PART-1: केवल नगर मात्र नहीं, मानव संस्कृति की राजधानी है अयोध्या, पढ़ें रिपोर्ट


NP1357 05/12/2019 16:53:58
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अयोध्या केवल एक नगर मात्र नहीं है। वास्तव में यह पृथ्वी पर मानव जाति की उत्पत्ति, उसकी संस्कृति और उसके समग्र सभ्यताओं के विकास की वास्तविक राजधानी है। आदि पुरुष मनु का आविर्भाव इसी अयोध्या के साथ हुआ और उन्हीं मनु से मानव समुदाय का विकास सम्भव हो पाया। इसके लिए पश्चिम की किसी अवधारणा में जाने की आवश्यकता नहीं बल्कि केवल अपनी श्रुतियों, स्मृतियों और स्वयं के इतिहास को ही जानने की आवश्यकता है। पश्चिमी इतिहासकारों, जीवशास्त्रियों, पुरावैज्ञानिकों, जीवाश्म विज्ञानियों अथवा दार्शनिकों ने सृष्टि और मनुष्य की उत्पत्ति को लेकर चाहे जितनी व्याख्याएं दी हों, परन्तु उनकी अभी तक कोई सटीक व्याख्या नहीं पाई गई। उनकी सारी खोज कुछ हजार वर्षों पूर्व से शुरू होकर सिमट जाती हैं और इसीलिए वे कोई नतीजा नहीं दे पाते। 

उनके पास आधार साहित्य ही नहीं है, इसलिए उनकी अवधारणाओं को वास्तविकता की कसौटी खारिज कर देती है। उदाहरण के लिए, उनकी बन्दर से मनुष्य के विकसित होने की अवधारणा यदि सही होती तो आज धरती पर बन्दर नहीं होने चाहिए थे, क्योंकि बन्दर को विकसित होकर मनुष्य बन जाना चाहिए था। वास्तविकता यह है कि सृष्टि के उद्भव और उसके समग्र विकास की गाथा हमारी श्रुतियों और अन्य वांग्मयों में उपलब्ध है, लेकिन दुर्भाग्य है कि हमारे यहां उन पर कोई कारगर अध्ययन या शोध नहीं हो पाया। श्रुति परम्परा का ज्ञान हमें मिलता तो रहा, लेकिन बीते हजार वर्षों में भारत पर दूसरी सभ्यताओं के हमलों ने हमारी उस विरासत को तोड़ा और हमारी ज्ञानार्जन की अपनी परम्परा विलुप्त हो गई। अभी मात्र 72 साल पहले ही हम आजाद हुए हैं, लेकिन विडम्बना है कि अब ज्ञानार्जन की केवल पश्चिमी परम्पराओं पर हम जीने लगे हैं। वह पश्चिम, जिसके पास शिक्षा और ज्ञान का कुल अनुभव ही महज कुछ सौ वर्षों का है। 

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इतिहास में अयोध्या 

ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि अयोध्या रघुवंशी राजाओं की बहुत पुरानी राजधानी थी। ऐसी धारणा है कि स्वयं मनु ने अयोध्या का निर्माण किया था। वाल्मीकि रामायण से पता चलता है कि स्वर्गारोहण से पूर्व रामचन्द्र जी ने कुश को कुशावती नामक नगरी का राजा बनाया था। श्रीराम के पश्चात अयोध्या उजाड़ हो गई थी, क्योंकि उनके उत्तराधिकारी कुश ने अपनी राजधानी कुशावती में बना ली थी। कालिदास के महाकाव्य ‘रघुवंश’  से ज्ञात होता है कि अयोध्या की दीन-हीन दशा देखकर कुश ने अपनी राजधानी पुन: अयोध्या में बनाई थी। महाभारत में अयोध्या के दीर्घयज्ञ नामक राजा का उल्लेख है, जिसे भीमसेन ने पूर्वदेश की दिग्विजय में जीता था।

घटजातक में अयोध्या (अयोज्झा) के कालसेन नामक राजा का उल्लेख है। गौतमबुद्ध के समय कोसल के दो भाग हो गए थे - उत्तर कोसल और दक्षिण कोसल जिनके बीच में सरयू नदी बहती थी। अयोध्या या साकेत उत्तरी भाग की और श्रावस्ती दक्षिणी भाग की राजधानी थी। इस समय श्रावस्ती का महत्व अधिक बढ़ा हुआ था। बौद्ध काल में ही अयोध्या के निकट एक नई बस्ती बन गई थी, जिसका नाम साकेत था। बौद्ध साहित्य में साकेत और अयोध्या दोनों का नाम साथ-साथ भी मिलता है, जिससे दोनों के भिन्न अस्तित्व की जानकारी प्राप्त होती है। 

वाल्मीकि रामायण में अयोध्या का उल्लेख कोशल जनपद की राजधानी के रूप में किया गया है। पुराणों में इस नगर के सम्बन्ध में कोई विशेष उल्लेख नहीं मिलता है, परन्तु इस नगर के शासकों की वंशावलियां अवश्य मिलती हैं, जो इस नगर की प्राचीनता एवं महत्व के प्रामाणिक साक्ष्य हैं। ब्राह्मण साहित्य में इसका वर्णन एक ग्राम के रूप में किया गया है। ऐसा वर्णन मिलता है कि सूत और मागध उस नगरी में बहुत थे। अयोध्या बहुत ही सुन्दर नगरी थी। अयोध्या में ऊंची अटारियों पर ध्वजाएं शोभायमान थीं और सैकड़ों शतघ्नियां उसकी रक्षा के लिए लगी हुई थीं।

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राम के समय यह नगर ‘अवध’ नाम की राजधानी से सुशोभित था। अभी उपलब्ध बौद्ध ग्रन्थों के अनुसार, अयोध्या पूर्ववती तथा साकेत परवर्ती राजधानी थी। भारतवर्ष के पवित्र स्थानों में इसका नाम मिलता है। प्रख्यात चीनी यात्री फाह्यान ने इसका ‘शा-चें’ नाम से उल्लेख किया है, जो कन्नौज से 13 योजन दक्षिण-पूर्व में स्थित था। 

एक इतिहासकार मललसेकर ने पालि-परम्परा के साकेत को सई नदी के किनारे उन्नाव जिले में स्थित सुजानकोट के खण्डहरों से समीकृत किया है। नालियाक्ष दत्त एवं कृष्णदत्त बाजपेयी ने भी इसका समीकरण सुजानकोट से किया है। थेरगाथा अट्टकथा में साकेत को सरयू नदी के किनारे बताया गया है। अत: सम्भव है कि पालि का साकेत, आधुनिक अयोध्या ही हो। इसके आगे की स्‍टोरी पढ्ने के लिए आपको पार्ट 2 पर जाना होगा।

PART-2: केवल नगर मात्र नहीं, मानव संस्कृति की राजधानी है अयोध्या, पढ़ें रिपोर्ट

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Web Title: Ayodhya is not only the city but the capital of human culture ( Hindi News From Newstimes)


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