#NewstimesTrending : 2-3 दिसंबर की वह रात जब सांसे ही बन गयी थी कातिल


NP863 02/12/2019 16:42:55
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Lucknow. हजारों लोगों को मौत के मुंह में धकेलने वाली 1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की ‘सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं’में से एक है। यह उस रात का किस्सा है जब सांसे खुद ही कातिल बन गयी थी और लोगों को कश्मकश थी कि वह सांस ले भी या नहीं। 2-3 दिसंबर 1984 की उस रात को भोपाल के लोग मौत मांग रहे थे, जिससे वह आजाद हो सके उस घुटन और जलन से जो मौत से ज्यादा कष्टकारी थी। 

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भोपाल में अमेरिकन कंपनी यूनियन कार्बाइड के कैमिकल प्लांट से निकली जहरीली गैस ने देखते ही देखते 2-3 दिसंबर 1984 को हजारों लोगों की जान ले ली। टैंक नंबर 610 से निकली मेथाइल आइसोसायनेट ने कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 5 हजार लोगों को मौत की नींद सुला दिया। जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस त्रासदी से कुल 15 हजार 274 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना से 5 लाख 50 हजार से भी ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे जो भोपाल की दो तिहाई जनसंख्या के बराबर है। बावजूद इसके कंपनी का मालिक वारेन एंडरसन बड़े आराम से भारत से निकल गया था। 
एक दिन की हिरासत के बाद समुद्र किनारे बिताई जिंदगी 
भोपाल गैस त्रासदी की इस घटना के बाद यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन वारेन एंडरसन को एक दिन के लिए हिरासत में रखा गया। इसके बाद वह बड़े आराम से देश से फरार होने में कामयाब हो गया। वारेन एंडरसन का इस तरह फरार हो जाना देश के सिस्टम के लिए बड़ा तमाचा था। लेकिन फिर भी उसे वापस लाने या सजा दिलाने की दिशा में कोई भी ऐसा प्रयास नहीं किया गया जिसमें सफलता मिली हो। आलम यह हुआ कि वारेन एंडरसन बड़े आराम से 92 साल की उम्र तक अपनी जिंदगी अमेरिका के कैलिफोर्निया के समुद्र के किनारे बने घर में बिताता रहा। आखिर में 29 सितंबर 2014 को उसकी मौत हुई। 

 bhopal gas tragedy

2-3 दिसंबर की रात कब क्या हुआ

रात 9:00 बजे - आधा दर्जन कर्मचारियों ने भूमिगत टैंक में पानी की पाइप लाइन की सफाई का काम शुरु किया। 
10:00 बजे - भूमिगत टैंक नंबर 610 में पानी पहुंचाने की प्रतिक्रिया शुरु हुई। टैंकर का तापमान बढ़ा और गैस बनने लगी। 
10:30 बजे - टैंक से गैस पाइप में पहुंचने लगी और वॉल्व ठीक न होने से गैस का रिसाव शुरु हुआ। 
रात 12:50 बजे - कर्मचारी घबराए और वॉल्व बंद करने का प्रयास शुरु हुआ। खतरे का सायरन बजने लगा। 
2:00 बजे - सबसे पहला पीड़ित अस्पताल पहुंचा जिसके मुंह से झाग निकल रहा था। 
2:10 बजे - कारखाने के आसपास के सभी इलाके में लोगों को खांसी और जलन होने लगी। 
सुबह 4:00 बजे - पूरे शहर में गैस फैल चुकी थी और लोग मरीज बन चुके थे। 
6:00 बजे - पुलिस की गाड़ी पर लगे लाउड स्पीकर से ऐलान हुआ - सब कुछ सामान्य है।  

Web Title: 35 years of bhopal gas tragedy NewstimesTrending ( Hindi News From Newstimes)


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