Ground Report Part-2 : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या के मुस्लिम समुदाय ने क्‍या कहा?


NP1357 03/12/2019 15:55:37
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डॉ. अरविंद पाण्‍डेय

विशेष संवाददाता, न्‍यूज टाइम्‍स पोस्‍ट

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में सतही तौर पर ‘चहुंओर शांति’ जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन मुस्लिम दिलों में ‘पूर्ण शांति’ नहीं है। वहां सब कुछ ठीक नहीं है। दरअसल, मुस्लिम समुदाय में कोर्ट के फैसले के बाद ढका-छिपा गम और गुस्सा मौजूद है, जिसका दर्द उनसे बातचीत में सतह पर आ जाता है। इस समुदाय के पांच लोगों से की गई बातचीत के दौरान तीन लोगों ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पुनर्विचार याचिका दायर करने के फैसले को जायज ठहराया। जिन लोगों से बातचीत की गई, उनमें सभी अयोध्या के शृंगार हाट में दुकानदारी करते हैं, लेकिन इनमें कुछ लोग रहते फैजाबाद में हैं। हालांकि सभी ने स्वीकार किया कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने जो फैसला दिया है, मान्य है। अलबत्ता, यह उसकी ही दी गई व्यवस्था है कि मुस्लिम पक्ष चाहे तो पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है, इसलिए पुनर्विचार याचिका दायर करना हमारा हक है, इसलिए भी इसे दायर किया जा रहा है।

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अयोध्या के शृंगार हाट में दुकान करने वाले वहीद अहमद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र छेडऩे पर कहा कि कोर्ट का फैसला उचित है। पुनर्विचार याचिका की बात पर उन्होंने कहा कि जो लोग राजनीतिक बात कर रहे हैं, वे अपना काम कर रहे हैं। आगे सरकार पर निर्भर है कि वह फैसले पर कैसे अमल करेगी। एक सच्चा मुसलमान कभी नहीं चाहेगा कि हमारा देश टूटे या बर्बाद हो। कुरान में भी ‘मुल्क सबसे पहले’ की बात की गई है। मेरे पूर्वजों ने समाज की सेवा के लिए ‘हाजी फकीर मोहम्मद वक्फ न. 2-ए’ ट्रस्ट का गठन किया था और उसे अपनी पूरी संपत्ति दान में दे दी थी, जिसकी कीमत आज अरबों रुपये है। इसके जरिए हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई की बिना भेदभाव के सेवा की जाती रही है। खानदान की तरह से मैं इस ट्रस्ट का मुतवल्ली भी हूं।

जामा मस्जिद, कोठा पारचा, फैजाबाद निवासी और शृंगार हाट में व्यवसाय करने वाले शौकत अली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पुनर्विचार याचिका दायर करने के निर्णय को उचित बताया। मस्जिद के लिए जमीन की बाबत कहा, मन्दिर के पास मस्जिद की जमीन दिए जाने पर झगड़ा-फसाद कायम रहेगा और हम बाहर जमीन नहीं चाहते हैं। फैसले के पहले प्रशासनिक व्यवस्था पर कहा, प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की थी, जिस पर फैसले के एक दिन पहले 8 नवम्बर को बारा रबी अव्वल (बारावफात) पर हम लोगों ने फैजाबाद में कोई जुलूस नहीं निकाला, क्योंकि हम लोग किसी को माहौल बिगाडऩे के लिए कोई अवसर नहीं देना चाहते थे। इसके बाद अभी तक हम लोगों ने मिलाद नहीं की। विवाद के नाते ही बाहर के व्यापारी यहां पैसा नहीं लगाते हैं, जबकि आगरा के बाद फैजाबाद देश की दूसरी सबसे बड़ी जूते की मंडी है। 

