बजट-2020 से पहले केंद्र सरकार के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां


NAZO ALI SHEIKH 11/01/2020 15:50:04
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खास बातें- 

- नीति आयोग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
- वित्त मंत्री के सामने है बड़ी चुनौती
- पहले के मुकाबले गरीबी व भुखमरी में इजाफा

New Delhi. भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने 2020 के बजट को लेकर सभी लोगों से राय मांगी है। वहीं, उनके सामने बड़ी चुनौती है, क्योंकि देश के 22 से 25 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में गरीबी (Poverty), भुखमरी (Starvation) और असमानता बढ़ गई है।

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नीति आयोग (NITI Aayog) की 2019 की एसडीजी इंडिया रिपोर्ट से यह बातें सामने आई हैं। वित्त मंत्री के लिए चुनौती इसलिए है कि इसके पहले 2005-06 से 2015-16 यानि दस सालाें में गरीबों की संख्या में तेजी से गिरावट (decline) हुई थी। यह रिपोर्ट 2020-21 के बजट से एक महीने पहले ही जारी हई है। ऐसे में यह देखना होगा कि वित्त मंत्री बजट में इन समस्याओं का समाधान कैसे निकालेंगी। 

  2018 के बाद से बढ़ी गरीबों की संख्या

दिसंबर, 2018 में नीति आयोग द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2015 में तय 17 सहस्त्राब्दि लक्ष्यों (SDG) को हासिल करने में भारत ने कितनी उन्नति हासिल की है। इसमें 100 अंक पाने वाले राज्य को अचीवर, 65-100 हासिल करने वाले को फ्रंट रनर, 50-65 हासिल करने वाले को परफॉर्मर और 50 से कम हासिल करने वाले को एस्पिरेंट बताया गया है। इसमें 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का आंकलन किया गया। 

नीति आयोग के मुताबिक, एसडीजी के लक्ष्य 1 यानी गरीबी खत्म करने के मामले में 2018 के 54 अंकों की तुलना में 2019 में 50 अंक ही रह गए हैं। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 के मुकाबले 2019 में 22 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में गरीबी बढ़ी है। 

गरीबी बढ़ने वाले प्रमुख राज्य - बिहार, (Bihar) ओडिशा, (Odisha) झारखंड, (Jharkhand) उत्तर-प्रदेश, (Uttar Pradesh) पंजाब, (Punjab) असम और पश्चिम बंगाल हैं। केवल दो राज्यों आंध्र प्रदेश और सिक्किम में गरीबी में गिरावट आई है। चार राज्यों- मेघालय, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में हालात में कोई बदलाव नहीं आया है।

  भूखे रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ी 

नीति आयोग  के अनुसार, साल 2018 की तुलना में 2019 में शून्य भूख के एसडीजी गोल (SDG Gol) के मामले में अंक 48 से घटकर 35 रह गए हैं। 24 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में भूखे लोगों की संख्या बढ़ी है। जिन राज्यों में भूखे लोगों की संख्या बढ़ी है, उनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं। केवल 4 राज्यों मिजोरम, केरल, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) में भूखे रहने वाले लोगों की संख्या में गिरावट आई है।

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  आय की असमानता भी बढ़ी

राष्ट्रीय स्तर पर आय असमानता सूचकांक में 7 अंक की गिरावट आई है यानी असमानता बढ़ी है। 25 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में असमानता बढ़ी है। असमानता कम करने के मामले में सिर्फ तीन राज्य केरल, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश सफल रहे हैं।

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ग्लोबल मल्टी डायमेंशनल पावर्टी इंडेक्स (Global Multi Dimensional Poverty Index) (MPI) 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015-16 में सिर्फ चार सबसे गरीब राज्यों- बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 19.6 करोड़ गरीब (MPI) लोग थे, जो देश की कुल गरीबों की संख्या का आधा है। सबसे ज्यादा गरीब लोगों में परंपरागत वंचित समूह जैसे गांव में रहने वाले, दलित-पिछड़ी जातियों, आदिवासी, मुस्लिम, बच्चे आदि शामिल हैं।

Web Title: Poverty and hunger increased in 22 to 25 states of the country, big challenge for Finance Minister in Budget 2020 ( Hindi News From Newstimes)


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