Constitution day: कैसे बना संविधान ? अब तक हुआ कुल 103 संशोधन


NP1591 26/11/2019 14:21:31
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Lucknow: आज की तारीख आजाद भारत के इतिहास में खास अहमियत रखता है। क्योंकि आज ही के दिन 26 नवंबर
को भारत गुलामी की बेड़ियों तोड़ने के बाद अपना संविधान लागू किया था। इसी दिन संविधान सभा ने इसे अपनी स्वीकृति दी थी। इसी कारण से इस दिन को 'संविधान दिवस' के तौर पर मनाया जाता है।

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संविधान सभा की 2 साल 11 महीने और 17 दिनों की कड़ी मेहनत और हजारों संशोधन से बनकर तैयार हुए भारतीय संविधान पर साल 1949 में इसी दिन सहमति बनी, जिसके बाद 26 जनवरी 1950 से भारत में संविधान लागू हुआ। समाज को निष्पक्ष न्याय प्रणाली मिली। नागरिकों को मौलिक अधिकारों की आजादी मिली और कर्तव्यों की जिम्मेदारी भी।

कैसे बने संविधान निर्माण के हालात?

अंग्रेजी शासन में देखें तो 1857 की क्रांति के दौरान ही भारत में संविधान की मांग उठ चुकी थी। उसी दौरान हरीशचंद्र मुखर्जी ने संसद की मांग की थी। 1914 में गोपाल कृष्ण गोखले ने भी संविधान को लेकर अपनी बात रखी। अंग्रेजों ने इसे लेकर अपनी सहमति तो दी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। 1922 में महात्मा गांधी ने भारत का संविधान भारतीयों द्वारा ही बनाने पर जोर दिया। 1928 में मोतीलाल नेहरू इसे लेकर स्वराज रिपोर्ट पेश की। इस बीच 1935 में अंग्रेजों ने 'गर्वमेंट ऑफ इंडिया एक्ट' बनाया, जिसे कमजोर करार दिया गया। इसके चलते कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच की दूरियां भी बढ़ीं। इसके करीब 10 साल बाद डॉ. तेजबहादुर सप्रू ने सभी दलों के साथ मिलकर एक संविधान का खाका बनाने की पहल की।

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इधर दूसरे विश्व युद्ध में चर्चिल की हार के बाद तत्कालीन सरकार ने 3 मंत्री भारत भेजे, इसे 'कैबिनेट मिशन' का नाम दिया गया, लेकिन कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों के ही विरोध के चलते ये सफल नहीं हो सका। इस दौरान मुस्लिम लीग की बंटवारे की राजनीति और हिंसा को बढ़ावा मिला। इस सबके बीच ही आगे चलकर संविधान सभा का गठन हुआ। डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा को संविधान सभा का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया जबकि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए। इस संविधान सभा के वजूद और मकसद पर चर्चिल और मुस्लिम लीग समेत बाकियों ने सवाल भी उठाए, लेकिन सभी सवाल बेबुनियाद निकले। संविधान सभा ने गंभीरता और लगन से अपना काम किया और आकार दिया दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के संविधान को, जो ​दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान भी था।

अब तक संविधान में कुल 103 संशोधन हुए

70 साल के दौरान संविधान में कुल 103 संशोधन हुए हैं। पहला संशोधन 1951 में अस्थायी संसद ने पारित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक केवल 99वें संशोधन को असांविधानिक करार दिया है। यह राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के गठन से संबंधित था। राज्यसभा का गठन 1952 में हुआ और यह अब तक 107 संविधान संशोधनों को पारित कर चुकी है। इनमें से सिर्फ एक को लोकसभा ने नहीं माना जबकि चार संशोधन लोकसभा भंग होने के कारण निष्प्रभावी हो गए। लोकसभा द्वारा पारित 106 में से 03 संशोधनों को राज्यसभा अमान्य कर चुकी है।

संविधान में संशोधन की प्रक्रिया

संविधान निर्माण के दौरान संविधान सभा के सदस्यों का स्पष्ट मत था कि संविधान को बदलते समय और परिवेश के अनुरूप बदलना चाहिए, लेकिन उनका यह भी मत था कि बदलाव की प्रक्रिया इतनी लचीली हो कि आसानी से संशोधन किया जा सके। भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन की प्रक्रिया का प्रावधान है।

सामान्य बहुमत द्वारा

कई संवैधानिक प्रावधानों को संसद में सामान्य बहुमत के द्वारा संशोधित किया जा सकता है। इसमें नागरिकता, नए राज्यों का गठन, संसद में कोरम, पांचवें और छठे शेड्यूल में शामिल तथा अन्य प्रावधान शामिल हैं। इसकी आर्टिकल 368 में अलग से चर्चा नहीं है।

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विशेष बहुमत द्वारा

संसद में विशेष बहुमत का मतलब है दोनो सदनों के दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन। इसमें राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग, देश में आपातकाल की घोषणा आदि से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

विशेष बहुमत और राज्यों के बहुमत द्वारा

राष्ट्रपति का चुनाव, केंद्र और राज्यों के अधिकार, संविधान में संशोदन आदि से संबंधित प्रावधानों में बदलाव के लिए संसद के दोनों सदनों के विशेष बहुमत के साथ कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुमोदन भी अनिवार्य है।

संशोधन की प्रक्रिया

संविधान में संशोधन से संबंधित बिल संसद के किसी भी सदन में पेश किए जा सकते हैं। इसे दोनों सदनों में सदस्यों के बहुमत और वोटिंग के दौरान मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की संस्तुतिु मिलने के बाद ही विधेयक कानून बनता है।

 

 

 

Web Title: Constitution day: how constitution was made, 103 amendments till date ( Hindi News From Newstimes)


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