#NewstimesTrending : अमित शाह बोले घुसपैठियों और शरणार्थियों में करना होगा फर्क


NP863 09/12/2019 18:06:31
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Lucknow. गृह मंत्री ने सोमवार(9 दिसंबर 2019) को विपक्षियों के भारी विरोध के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया। विधेयक पेश करने से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को व्हीप जारी किया। बिल को पेश करने के दौरान अमित शाह ने कहा कि इस बिल के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। बता दें कि अगर नागरिक संसोधन बिल अगर कानून का रूप ले लेता है तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण जो भागकर भारत आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को CAB के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी।

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नागरिकता बिल जिस दौरान लोकसभा में पेश हुआ तो हुई वोटिंग में 293 वोट हां के पक्ष में और 82 विरोध में पड़े। लोकसभा में कुल 375 सांसदों ने वोट किया। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि यह बिल 0.001 प्रतिशत भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। इस बिल से जुड़े विपक्ष के जो भी सवाल हैं उन सभी का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों के बिना भी राशन कार्ड सहित शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। नागरिकता विधेयक में कोई भेदभाव नहीं है यह अधिकार देता है छीनता नहीं है। हमें घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच अंतर समझना होगा। हम पूर्वोत्तर के स्वदेशी रिवाजों और संस्कृतियों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। 

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एआईएमआईएम सांसद ने दिया विवादास्पद बयान 
लोकसभा में एआईएमआईएम सांसद अकबरुद्दीन ओवैसी ने गृहमंत्री के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया। इस बयान के बाद हंगामा मच गया। उन्होंने कहा कि मैं आपसे(स्पीकर) और गृह मंत्री से अपील करता हूं कि इस देश को बचा लीजिए। मुस्लिम भी इस देश का हिस्सा हैं और उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो रहा है। 
अमित शाह और अधीर रंजन के बीच हुई बहस 
बिल पेश करने के दौरान लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बिल के विरोध में कहा कि यह और कुछ नहीं बल्कि हमारे देश के अल्पसंख्यक पर लक्षित कानून है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 13, अनुच्छेद 14 को कमजोर किया जा रहा है। जिस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है और हम सभी सवालों के जवाब देने को तैयार है। इस दौरान अमित शाह ने अधीर रंजन चौधरी से यह भी कहा कि वॉकआउट मत कर जाना। 


अमित शाह ने यह भी कहा कि - 
* ऐसा नहीं है कि पहली बार कोई सरकार नागरिकता के लिए निर्णय कर रही है। 1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने निर्णय किया कि बांग्लादेश से आए लोगों को नागरिकता दी जाएगी। फिर पाकिस्तान से आए लोगों को नागरिकता क्यों नहीं दी जाएगी?  
* आर्टिकल 14 ही था तो सिर्फ बांग्लादेश ही क्यों?
* य़ह बिल बांग्लादेश से आए लोगों के लिए भी है। वहां नरसंहार रुका नहीं है। 1971 के बाद अभी भी वहां अल्पसंख्यकों को चुन चुन कर प्रताड़ित करने की घटनाएं हो रही हैं। 
* यूगांडा से आए लोगों को भी इस देश में ही कांग्रेस के शासन में शरण दी गयी। आखिर यूगांडा ही क्यों इंग्लैण्ड से आए लोगों को क्यों नहीं किया गया। 
* राजीव गांधी ने असम एक्वाइर्ड किया औऱ फिर से 1971 तक सभी लोगों को स्वीकार किया। 1971 के बाद के लोगों को क्यों स्वीकार नहीं किया। आर्टिकल 14 वहां अप्लाई नहीं होता था ?

Web Title: what is the citizenship amendment bill 2019 ( Hindi News From Newstimes)


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