गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी: अमित


ABHISHEK TRIPATHI 24/01/2020 16:10:11
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Lucknow. वादा फाउंडेशन और ह्यूमन राइट्स मानिटरिंग फोरम (HRMF) के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस और राष्‍ट्रीय बालिका दिवस पर "भारत में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा - स्थिति व चुनौती" विषय पर सेमिनार का आयोजन कर एपी सेन रोड स्थित आफिस से चारबाग तक रैली निकाली गई।

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अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस और बालिका दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के संस्थापक एवं निदेशक अमित ने कहा कि शिक्षा एक बुनियादी मानव अधिकार है। शिक्षा एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के साथ साथ समाज को प्रभावित करने वाले सामाजिक और आर्थिक बदलाव का हथियार है। उन्होंने कहा की लैंगिक समानता और मानव अधिकारों सहित सतत विकास को प्राप्त करने और गरीबी के चक्र को तोड़ने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा महत्वपूर्ण है।

उन्‍होंने कहा कि देश के हर बच्चे को भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही खुशनुमा माहौल में रहने और पूर्ण सुरक्षा पाने का अधिकार है। सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी हैं, लेकिन उसके बावजूद लाखों लोग सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारकों के कारण शैक्षिक अवसरों से वंचित हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान होने के बावजूद अभी भी लगभग 32 मिलियन बच्चे हैं, जिनकी आयु 6 से 13 वर्ष के बीच है, जिन्होंने कभी किसी शैक्षणिक संस्थान में भाग नहीं लिया है।

शि‍क्षा पाना हर बच्चे का अधिकार

मजदूरों के अधिकार पर काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश भारती ने कहा कि बच्चों के लिए शि‍क्षा विकास की पहली सीढ़ी है। शि‍क्षा पाना हर बच्चे का अधिकार है। बच्चों को बेहतर शिक्षा और घर-परिवार के साथ समाज में रहने और स्वस्थ विकास के लिए दिए गए अधिकारों का हनन ना हो, इसके लिए सरकार को ठोस उपाय करने चाहिए। आज समाज में लड़के-लड़की में जो भेदभाव की घटना सामने आ रही हैं, उस पर रोक लगाने के लिए सख्त क़ानून बनाने की जरुरत है।

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उन्होंने कहा की सामाजिक और सांस्कृतिक मानदंडों में लड़कियों पर बहुत अधिक प्रतिबंध हैं, लड़कियों को विभिन्न संदर्भों में भेदभाव और हिंसा के कई रूपों का शिकार होना पड़ता है। उन्हें जल्दी शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है, क्योंकि उन्हें एक बड़ा बोझ माना जाता है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में बाल वधुओं की संख्या के मामले में पहले स्थान पर है, जहां लगभग 27 प्रतिशत लड़कियों की शादी उनके अठारहवें जन्मदिन से पहले हो जाती है।

उन्‍होंने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के लिए कमजोर शैक्षिक अवसर, बाल विवाह में लड़कियों को मजबूर करने की संभावना को बढ़ाते हैं। हम सभी को वक्त-वक्त पर ऐसी सामुदायिक पहल करते रहने की जरुरत है। तभी सरकार और समाज जागरूक होगा। ऐसे कार्यक्रम और जागरूकता रैली बच्चों के अधिकारों की पैरवी के लिए एक महत्वपूर्ण पहल हैं। इस अवसर पर पूजा, गुड्डी, सरला, आरती, सोनी सहित अन्य लोगों ने भी सेमिनार में अपने विचार रखे।

Web Title: International seminar organized under joint auspices of the Promise Foundation and Human Rights Monitoring Forum HRMF in Lucknow ( Hindi News From Newstimes)


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