अयोध्या के शृंगार हाट में ही दुकान करने वाले मो. सलीम का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बहुत खुश हैं, लेकिन एक बात से नाखुशी है। कोर्ट ने फैसले में जो पांच एकड़ जमीन देने को कहा है, उसे अयोध्या से बाहर देने की बात भी सुनाई दे रही है। यह गलत है। कोर्ट ने भी अयोध्या में ही जमीन देने की बात कही है। यह पूछे जाने पर कि आपके हिसाब से मस्जिद के लिए जन्मभूमि परिसर में किस ओर जमीन देनी चाहिए, उन्होंने कहा कि यूसुफ आरा मशीन के पास जमीन देनी चाहिए। वहां पहले से कब्रिस्तान है, जिसकी बगल में मस्जिद बनाई जा सकती है। मन्दिर के नजदीक मस्जिद होने पर माहौल बिगडऩे की आशंका के सवाल पर उन्होंने कहा कि इससे माहौल नहीं बिगड़ेगा। 

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रामजन्मभूमि के पास ही रहने वाले सिलाई मास्टर सिराज अहमद ने कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर करने को उचित बताया। कहा, यह मिल्कियत का मुकदमा है और इसी आधार पर फैसला होना चाहिए। कोर्र्ट ने माना कि वहां मूर्ति रखी गई थी। यह भी माना कि 1992 में विवादित ढांचा ढहाना गैरकानूनी था। बावजूद इसके 142 के तहत फैसला दिया जाना समझ से परे है। पुनर्विचार याचिका के जरिए हम अपने हक का इस्तेमाल कर रहे हैं। मस्जिद के लिए जमीन दिए जाने की बाबत उन्होंने कहा कि जो जमीन थी, वह नहीं मिली। जन्मभूमि परिसर में ही जमीन दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन शांति और देश पहले है, बाकी चीजें बाद में।

अयोध्या के गोला घाट के निवासी और शृंगार हाट में व्यवसाय करने वाले अतीक अहमद ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने को जायज ठहराते हुए कहा कि जब अदालत वही होगी, तो फैसला क्यों बदला जाएगा। ऐसे में फैसला बदले जाने की उम्मीद सिर्फ 10 प्रतिशत ही है। नेता अपना करेंगे, लेकिन आम आदमी माहौल नहीं बिगाडऩे देना चाहता है। मस्जिद के लिए जमीन की बाबत उन्होंने कहा कि कोर्ट ने अयोध्या में ही जमीन देने को कहा है, इसलिए पूरे अयोध्या में ही कहीं जमीन देना ठीक रहेगा, जबकि कुछेक लोग अयोध्या से बाहर जमीन दिए जाने की बात कर रहे हैं।

क्या कहते हैं मुस्लिम पक्षकार

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मुस्लिम पक्षकार और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी हाजी महबूब ने एक बातचीत में कहा कि पुनर्विचार याचिका तो दायर ही होगी। इसके औचित्य के सवाल पर कहा कि कोर्ट हमारी सब मानती है, लेकिन धारा 142 के तहत अलग फैसला सुना देती है। हमारे लिए यह एक मौका है। कोर्ट का फैसला मानने वाले बयान का हवाला देने पर कहा कि हां, कहा था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। मस्जिद के लिए जमीन की बाबत पूछे जाने पर कहा कि पुनर्विचार याचिका के बाद सोचेेंगे कि जमीन के लिए क्या रुख अपनाया जाए।

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बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार इकबाल अंसारी ने पर्सनल लॉ बोर्ड के पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने की बाबत कहा कि देश की सबसे बड़ी अदालत के इस अहम फैसले के बाद अब किसी को इस तरह की याचिका नहीं दायर करनी चाहिए। जो चार पक्षकार याचिका दायर करने जा रहे हैं, उन सबका अलग-अलग मुकदमा है। सबकी अलग-अलग राजनीति है। इस याचिका के अंजाम की बाबत पूछने पर कहा कि यह याचिका खारिज हो जाएगी। सन् 2010 में ही पिता जी (हाशिम अंसारी) ने हाईकोर्ट का फैसला मान लिया था, लेकन बाद में ‘हिन्दू-मुसलमान’ हो गया। अब इस मामले को आगे बढ़ाने से मुस्लिम समाज का नुकसान ही होगा। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर को लेकर अयोध्‍या के संत समाज की राय जानने लिए आप ग्राउंड रिपोर्ट पार्ट - 3 पढ़ें। 

Ground Report Part-1: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जानें अयोध्या का माहौल

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Web Title: What did the Muslim community of Ayodhya say after the Supreme Court's decision ( Hindi News From Newstimes)


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