परीक्षा पर चर्चा 2020: छात्रों को मिला मोदी मंत्र, पीएम बोले- कुछ समय टेक्नोलॉजी से रहें...


NAZO ALI SHEIKH 20/01/2020 15:14:13
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New Delhi. दिल्ली (Delhi) के तालकटोरा स्टेडियम (Talkatora Stadium) में पीएम मोदी ने 10वीं और 12वीं के छात्रों संग 'परीक्षा पर चर्चा' कार्यक्रम में भाग लिया। पीएम मोदी (PM Modi) के इस तरह के कार्यक्रम का ये तीसरा साल है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने लिए करीब 3 लाख बच्चों ने रजिस्ट्रेशन (Registration) कराया था। 

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  इस शब्द से शुरु किया पीएम ने संबोधन

छात्रों के साथ अपना संबोधन पीएम मोदी ने ये कहकर शुरु किया कि आजकल का फैशन हैशटैग विदाउट फिल्टर (hashtag without filter) है। हम भी बिना फिल्टर के बात करेंगे। इसमें किसी से भी गलतियां हो सकती हैं, मुझसे भी गलती हो सकती है। 

पीएम मोदी ने कहा कि जैसे आपके माता-पिता (parents) के मन में 10वीं, 12वीं को लेकर चिंता रहती है, तो मुझे लगा आपके माता-पिता का भी कुछ तनाव (stress) कम करना चाहिए। मैं भी आपके परिवार का हिस्सा हूं, तो मैने समझा कि मैं भी सामूहिक रूप से ये जिम्मेदारी निभाऊं। 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’आज संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं। सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है।’’

पीएम मोदी ने बच्चों को चंद्रयान 2 मिशन (Chandrayaan 2 mission) का उदाहरण देते हुए कहा, ''विफलता के बाद रुके नहीं, आगे बढ़े। अपेक्षा पूरी नहीं होने पर मूड ऑफ न करें'' उन्होंने कहा, ''युवा पीढ़ी से बात करना मेरा सबसे बड़ा अनुभव है।''

पीएम मोदी ने कहा, ‘’मोटिवेशन (Motivation) और डिमोटिवेशन (Demotivation) का सवाल है, जीवन में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे ऐसे दौर से न गुजरना पड़ता हो। चंद्रयान को भेजने में आपका कोई योगदान नहीं था, लेकिन आप ऐसे मन लगाकर बैठे होंगे कि जैसे आपने ही ये किया हो। जब सफलता नहीं मिली तो आप भी डिमोटिवेट हुए।’’

चंद्रयान 2 मिशन के बारे में पीएम मोदी ने कहा, ‘’हम विफलताओं मैं भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं। हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं और किसी चीज में आप विफल हो गए तो उसका मतलब है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हो।’’ उन्होंने कहा, ‘’जाने अनजाने में हम लोग उस दिशा में चल पड़े हैं जिसमें सफलता-विफलता का मुख्य बिंदु कुछ विशेष परीक्षाओं के मार्क्स बन गए हैं। उसके कारण मन भी उस बात पर रहता है कि बाकी सब बाद में करूंगा, एक बार मार्क्स ले आऊं।’’

बच्चों के एक सवाल का उत्तर देते हुए पीएम मोदी ने साल 2001 के भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट मैच ( India-Australia Cricket Match) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय मैच में राहुल द्रविण (Rahul Dravid) और वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) आखिर तक जुटे  रहे थे और भारत को जीत दिलाई थी। इसी तरह से अनिल कुंबले के जबड़े में चोट लग गई थी, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने खेलने का संकल्प लिया और टीम को जीत दिला दी। 

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विद्यार्थी कोई कालखंड के लिए नहीं होता। हमें जीवन भर अपने भीतर के विद्यार्थी को जीवित रखना चाहिए। जिंदगी जीने का यही उत्तम मार्ग है, नया-नया सीखना, नया-नया जानना है। अगर आप बोझ लेकर परीक्षा हॉल में गए हैं तो सारे प्रयोग बेकार जाते हैं। आपको आत्म विश्वास लेकर जाना है। परीक्षा को कभी जिंदगी में बोझ नहीं बनने देना है। आत्मविश्वास बहुत बड़ी चीज है। साथ ही फोकस एक्टिविटी होनी जरूरी है।

