सेना कोर्ट को निष्क्रिय रखना सैनिकों और उनके परिवारों के नैसर्गिक अधिकार के खिलाफ: विजय पाण्डेय


NP1591 06/12/2019 17:30:14
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Lucknow: सशत्र-बल अधिकरण (सेना कोर्ट ) सेवारत और सेवानिवृत सैनिको एवं उनके पीड़ित परिवारों को नैसर्गिक और त्वरित न्याय प्रदान करने का एक मात्र फोरम है, लेकिन वर्तमान में दस सशत्र-बल अधिकरण में सिर्फ दो बेंच कार्यरत है l लखनऊ स्थित अधिकरण में कुल तीन बेंच हैं लेकिन उनमें से एक भी बेच चार महीने से कार्य नहीं कर रही है, जिसकी वजह से सैनिक न्याय के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर हैं और जिन सैनिकों का आदेश हो चुका है उनका अनुपालन भी बेंच के आभाव में नहीं हो पा रहा है।

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एएफटी बार के अधिवक्ता और पूर्व महामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि सदस्यों की नियुक्ति न करके देश के सैनिकों को न्याय से वंचित किया जाना विधि सम्मत और संविधान सम्मत नहीं है क्योकि न्याय पाने का अधिकार नैसर्गिक अधिकार है जिसे किसी भी दृष्टिकोण से स्थगित नहीं किया जा सकता, लेकिन सरकार बेंच की नियुक्ति न करके हमारे सैनिकों और उनके परिवारों को इस अधिकार से वंचित कर रही है।  

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पूर्व महामंत्री विजय कुमार पाण्डेय ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार में रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ, कानून मंत्रालय के सचिव अनूप कुमार में दीरत्ता एवं न्याय मंत्रालय के सचिव डॉ. आलोक श्रीवास्तव को पत्र लिखकर मांग करते हुए कहा कि सेना के जवान देश की सुरक्षा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने को तत्पर रहते हैं लेकिन उनको और उनके परिवार को न्याय प्रदान करने वाले फोरम को निष्क्रिय रखना उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय है।  महामंत्री पी.के. शुक्ला ने कहा कि सरकार सैनिकों और उनके परिवार को न्याय से वंचित करना, कर्मचारियों को बगैर किसी कार्य के लगभग एक सौ बीस करोड़ रुपए वेतन और खर्च के रूप में देना, न्यायिक-व्यवस्था को मृतप्राय बना देना किसी भी रूप में न्यायोचित नहीं है, साथ ही उन्होंने सरकार से सेना कोर्ट लखनऊ में न्यायिक और प्रशासनिक सदस्यों की अविलम्ब नियुक्ति की मांग की।

 

 

Web Title: Inaction of army court against the natural rights of soldiers and their families: Vijay Pandey ( Hindi News From Newstimes)


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