अधिकारियों के सामने बौने साबित हो रहे सांसद, विधायक और सत्ताधारी पार्टी के जिलाध्यक्ष


NP1181 19/01/2020 13:51:51
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LUCKNOW. मलिहाबाद तहसील में तैनात रहे कुछ उपजिलाधिकारियों का आलम यह है कि वे किसी भी गांव में जनता के साथ हो रही नाइन्साफी को अपनी आंख से देखने के बजाय दूसरों की आंख पर ही भरोसा कर जनता को लुटवाने एवं पीड़ित कराने में ही अपने को गौरवान्वित महसूस करते चले आ रहे हैं। वहीं, यहां तैनात रहे अधिकारियों पर सांसद, विधायक ​और सत्ताधारी पार्टी के जिलाध्यक्ष के पत्रों का भी कोई असर नहीं होता है। जिससे अब इस तहसील की छवि जनता में खराब हो रही है। अब देखना होगा नव नियुक्त उपजिलाधिकारी तहसील की बदनाम छवि को किस तरह सुधारते हैं। 

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सरकार की छवि धूमिल कर रहे तहसील और ब्लाक के अधिकारी

बता दें कि करीब एक साल पहले ग्राम पंचायत मुजासा के कोटेदार सुऐब अहमद द्वारा राशन वितरण में की जा रही अनियमितताओं और उपभोक्ताओं के साथ की जा रही अभद्रता का मामला सामने आने के बाद मार्च 2019 में सांसद कौशल किशोर ने तत्कालीन उपजिलाधिकारी को पत्र लिखकर उक्त कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था, लेकिन कोटेदार के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने  के बावजूद मलिहाबाद का आपूर्ति कार्यालय कोटेदार को बचाने का हर सम्भव प्रयास कर रहा है जिसमें यहां तैनात रहे उपजिलाधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में रही है।

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इसी का नतीजा है कि तहसील दिवस और ग्राम सभा में कोटेदार के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के बाद भी उसके खिलाफ आज तक तहसील प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। इस गांव का कोटेदार आज भी अधिक पैसे लेकर कम सामान दे रहा है, लेकिन आपूर्ति विभाग के निरीक्षक कोटेदार के घर पर ही जांच कर गांव वालों को एक साल से गुमराह कर रहे हैं। 

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मलिहाबाद में दो पंचायतें बनी चर्चा का विषय

इससे भी गम्भीर मामला ग्राम पंचायत ढेढेमऊ का है, जहां ग्राम सभा के प्रस्ताव में की गयी जालसाजी को सही ठहराने के लिए तहसील और विकास खण्ड के अधिकारियों को गुमराह कर प्रधान ने कई कर्मचारियों और अधिकारियों की नौकरी दांव पर लगा दी है फिर भी अधिकारियों को सही गलत का पता नहीं चल रहा है। जिससे अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगने लगा है। अब जनता का भरोसा टूटता जा रहा है। यह तो दो मामले मात्र बानगी भर हैं ऐसे दर्जनों मामले तहसील दिवस के रिकार्ड में फर्जी जांच रिपोर्ट लगाकर कागजों में ही दफन कर दिये गये। शिकायत करने वाले ग्रामीण मन मसोस कर घर बैठ गये जबकि शासन और प्रशासन हमेशा पारदर्शिता की बात करता है। और तहसील दिवस की शिकायतों को रेंडम चेक करने का निर्देश भी मजाक बन कर रह गया है। 

Web Title: MPs, MLAs and District President of ruling party proving dwarf in front of officials ( Hindi News From Newstimes)


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