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संभव है कि सुबह उठकर आप पढ़ते हैं तो मन और दिमाग से पूरी तरह तंदुरुस्त होते होंगे, लेकिन हर किसी की अपनी विशेषता होती है, इसलिए आप सुबह या शाम जिस समय आपके लिए आरामदायक हों, उसी समय में पढ़ाई करो, मैं किसी परिजन पर कोई दवाब नहीं डालना चाहता, और न किसी बच्चे को बिगाड़ना चाहता हूं। जैसे स्टील के स्प्रिंग को ज्यादा खींचने पर वो तार बन जाता है, उसी तरह मां-बाप, अध्यापकों को भी सोचना चाहिए कि बच्चे कि क्षमता कितनी है। मां-बाप को मैं कहूंगा कि बच्चे बड़े हो गए हैं ये स्वीकार करें, लेकिन जब बच्चे 2-3 साल के थे और तब आपके अंदर उनको मदद करने की जो भावना थी उसे हमेशा जिंदा रखिए। बच्चों को उनकी रुचि के सही रास्ते में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करना चाहिए।

  अरुणाचल  में एक दूसरे को जयहिंद कहते हैं

क्या हम तय कर सकते हैं कि 2022 में जब आजादी के 75 वर्ष होंगे तो मैं और मेरा परिवार जो भी खरीदेंगे वो Make In India ही खरीदेंगे। अरुणाचल प्रदेश भारत का एकमात्र राज्य है, जिसमें लोग एक दूसरे को 'जय हिंद' कहते हैं। आप सभी को नॉर्थ ईस्ट घूमना चाहिए, अधिकार और कर्त्तव्य जब साथ साथ बोले जाते हैं, तभी सब गड़बड़ हो जाता है। जबकि हमारे कर्त्तव्य में ही सबके अधिकार समाहित हैं। जब मैं एक अध्यापक के रूप में अपना कर्त्तव्य निभाता हूं, तो उससे विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा होती है।

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  टेक्नोलॉजी से रहें दूर

दिन में कुछ ऐसा समय होना चाहिए कि आप खुद को तकनीक से दूर रखें। हर दिन एक तकनीक-मुक्त घंटा होना चाहिए। उस समय को दोस्तों, परिवार, पुस्तकों, बगीचे या पालतू जानवरों के साथ बिताएं। आज की पीढ़ी घर से ही गूगल से बात करके ये जान लेती है कि उसकी ट्रेन समय पर है या नहीं। नई पीढ़ी वो है जो किसी और से पूछने के बजाए, तकनीक की मदद से जानकारी जुटा लेती है। इसका मतलब कि उसे तकनीक का उपयोग क्या होना चाहिए, ये पता लग गया।

तकनीक का भय अपने जीवन में आने नहीं देना चाहिए। तकनीक को हम अपना दोस्त मानेंं, बदलती तकनीक की हम पहले से जानकारी जुटाएं, ये जरूरी है। स्मार्ट फोन जितना समय आपका चोरी करता है, उसमें से 10 प्रतिशत कम करके आप अपने मां, बाप, दादा, दादी के साथ बिताएं। तकनीक हमें खींचकर ले जाए, उससे हमें बचकर रहना चाहिए। हमारे अंदर ये भावना होनी चाहिए कि मैं तकनीक को अपनी मर्जी से उपयोग करूंगा।

यदि आप पढ़ाई के अलावा कोई अतिरिक्त गतिविधि नहीं करेंगे, तो आप एक रोबोट की तरह बन जाएंगे। क्या हम चाहते हैं कि हमारा युवा रोबोट में बदल जाए? नहीं वह ऊर्जा और सपनों से भरे हुए हैं। क्या कभी हमने सोचा है कि Mood off क्यों होता है? अपने कारण से या बाहर के किसी कारण से। अधिकतर आपने देखा होगा कि जब Mood off  होता है, तो उसका कारण ज्यादातर बाह्य होते हैं। अगर कोई मुझे कहेंं कि इतने कार्यक्रमों के बीच वो कौन सा कार्यक्रम है जो आपके दिल के सबसे करीब है, तो मैं कहूंगा वो कार्यक्रम है परीक्षा पे चर्चा। युवा मन क्या सोचता है, क्या करना चाहता है, ये सब मैं भली-भांति समझ पाता हूं।

  50 दिव्यांग छात्र रहे शामिल

कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दो हजार बच्चों को आमंत्रित किया गया है। इनमें करीब पचास दिव्यांग छात्र भी शामिल हुए। इनमें से एक हजार छात्रों का चयन देश भर से प्रतिस्पर्धा के जरिए किया गया है। इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चे पीएम से सीधे पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछते दिखे।

Web Title: Discussion on exam 2020: students got Modi mantra, PM said- stay away from technology for some time ( Hindi News From Newstimes)


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