महाराष्ट्र का सियासी संग्राम: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल तक टली, जानिए किसने क्या रखी दलील...


NP1509 24/11/2019 13:53 PM
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Mumbai. महाराष्ट्र में सियासत को लेकर मचे घमासान सियासी पर विपक्षी दलों की ओर से दायर याचिका पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई हुई। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई करीब एक घंटे तक चली, जो सोमवार तक के लिए टाल गयी है। वहीं, कोर्ट ने सीएम देवेंद्र फडणवीस को विधायकों के समर्थन का पत्र और राज्यपाल के साथ हुए पत्र व्यवहार को पेश करने के लिए कहा है। इस मामले में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, सीएम देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम अजीत पवार को नोटिस जारी किया है।

Supreme Court hearing on petition of Shiv Sena, NCP and Congress

बता दें कि महाराष्ट्र में शनिवार को देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने के बाद प्रदेश की राजनीति में विवाद शुरू हो गया है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस शनिवार शाम सुप्रीम कोर्ट पहुंची और नई सरकार को 24 घंटे के भीतर बहुमत साबित करने का निर्देश देने की अपील की थी।

वहीं, इस मामले में रविवार को जस्टिस एनवी रमन्ना, अशोक भूषण और संजीव खन्ना की पीठ सुनवाई की। इस दौरान शिवसेना की ओर से कपिल सिब्बल, एनसीपी की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और महाराष्ट्र भाजपा की ओर से मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा। 

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

शिवसेना के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए कपिल सिब्बल ने रविवार को कोर्ट बुलाए जाने के लिए जजों से माफी मांगी। कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य में बहुमत 145 सीटों का है। चुनाव पूर्व गठबंधन पहले आता है। चुनाव पूर्व गठबंधन टूट गया। अब हम चुनाव के बाद के गठबंधन पर भरोसा कर रहे हैं।

जस्टिस अशोक भूषण ने सवाल किया कि जब राज्यपाल भगत सिंह कोशयारी ने भाजपा को पत्र दिया था तो क्या उनके पास सरकार बनाने के लिए बहुमत था।

कपिल सिब्बल ने कहा कि सुबह 5 बजकर 17 मिनट पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया। सुबह 8 बजे 2 लोगों ने सीएम और डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली। उन्होंने सवाल किया कि इसके लिए क्या दस्तावेज दिए गए?

सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि कोर्ट को आज ही फ्लोर टेस्ट का आदेश देना चाहिए। अगर भाजपा के पास बहुमत है, तो उन्हें विधानसभा में साबित करने दें। अगर वे दावा नहीं करते हैं, तो उन्हें दावा करने दें। हमने इसे कर्नाटक में भी देखा है। अगर उनके (भाजपा) के पास बहुमत हैं, तो वह अपना बहुमत दिखाई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों को सरकार की जरूरत है। हमारे पास बहुमत है तो हम उसे साबित करने के लिए तैयार है। हम कल बहुमत साबित करने को तैयार। 

इस पर महाराष्ट्र भाजपा की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि रविवार को सुनवाई क्यों हो रही है, रविवार को कोई सुनवाई नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक इस केस को सूचीबद्ध नहीं किया जाना चाहिए।

एनसीपी की ओर से पेश हुए मनु सिंघवी ने कहा कि जब शाम 7 बजे घोषणा की गई कि हम सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं और उद्धव ठाकरे इसका नेतृत्व करेंगे, तो क्या राज्यपाल इंतजार नहीं करेंगे? उन्होंने कहा कि केवल 42-43 सीटों के सहारे अजीत पवार डिप्टी सीएम कैसे बने? यह लोकतंत्र की हत्या है।

सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि कल (शनिवार) एनसीपी ने फैसला लिया है कि अजीत पवार विधायक दल के नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनकी अपनी पार्टी का समर्थन नहीं है तो वह डिप्टी सीएम कैसे बने रह सकते हैं? 

एनसीपी के वकील ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट ने लगातार फ्लोर टेस्ट के आदेश दिए हैं चाहे 1998 में यूपी में हो या 2018 में कर्नाटक में हो। यह कैसे संभव हो सकता है कि जिसने कल बहुमत का दावा किया, वह आज फ्लोर टेस्ट से भाग रहा है?

इस पर भाजपा के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कुछ चीजें ऐसी हैं जो राष्ट्रपति के पास हैं जिस पर न्यायिक हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। आज आदेश पारित करने के लिए कोर्ट को जरूरत नहीं है। राज्यपाल का फैसला अवैधता नहीं था। उन्होंने कहा कि कोर्ट को फ्लोर टेस्ट की तारीख तय करने का आदेश पारित नहीं करना चाहिए। यहां तीनों दलों के पास कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के पास सरकार बनाने का मौलिक अधिकार नहीं है और उनकी याचिका को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें दोराय नहीं है कि शक्ति परीक्षण बहुमत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है। 

रोहतगी ने कहा है कि इनकी याचिका देखिए। राज्यपाल का आदेश रद्द करने की मांग कर रहे हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को आदेश दे सकता है पहले फ्लोर टेस्ट के लिए? संविधान के मुताबिक ऐसा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि वे तीन सप्ताह से सो रहे थे। उनके दावों का कोई सहायक दस्तावेज नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस रमन्ना ने कहा कि लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि राज्यपाल किसी को भी बुलाकर शपथ दिलवा दें। जवाब में मुकुल रोहतगी ने कहा कि किसी को सड़क से उठा कर शपथ नहीं दिलवाई गई। 

इसके बाद शिवसेना, NCP और कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट में सोमवार तक टाल दिया। साथ ही राज्य सरकार, केंद्र सरकार, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को सुप्रीम कोर्ट से नोटिस जारी किया है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कल 10.30 तक कागज़ात पेश करने को कहा है। 

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Web Title: Supreme Court hearing on petition of Shiv Sena, NCP and Congress ( Hindi News From Newstimes)


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