भाग-2 : पूरी दुनिया में रही सर्वोच्च न्यायालय के अहम फैसलोंं की गूंज


NP1509 31/12/2019 15:19:14
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  • समझौते के आधार पर खत्म किया दुष्कर्म मामला


सर्वोच्च न्यायालय ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए दुष्कर्म के आरोपी को पीडि़त महिला के साथ हुए समझौते के बाद उस पर दुष्कर्म के मामले में चल रही कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया है। केरल हाईकोर्ट ने इसमें मामला बंद करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि सहमति से शारीरिक संबंध बनने के बाद भी यह मामला 376 के तहत ही बनता है। लिहाजा इसको निरस्त नहीं किया जा सकता है। इसके खिलाफ आरोपी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद शिकायतकर्ता लडक़ी के शपथपत्र और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि अपीलकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खत्म होनी चाहिए।

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  • बहुमत साबित करने से पहले ही फडणवीस का इस्तीफा

महाराष्ट्र में जोड़-तोड़ के आधार पर रातोंरात मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले देवेंद्र फडणवीस सरकार के खिलाफ जब एकजुट विपक्ष ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो सर्वोच्च अदालत ने उन्हें न सिर्फ तुरंत विधानसभा में बहुमत साबित करने बल्कि पूरी कार्यवाही का लाइव टेलीकास्ट कराने तक का आदेश दिया। जस्टिस एन. वी. रमण, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की खंडपीठ ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को अस्थायी विधानसभा अध्यक्ष की नियुक्ति करने का भी आदेश दिया। खंडपीठ का कहना था कि सदन में कोई गुप्त मतदान नहीं होगा। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को देखते हुए देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत साबित करने से पहले ही पद त्यागने का फैसला लिया। बाद में वहां शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस के महागठबंधन की सरकार बनी। इसकी अगुवाई शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे कर रहे हैं।

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  • राफेल डील में सरकार को क्लीन चिट

राफेल विमान सौदे को लेकर दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने न सिर्फ विपक्ष को करारा झटका दिया, बल्कि इस सौदे के पूरी तरह से सही होने पर भी अपनी मुहर लगा दी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में दोबारा किसी तरह की सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है। न्यायालय ने राफेल सौदे की जांच के लिए दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज करने के बाद कहा कि इस मामले में जांच या एफआईआर की कोई जरूरत नहीं है। बता दें कि लोकसभा चुनाव से लेकर फैसला आने तक विपक्षी पार्टियां राफेल विमान सौदे को लेकर लगातार मोदी सरकार पर निशाना साध रही थीं।

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न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए अहम टिप्पणियां भी कीं। कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं लगता है कि इस मामले में किसी जांच या एफआईआर की जरूरत है। प्रक्रिया और दाम पर सवाल खड़े करते हुए जो दलीलें दी गई हैं, उनमें दम नहीं है। हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि अभी इस मामले में एक कॉन्ट्रैक्ट चल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा हलफनामा दायर करते हुए जो भूल हुई थी, उसके सुधार को स्वीकार कर लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च अदालत में इस पुनर्विचार याचिका को पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने दायर किया था। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इन याचिकाओं में 14 दिसंबर, 2018 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विचार करने को कहा गया था। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा फ्रांस के साथ की गई 36 राफेल विमानों की डील की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने से मना कर दिया था। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच कर रही थी। सीजेआई के अलावा इस बेंच में जस्टिस एस. के. कौल, जस्टिस के. एम. जोसेफ थे।

  • ‘चौकीदार चोर है’ बयान पर राहुल को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान के खिलाफ दर्ज अवमानना मामले को खत्म कर दिया। शीर्ष अदालत ने राहुल की माफी स्वीकार करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल ने बिना परखे ऐसा बयान दिया, जिससे लगा कि कोर्ट ने कुछ गलत टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ‘आप आगे से सावधान रहिए। आपने माफी मांगी है इसलिए आपको हम छोड़ रहे हैं।’ दरअसल, अप्रैल 2018 में राफेल मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट लीक दस्तावेजों को सबूत मानकर मामले की दोबारा सुनवाई के लिए तैयार हो गया था। इस पर राहुल ने कहा था, ‘कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार ने ही चोरी की है। राफेल मामले में भ्रष्टाचार हुआ है।’ राहुल के इस बयान के खिलाफ भाजपा नेत्री मीनाक्षी लेखी ने अवमानना याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके फैसले में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। फैसला कानूनी सवाल पर आधारित था। मामले के बढऩे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राहुल को नोटिस जारी किया था। राहुल ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा।

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‘चौकीदार चोर है’ वाली बात गर्म चुनावी माहौल में जोश में उनके मुंह से निकल गई। राहुल ने कहा था कि उनके बयानों को राजनीतिक विरोधियों ने गलत तरह से इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री खुद भी राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सरकार के लिए क्लीन चिट बताते हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी पर खेद जताते हुए कोर्ट से माफी मांगी थी। इस पर कोर्ट ने 19 मई को ही फैसला सुरक्षित रख लिया था। 14 नवम्बर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राहुल की तरफ से दिए गए एफिडेविट पर उन्हें बिना शर्त माफी दे दी। हालांकि, बेंच ने कहा कि राहुल गांधी राजनीति में अहम स्थान रखते हैं और कोर्ट को राजनीतिक बहस में नहीं घसीटा जाना चाहिए, फिर चाहे बयान वैध हो या अवैध। उन्हें भविष्य में ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। न्यायालय का कहना था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के प्रति बयान सोच समझकर दें। आगे की खबर पढ़ने के लिए पार्ट-3 पढ़ें, जिसका लिंक नीचे दिया गया है-

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Web Title: Important decisions of the Supreme Court in the last year Part 2 ( Hindi News From Newstimes)


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