार महीने की उम्र में ही उसकी मृत्यु हो गयी। सन् 1853 में राजा गंगाधर राव का स्वास्थ्य बहुत अधिक बिगड़ जाने पर उन्हें दत्तक पुत्र लेने की सलाह दी गयी। पुत्र गोद लेने के बाद 21 नवम्बर 1853 को राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी। दत्तक पुत्र का नाम दामोदर राव रखा गया।

अंग्रेजी हुकूमत ने अपनी राज्य हड़प नीति के तहत बालक दामोदर राव के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। हालांकि मुकदमे में बहुत बहस हुई, परन्तु इसे खारिज कर दिया गया। अंग्रेज अधिकारियों ने राज्य का खजाना जब्त कर लिया और उनके पति के कर्ज को रानी के सालाना खर्ज में से काटने का फरमान जारी कर दिया। इसके परिणामस्वरूप रानी को झांसी का किला छोड़ कर झांसी के रानीमहल में जाना पड़ा, पर रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होनें हर हाल में झांसी राज्य की रक्षा करने का निश्चय किया।

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खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी

झांसी 1857 के संग्राम का एक प्रमुख केन्द्र बन गया जहां हिंसा भड़क उठी। रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी की सुरक्षा को सुदृढ़ करना शुरू कर दिया और एक स्वयंसेवक सेना का गठन प्रारम्भ किया। इस सेना में महिलाओं की भर्ती की गयी और उन्हें युद्ध का प्रशिक्षण दिया गया। साधारण जनता ने भी इस संग्राम में सहयोग दिया। झलकारी बाई जो लक्ष्मीबाई की हमशक्ल थी को उसने अपनी सेना में प्रमुख स्थान दिया।

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1857 के सितम्बर तथा अक्टूबर के महीनों में पड़ोसी राज्य ओरछा तथा दतिया के राजाओं ने झांसी पर आक्रमण कर दिया। रानी ने सफलतापूर्वक इसे विफल कर दिया। 1858 के जनवरी माह में अंग्रेजी सेना ने झांसी की ओर बढ़ना शुरू कर दिया और मार्च के महीने में शहर को घेर लिया। दो हफ्तों की लड़ाई के बाद अंग्रेजी सेना ने शहर पर कब्जा कर लिया। परन्तु रानी दामोदर राव के साथ अंग्रेज़ों से बच कर भाग निकलने में सफल रहीं। रानी झांसी से भाग कर कालपी पहुँची और तात्या टोपे से मिली।

तात्या टोपे और रानी की संयुक्त सेनाओं ने ग्वालियर के विद्रोही सैनिकों की मदद से ग्वालियर के एक क़िले पर क़ब्ज़ा कर लिया। बाजीराव प्रथम के वंशज अली बहादुर द्वितीय ने भी रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया और रानी लक्ष्मीबाई ने उन्हें राखी भेजी थी इसलिए वह भी इस युद्ध में उनके साथ शामिल हुए। 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रितानी सेना से लड़ते-लड़ते रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु हो गई। लड़ाई की रिपोर्ट में ब्रितानी जनरल ह्यूरोज़ ने टिप्पणी की कि रानी लक्ष्मीबाई अपनी सुन्दरता, चालाकी और दृढ़ता के लिये उल्लेखनीय तो थी ही, विद्रोही नेताओं में सबसे अधिक ख़तरनाक भी थी।

 

 

Web Title: Jubilee special: Rani Laxmibai was born on this day ( Hindi News From Newstimes)


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