जानिए क्या है कमिश्नर प्रणाली, इससे पुलिस को मिलेगी कितनी आज़ादी


NP1509 12/01/2020 13:17:57
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Lucknow. नोएडा के पूर्व एसएसपी वैभव कृष्ण की ओर से लगाए आरोपों ने यूपी के पुलिस-प्रशासन को हिलाकर रख दिया, जिसमें 6 पुलिस अधिकारियों पर गलत और भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगाए गए। इसी बीच प्रदेश के दो अहम जिलों लखनऊ और नोएडा के एसएसपी का तबदला कर दिया। वहीं, अब इन जिलों में कमिश्नर सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है। 

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ऐसा माना जा रहा है कि सोमवार को होने वाली यूपी कैबिनेट की बैठक में कमिश्नर सिस्टम के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है, जिसके बाद लखनऊ और नोएडा में एडीजी स्तर के अधिकारी को कमिश्नर बनाया जाएगा। यह सिस्टम सिर्फ मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में ही लागू है। जैसा कि हर किसी को नहीं पता है कि यह सिस्टम क्या है? और कानून व्यवस्था के लिए कमिश्नर प्रणाली ही बेहतर होता है? इससे जुड़ी कई जानकारी हम आपको बताएंगे। 

क्या है कमिश्नर प्रणाली 

भारत को आजादी मिलने से पहले अंग्रेजी शासन के समय कमिश्नर प्रणाली लागू थी। इसके बाद आज़ादी मिलने के बाद भारतीय पुलिस ने इस सिस्टम को अपनाया। मौजूदा समय में यह व्यवस्था 100 से अधिक महानगरों में सफलतापूर्वक लागू है। भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 के भाग 4 के तहत जिला अधिकारी के पास पुलिस पर नियंत्रण करने के कुछ अधिकार होते हैं। इसके अलावा, दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कानून और व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुछ शक्तियां देता है।

फैसला लेने में पुलिस होगी स्वतंत्र

मौजूदा समय में लखनऊ और नोएडा की पुलिस फैसले लेने में स्वतंत्र नहीं है। उन्हें आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश मुताबिक ही काम करना पड़ता है। लेकिन पुलिस कमिश्नर सिस्टम में डीएम और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के ये अधिकार पुलिस को मिल जाते हैं। कानून व्यस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर पुलिस कमिश्नर निर्णय ले सकेगा, जिले में डीएम के पास अटकी रहने वाली तमाम फाइलों की अनुमति लेने  जैसे तमाम झंझट से भी मुक्ति मिल जाएगी।

साथ ही कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही एसडीएम और एडीएम को दी गई एग्जीक्यूटिव मैजिस्टेरियल पावर पुलिस को मिल जाएगी। जिससे पुलिस शांति भंग की आशंका में निरुद्ध करने से लेकर गुंडा एक्ट, कर्फ़्यू लगाने, गैंगस्टर एक्ट और रासुका तक लगा सकेगी। इसके अलावा धारा 151 में गिरफ्तार करने, धारा 107/16 में पाबंदी लगाने के अधिकार कमिश्नर के पास रहेगा। 

पुलिस कमिश्नर की शक्तियां

भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के अंतर्गत डीएम के पास पुलिस पर नियत्रंण के अधिकार भी होते हैं, लेकिन पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हो जाने के बाद ये अधिकार पुलिस अफसर को मिल जाते हैं, जो एक IPS होता है। जिले की बागडोर संभालने वाले डीएम के बहुत से अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास चले जाते हैं। कमिश्नर प्रणाली में पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद होता है। इसके अलावा पुलिस कमिश्नर के पास ज्यूडिशियल पॉवर भी होती हैं। CRPC के तहत कई अधिकार इस पद को मजबूत बनाते हैं। इस प्रणाली में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस ही मजिस्ट्रेट पॉवर का इस्तेमाल करती है।

कमिश्नर प्रणाली के फायदे 

कमिश्नर प्रणाली लागू होते ही पुलिस के अधिकार बढ़ जाएंगे। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को डीएम आदि अधिकारियों के फैसले के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुलिस खुद किसी भी स्थिति में फैसला लेने के लिए ज्यादा ताकतवर हो जाएगी।

जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े सभी फैसलों को लेने का अधिकार कमिश्नर के पास होगा। होटल के लाइसेंस, बार के लाइसेंस, हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार भी इसमें शामिल होगा। धरना प्रदर्शन की अनुमति, लाठी चार्ज, कितना बल प्रयोग हो इससे संबन्धित फैसले पुलिस ही तय कर सकेगी। जमीन की पैमाइश से लेकर जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण का अधिकार भी पुलिस को मिल जाएगा।

लखनऊ और नोएडा में कमिश्नर प्रणाली

राजधानी लखनऊ की बात की जाये तो एडीजी स्तर के अधिकारी को कमिश्नर बनाया जाएगा। उनके नीचे एडिशनल कमिश्नर के पद पर दो आईजी तैनात किए जाएंगे, जो लॉ एंड ऑर्डर और एडिशनल कमिश्नर एडमिन की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, पूरे शहर को पांच जोन में बांटा जाएगा, जहां एसपी स्तर के आईपीएस अफसर तैनात किए जाएंगे। चार एसपी स्तर के आईपीएस अधिकारियों की और तैनाती की जाएगी जो सुरक्षा, अभिसूचना, ट्रैफिक और क्राइम की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। इन सभी एसपी के साथ एक-एक एडिशनल एसपी तैनात किए जाएंगे। लखनऊ में डीसीपी के पद पर 26 सीओ तैनात होंगे। इसमें 14 सीओ सर्किल और बाकी 12 सीओ ऑफिस, ट्रैफिक, क्राइम और इंटेलिजेंस की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। 

नोएडा की बात की जाए तो यहां भी एडीजी स्तर के अधिकारी को कमिश्नर बनाया जाएगा। उनके नीचे एडिशनल कमिश्नर के पद पर दो डीआईजी कानून-व्यवस्था अब प्रशासन की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। शहर को तीन जोन में बांटा जाएगा, जहां एसपी स्तर के आईपीएस तैनात होंगे। नोएडा में एसपी स्तर के कुल छह आईपीएस तैनात किए जाएंगे। इनके साथ एक-एक एडिशनल एसपी होंगे। नोएडा में कुल नौ एडिशनल एसपी तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) एक पद पर 15 डिप्टी एसपी तैनात किए जाएंगे। इसमें 10 डिप्टी एसपी सर्किल में रहेंगे और बाकी पांच डिप्टी एसपी ट्रैफिक, अपराध, अभिसूचना और मुख्यालय की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।  

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Web Title: Know what is the police commissioner system and its benefits ( Hindi News From Newstimes)


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