National Youth festival 2020 : विश्वगुरु बनने के लिए भारत का पुनर्निर्माण जरूरी, जो चरित्र निर्माण से ही संभव - स्वामी निखिलेश्वरानंद 


NP863 14/01/2020 16:55:50
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Lucknow. राजधानी लखनऊ में आयोजित हो रहे 23वें राष्ट्रीय युवा उत्सव-2020 के तीसरे दिन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान स्थित विवेकानन्द हॉल देश के अनुशाशित युवाओं के समागम का गवाह बना। देश के सभी राज्यों से राष्ट्रीय सेवा योजना के हजारों युवाओं ने 'सुविचार एवं राष्ट्रीय युवा समागम' सत्र में प्रतिभाग किया। इस सत्र में श्री रामकृष्ण आश्रम राजकोट गुजरात के स्वामी निखिलेश्वरानंद, युवा नेतृत्वकर्ता हरि बोरकर, राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अशोक श्रोती, डॉ. मंजू सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे। 

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कार्यक्रम के पहले सत्र में रामकृष्ण आश्रम राजकोट के स्वामी निखिलेश्वरानंद ने बताया कि 1985 में इंटरनेशनल यूथ डे के मौके पर भारत सरकार की ओर से युवा दिवस को लेकर विचार किया गया था। इसके बाद एक कमेटी का गठन हुआ, जिसने तमाम विचार विमर्श के बाद अपनी रिपोर्ट दी कि आज के समय में यदि किसी का जीवन और उनके संदेश युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं तो वह स्वामी विवेकानंद हैं। इसी के साथ ही उनके जन्मदिवस के दिन युवा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन की तमाम घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि जब स्वामी जी शिकागो गये थे तो वहां भारतीय युवाओं को हीन भावना से देखा जाता था, लेकिन जब शिकागो और दुनिया के लोगों ने स्वामी जी के विचार को सुना तो वह सभी स्तब्ध रह गये। स्वामी विवेकानंद के भाषण के अगले दिन ही गलियों में उनके तमाम सारे पोस्टर लग गये। फिर जब वह भारत वापस आए तो उनका स्वागत विश्व विजेता के तौर पर हुआ। 

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स्वामी निखिलेश्वरानंद ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने संदेश दिया था कि उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक न रुको। उनके संदेश से संपूर्ण भारत जग गया और जैसा स्वामी जी ने 1897 में कहा था कि भारत अहिंसा से भी स्वाधीन होगा, वैसा 1947 में हुआ। लेकिन आजादी मिलने के बाद ही युवाओं ने स्वामी विवेकानंद के संदेश को भुला दिया। हमारे युवा उठे, जागे और आजादी प्राप्त करने के बाद पुनः सो गये। जबकि स्वामी विवेकानंद का लक्ष्य यह भी था कि भारत संपूर्ण विश्व पर विजय प्राप्त करेगा। लेकिन युवाओं के सो जाने से ऐसा न हुआ। इसलिए अब विश्वगुरु बनने के लिए हमें भारत का पुनर्निर्माण करना होगा। इसी के साथ जब तक देश के नेता, विद्यार्थी, आईएएस और हर एक व्यक्ति का चरित्र निर्माण नहीं होता, तब तक भारत का पुनर्निर्माण नहीं होगा।

उन्‍होंने कहा कि आज का युवा अपना विकास चाहता है और अपने राज्य का विकास चाहता है, लेकिन देश और समाज की उसको परवाह ही नहीं है। इसको लेकर जब मैंने (स्वामी निखिलेश्वरानंद) 2003 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम से मुलाकात की तो उन्‍होंने कहा कि भारत की शिक्षा निर्माणकारी होनी चाहिए। स्वामी निखिलेश्वरानंद ने कहा कि सरकार कभी भी अच्छे मनुष्य उत्पन्न नहीं कर सकती है। यह काम सिर्फ माता-पिता और शिक्षक ही कर सकते हैं। लिहाजा करियर के साथ ही हमें बच्चों के चरित्र निर्माण पर भी ध्यान देना चाहिए।  

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कार्यक्रम के अगले सत्र में युवा नेतृत्वकर्ता हरि बोरकर ने बताया कि भारत में रहने वाले अधिकांश लोग युवा हैं। अगर हमारा यूथ फिट है तो इसका मतलब हमारा भारत पूरी तरह से फिट है। मौजूदा हालातों पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि अगर आज एक ओर देश को टुकड़े टुकड़े करने की बात हो रही है तो उसी देश में सेना के वीर जवानों के शौर्य की चर्चा भी हो रही है। जब देश के जवानों की बात आती है तो शहीद मनोज पांडेय जैसे कई नाम आगे आते हैं। जिन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि मुझे उस हिल पर भेजा जाए जहां सबसे कठिन माहौल हो। उनकी यह बात उनके देश प्रेम को दिखाती है।

उन्‍होंने कहा कि व्यक्तिगत जीवन में कोई भी इंसान छोटी छोटी बातों पर ध्‍यान देकर ही बड़ा बन सकता है। फिर हमारे भारत की माटी ही ऐसी है, जो युवाओं को कुछ करने का जज्बा देती है। हरि बोरकर ने कहा कि हमें सोचना चाहिए कि किस तरह हमारे देश के जवान कठिन परिस्थितियों में रहते हैं, फिर भी जब दुश्मन सामने आता है तो वह उससे पूरी बहादुरी के साथ लड़ते हैं। चाहे दृश्य कारगिल जैसा ही क्यों न हो, जहां की परिस्थितियां कितनी भी खिलाफ हों लेकिन हमारे सैनिक उसका डटकर सामना करते हैं। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में जब 40 जवान शहीद हुए तो मैं (हरि बोरकर) एक शहीद प्रदीप यादव के घर पहुंचा और जब हमने उसकी पांच वर्षीय बेटी से पूछा कि बड़े होकर क्या बनना चाहती हो तो उसने गर्व से कहा पिता की तरह सेना में ऑफिसर बनना है। तो ऐसा जज्बा सिर्फ भारत में ही देखने को मिलता है। 

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हरि बोरकर ने कहा कि आजकल नागरिकता संशोधन कानून को लेकर काफी चर्चाएं हैं, कुछ लोग उसकी आड़ में उपद्रव फैला रहे हैं और शहर का माहौल बिगाड़ रहे हैं। लेकिन जब लखनऊ में किसी गाड़ी तोड़ने वाले और आग लगाने वाले से पूछो कि सीएए और एनआरसी क्या है तो उसे उसका मतलब तक नहीं पता होगा। लोगों को झूठ बोला जाता है कि सीएए के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ेगा। लेकिन इन सभी चीजों को लेकर हमें ध्यान देना होगा कि किसी तरह हम समाज को जागरुक करें। 

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Web Title: vishvaguru banane ke liye bharat ka punarnirman jaruri ( Hindi News From Newstimes)


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