प्रधान की जालसाजी में तहसील और विकास खण्ड के अधिकारी भी शामिल


NP1181 10/01/2020 16:57:34
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LUCKNOW.  मलिहाबाद विकास खण्ड स्थित एक प्रधान द्वारा ग्राम सभा के प्रस्ताव में की गयी जालसाजी का विकास खण्ड और तहसील के अधिकारियों ने जिस तरह आंख बंद कर समर्थन किया, उससे तो ऐसा लगता है कि यदि अधिकारी इसी तरह काम करते रहे तो ईमानदार और सही न्याय मांगने वालों को कभी न्याय नहीं मिलेगा। ढेढ़ेमऊ ग्राम सभा में पिछले डेढ़ साल से राशन विक्रेता की दुकान रिक्त चल रही है। यहां की दुकान दूसरे गांव में सम्बद्ध है। उसी दुकान के लिए 20 दिसम्बर, 2018 को नई दुकान के चयन के लिए तत्कालीन उपजिलाधिकारी के निर्देश पर ग्राम सभा की खुली बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें 7 व्यक्तियों ने दुकान के लिए आवेदन किया था।

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जनता के समर्थन को गलत बताने पर तुले अधिकारी

खुली बैठक में जनता ने एक स्वर में प्रहलाद का समर्थन किया और उसी के नाम का प्रस्ताव पास हो गया, जिसकी लिखित सूचना बैठक कराने गए सहायक विकास अधिकारी राकेश मिश्रा ने खण्ड विकास अधिकारी को दे दी। जिस व्यक्ति का चयन जनता ने कर दिया उसको प्रधान मदन बहादुर सिंह नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने सचिव विनोद कुमार गौतम के बजाय कार्यवाही रजिस्टर अपने पास रख लिया और उसका दूसरा पेज बदलकर बैठक स्थगित दिखाकर गांव वालों सहित सचिव के भी फर्जी हस्ताक्षर बना दिए। इस बैठक की सुरक्षा के लिए प्रधान ने ही तहसील समाधान दिवस में पुलिस बल की मांग की थी। जिस पर जो दरोगा मौके पर गया था, उसने अपने थाने में भी शान्तिपूर्ण बैठक सम्पन्न होने के साथ कोटेदार के रूप में प्रहलाद के नाम का चयन होने की सूचना दी थी। लेकिन प्रधान के इशारे पर ही तहसील वाले नहीं चाहते थे कि प्रहलाद को दुकान मिले। इसलिए आपूर्ति निरीक्षक ने भी प्रधान से मिलकर प्रस्ताव का पेज बदलवाने में साजिश रचने का काम किया। 

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प्रहलाद का चयन निरस्त कराने के लिए अधिकारियों को गुमराह कर रहा प्रधान

उसी के बाद प्रधान द्वारा बार-बार तहसील में बैठक स्थगित होने की सूचना देकर जांच कराने की मांग की जाती रही। जिस पर तत्कालीन खण्ड विकास अधिकारी ने जांच की आवश्यकता होने से इंकार करते हुए एसडीएम से अपने स्तर से जांच कराने की बात कही। उसके बाद खण्ड विकास अधिकारी ने एक बार जांच दूसरे एडीओ को दी, जिसने प्रधान से मिलकर असली वाले पेज को बाद में जोड़ा गया बताकर प्रस्ताव को संदेह पैदा करने वाला बता दिया, जबकि दोनों पेज देखने से साफ पता चलता है कि प्रधान ने लोगों के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बैठक स्थगित दिखाई है।

उसके बाद भी अधिकारी एक साल से मामले में लीपा पोती कर रहे हैं, जिसमें तहसील में तैनात रहे पूर्व एसडीएम की भूमिका भी काफी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। उसके जाने के बाद कोर्ट में जो शपथ पत्र दिया गया, उसमें वर्तमान एसडीएम से हस्ताक्षर करा लिए गये। जिससे यह भी उसमें सम्मिलित हो गये। आपूर्ति कार्यालय से बीडीओ कार्यालय के अधिकारियों का यह कारनामा अब न्यायालय में पहुॅंच चुका है। प्रस्ताव में जालसाजी कर पेज बदलने का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने पर करीब 8 माह बाद हुआ। फिर भी अधिकारी प्रहलाद को गुमराह करने और धमकी देने का काम कर रहे हैं।अब देखना होगा कि न्यायालय में जीत न्याय की होती है या भ्रष्टाचार की। 

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