निर्भया केस में कोर्ट ने जारी किया डेथ वारंट, इस दिन दोषियों को दी जाएगी फांसी


NP1509 07/01/2020 16:48 PM
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New Delhi. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को निर्भया केस में चारों  दोषियों को मौत की सजा के लिए डेथ वारंट जारी किया है। कोर्ट ने ये फैसला लम्‍बी चली सुनवाई के बाद दिया है। कोर्ट के फैसले के मुताबिक, दोषियों को 22 जनवरी, 2020 को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। वहीं, कोर्ट ने दोषियों से कहा कि उनके पास सिर्फ 14 दिनों का समय है। जहां भी उन्हें अपील करनी है वो कर लें। उनके पास बस 14 दिनों का समय है।

Patiala House Court issues death warrant in Nirbhaya case

बता दें कि निर्भया की मां की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। निर्भया की मां ने याचिका में मांग की थ‍ी कि सभी दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी हो। 

निर्भया के वकील की दलीलें

निर्भया के वकील जितेन्द्र झा ने कोर्ट में जेल मैनुअल पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि डेथ वारंट जारी करने पर कोई रुकावट नहीं है, मौजूदा समय में कोई याचिका या एप्लिकेशन पेंडिंग नहीं है। 

शत्रुघ्न चौहान मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 14 दिन का समय देते हुए डेथ वारंट जारी करना चाहिए, उन दिनों का दोषी इस्तेमाल कर सकते हैं। दोषी के वकील सिर्फ समय खराब कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले को सुनकर ही पुनर्विचार याचिका खारिज की थी, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी इसमें देरी नहीं चाहता। 

निर्भया के वकील ने कहा कि 21 दिसंबर के आदेश को पढ़कर सुना रहे हैं कि दोषी मुकेश के पास वकील नहीं था और उनके पुराने वकील एमएल शर्मा केस नहीं लड़ना चाहते, तभी वृन्दा ग्रोवर की कोर्ट मित्र की नियुक्ति की गई। 

दोषी मुकेश के वकील की दलीलें

इससे पहले दोषी मुकेश की ओर से पेश हुए वकील एमएल शर्मा ने कहा कि मुकेश को जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है। जिस पर कोर्ट ने उनसे पूछा कि एमएल शर्मा क्या आप दोषी मुकेश से मिले हैं? इस पर एमएल शर्मा ने कहा कि उन्हें मुकेश के परिवार ने पैरवी करने के लिए कहा है। 

मुकेश के वकील एमएल शर्मा ने कहा कि कोर्ट ने कौन-सा आदेश दिया कि जल्दी फांसी होनी चाहिए। इस पर कोर्ट ने मुकेश के वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि आप क्या बात कर रहे हैं, आप आज आकर सिर्फ मेमो दे रहे हैं अभी तक वकालतनामा भी जमा नहीं किया है, आप क्या चाहते हैं कितना वक्त लगाए हम? फिर वकील शर्मा ने कहा कि मैं जल्दी वकालतनामा जमा कर दूंगा। 

सरकारी वकील की दलील

वहीं, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि किसी भी दोषी की कोई याचिका लंबित नहीं है, डेथ वारंट जारी किया जाए। निर्भया के वकील जितेन्द्र झा ने कोर्ट से कहा कि दोषी क्यूरेटिव पिटीशन तभी दाखिल कर सकते हैं जब उनकी पुनर्विचार याचिका सर्कुलर के जरिए खारिज़ की गई हो। 

सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा कि क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए जरूरी है कि दोषियों की पुनर्विचार याचिका सर्कुलेशन में खारिज़ हुए होंं, लेकिन यहां ओपन कोर्ट में सुनवाई होकर खारिज़ है, डेथ वारंट जारी होने के बाद मामला खत्म नहीं होता जो फांसी तक समय मिलता है, उसमें किया जा सकता है। डेथ वारंट जारी किया जा सकता है। डेथ वारंट जारी होते ही फांसी नहीं होती, समय दिया जाता है। दिए गए समय का उपयोग दया याचिका दाखिल कर सकते हैं। अगर पेंडिंग रहती है तो फांसी वैसे ही रूक जाएगी।

सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा कि क्या क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने का अधिकार है? नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और जेल मैनुअल का औसत यही रहा है कि 14 दिन का समय दिया जाता है, ये कोर्ट भी 14 दिन का समय देते हुए डेथ वारंट जारी कर दे, अगर कुछ पेंडिंग हुआ तो समय बढ़ता जाएगा। 

निर्भया कांड की पूरी कहानी

आठ साल पहले (16 दिसंबर 2012) दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। किसी को इस बात का अंदेशा नहीं रहा होगा कि इस दिन दरिंदे एक ऐसी घटना को अंजाम देने वाले हैं, जो देश के इतिहास के लिए एक कलंक बनकर रह जाएगी। उस रात पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया (काल्पनिक नाम) अपने दोस्त के साथ सिलेक्ट सिटी मॉल में सिनेमा देखने के लिए आई थी। उसको इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि उसके लिए ये रात ज़िंदगी की सबसे खौफनाक रात होने वाली है। 

काफी रात हो चुकी थी, निर्भया और उसका दोस्त मुनिरका के बस स्टॉप पहुंचते हैं, वहां से वो अपने घर द्वारका जाने के लिए ऑटो वालों से मिन्नत करते हैं, लेकिन कोई ऑटो चालक उन्हें ले जाने के लिए तैयार नहीं होता है तो कोई ज्यादा किराये की मांग करते हैं। तभी दूर खड़ी बस में बैठे दरिंदो ने निर्भया को अपना शिकार बनाने की सोच ली थी। उस बस के पायदान पर खड़ा नाबालिग निर्भया को दीदी कहकर पुकारता है और पूछता है कि आपको कहां जाना है। वहीं, साधन न मिलने से परेशान निर्भया उससे कहती है द्वारका जाना है। नाबालिग लड़का कहता है कि आप परेशान क्यों हो रही हैं, उसकी बस द्वारका जा रही है।

जिसके बाद अनहोनी से अंजान निर्भया और उसका दोस्त बस में इस उम्मीद से बैठ जाते हैं कि वह घर सही सलामत पहुंच जाएंगे। इसके बाद जैसे ही वो मुनिरका बस स्टैंड से बढ़ते हैं। उनके साथ बस में सवार उन दरिंदों के दिमाग में चल रही हवस की तरंगे हिलोरे मारना शुरू कर देती हैं, जिसके बाद निर्भया उन भेड़ियों के बीच घिर जाती है और एक-एक कर वो दरिंदे दुष्कर्म को अंजाम देते हैं, निर्भया अचेत हो जाती है, उसका दोस्त प्रतिवाद करता है। लेकिन 6 लोगों के सामने वो अपने आपको बेबस पाता है। मुनिरका के बस स्टैंड से महिपालपुर के उस रास्ते के बीच वो बस कई चक्कर लगाती है, लेकिन बाहर की दुनिया को भी ये पता नहीं चलता है। दिल्ली की सड़कों पर एक लड़की की अस्मत तार तार की जाती और पुलिस सो रही थी। महिपालपुर में वो दरिंदे निर्भया को सड़क किनारे पटक देते हैं।

निर्भया का दोस्त पास से गुजर रहे राहगीरों से मदद की गुहार लगाता है, लेकिन लोगों में मर चुकी इंसानियत उसकी मदद करने की गवाही नहीं देती है। कुछ समय के बाद पुलिस की पीसीआर वैन आती है, उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराती है, जहां अब वो मौत से जंग लड़ती है। जब ये घटना पूरे देश के सामने आती है तो शायद दिल्ली को अहसास हो चुका होता है कि वो काली रात या दिन का उजाला उनके लिए भी काला हो सकता है। हजारों की भीड़, जिसका कोई नेता नहीं, तत्कालीन सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरती है। सरकार जागती है वो निर्भया को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर के एलिजाबेथ अस्पताल भेजती है, लेकिन 13 दिन की जंग के बाद वो मौत के सामने हार जाती है। 
Web Title: Patiala House Court issues death warrant in Nirbhaya case ( Hindi News From Newstimes)


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