Jaipur Literature Festival 2020 : पांच दिवसीय साहित्य महाकुंभ की हुई भव्य शुरुआत


NP1550 24/01/2020 15:45:44
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Jaipur. साहित्य के महाकुंभ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (jaipur literature festival) 2020 के 13वें संस्करण की शुरुआत राजस्थान की राजधानी और "पिंक सिटी" के नाम से मशहूर जयपुर (pink city japiur) में गुरुवार को हुई। डिग्गी पैलेस (diggi palace) में रंगारंग कार्यक्रम के बीच हुई भव्य शुरुआत में देश-विदेश के करीब 500 वक्ता 200 से ज्यादा सत्रों में अतिथियों को संबोधित करेंगे। राजस्थान की पहचान बन चुके इस फेस्टिवल में दुनिया भर से चिंतक, विचारक और लेखकों का यहां आकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराना नई पीढ़ी को संस्कृति (culture) और साहित्य (literature) से रूबरू होने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। जनवरी के महीने में हर वर्ष आयोजित होने वाले इस लिटरेचर फेस्टिवल में साहित्य की विभिन्न विधाओं से लेकर राजनीति, खेल और सिनेमा लेखन की नई तकनीक पर विचार-विमर्श होते हैं।

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►रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुई भव्य शुरुआत

राजस्थान की शान "जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल" का कार्यक्रम स्थल डिग्गी पैलेस राजस्थानी रंगों में सराबोर नजर आया। जेएलएफ (JLF 2020) में इस बार प्रदेश की ऐतिहासिक परम्परा, विरासत से लेकर ग्लोबलिज्म का मिश्रण होटल डिग्गी पैलेस में देखने को मिल रहा है। फेस्टिवल में आने वाले अतिथियों की सुरक्षा के लिहाज से कार्यक्रम स्थल के एंट्रेंस गेट पर "फेस डिटेक्शन सिस्टम" (face detection system) लगाए गए हैं।

पहली सेफ्टी लेयर में 300 से 500 पुलिसकर्मी और ऑफिसर्स तैनात किए गए जो वेन्यू के अंदर और बाहर दोनों जगह पर होंगे। दूसरी सेफ्टी लेयर में प्राइवेट सिक्योरिटी होगी। थर्ड लेयर में इंटेलीजेंस होगी, इसमें आर्मी इंटेलीजेंस, सीआईडी के अलावा दूसरी सिक्योरिटी एंजेसियों की मदद ली जा रही है। फेस्टिवल के डेकोरेशन की थीम राजस्थानी रंग, परंपराएं और पर्व-त्यौहार पर आधारित है। फ्रंट लॉन, चारबाग, मुगल टेंट, बैठक और संवाद में ब्लॉक प्रिंट से स्पेशल डेकोरेशन की गई है। जिनमें फ्लोरल मोटिफ बेस्ड डिजाइन होंगे। सुरक्षा के मद्देनजर, स्थल पर तीन लेवल के सुरक्षा इंतजाम रखे गए हैँ।

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►भारत से निकलकर विदेश में पहुंची राजस्थानी लिटरेचर फेस्टिवल

जेलएफ के आयोजन की संरचना इस तरह से की गई ताकि वह साहित्य-प्रेमियों के अलावा अन्य लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर सके। अलग-अलग भाषा के लेखकों के साथ-साथ सिनेमा और खेल के सितारों को हर संस्करण में नियमत रूप से आमंत्रित करने से भी इसको मजबूती मिली। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में फिल्म से जुड़े लोगों और फिल्मी सितारों को बुलाने को लेकर कई बार सवाल भी खड़े हुए हैं।

इसके बावजूद आज अगर देश के अलग-अलग हिस्सों में लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित हो रहे हैं और पूरे देश में साहित्य महोत्सवों की संस्कृति का विकास हुआ है, उसके पीछे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सफलता ही है। तेरह वर्षों में जेएलएफ ने अपने आप को इतनी मजबूती से स्थापित कर लिया कि वह अब देश से निकलकर ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी आयोजित होने लगा है।

पिछले 13 सत्रों में इस लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन स्वरूप लगातार बदला है। संगीतिक आयोजन के जुड़ने के अलावा, जयपुर बुक मार्क के रूप में प्रकाशन जगत की हस्तियों को आपस में विचार विनिमय का एक मंच मिला, जहां पुस्तकों के प्रकाशन अधिकार से लेकर प्रकाशन जगत की समस्याओं पर विमर्श होते हैं।

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कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (ashok gehlot in jaipur literature festival) ने कहा, "यह ऐसा आयोजन है, जिसका हम साल भर का इंतजार करते हैं ताकि मन की बात कह सकें, लेकिन मन की बात के साथ काम की बात भी होनी चाहिए।"

इसके साथ ही, गहलोत ने राजस्थान के प्रसिद्ध लेखक विजयदान देथा की किताब "बातां री फुलवारी" के अंग्रेजी अनुवाद "टाइमलैस टेल्स फ्रॉम मारवाड़" (timeless tales from marwar) का लोकार्पण भी किया। यह अनुवाद विषेश कोठारी ने किया है।
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उद्घाटन सत्र की मुख्य वक्ता शास्त्रीय गायिका शुभा मुद्गल (folk singer shubha mudgal) ने कला के विभिन्न स्वरूपों के आपसी संबंध के बारे में बात करते हुए कहा, "हर कला आपस में जुड़ी है। शिल्प, चित्रकला, नृत्य और संगीत सभी आपस में जुड़े हुए हैं और कोई भी एक-दूसरे से ऊपर नहीं है, हालांकि गायन को सबसे ऊपर रखा जाता है, लेकिन मैं कला जगत में किसी तरह की पदानुक्रम की पक्षधर नहीं हूं और मानती हूं कि हर कला आपस मे एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।" इस मौके पर साहिर लुधियानवी की एक नज्म भी सुनाई। मेरू गोखले के साथ बुक क्लब पर चर्चा करते हुए अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने बताया कि उनकी शिक्षा 12वीं तक हुई क्योंकि उनके पिता के पास कॉलेज भेजने के पैसे नहीं थे। खुद को एजुकेट करने की जिम्मेदारी उन्होंने अपने आप उठाई। 

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के पहले दिन बादशाह अकबर और दारा शिकोह पर लिखी दो अलग-अलग पुस्तकों पर चर्चा हुई। सत्र में पत्रकार मणिमुग्ध शर्मा ने कहा कि "हमने राजाओं को हमेशा हिंदू, मुस्लिम या ईसाई के राजा के रूप में देखा है, उन्हें भारतीय राजा के रूप में नहीं देखा गया है और 1947 में जब से पाकिस्तान अस्तित्व में आया है भारत में किसी भी मुस्लिम शासक के प्रति ज्यादा सहानुभूति बची नहीं है, चाहे वह कितना भी अच्छा शासक रहा हो।" मणिमुग्ध ने कहा, "आम जनता बुद्धिजीवियों की बातें नहीं समझती है और शोधकर्ताओं की किताबें भी नहीं पढ़ती है। आम जनता काले व सफेद में लोगों को परखती है।"  

Web Title: Jaipur Literature Fest 2020 The literature festival commenced highlighting the richness of Rajasthan ( Hindi News From Newstimes)


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