कमिश्नर प्रणाली : कानून-व्यवस्था में सुधार की दिशा में योगी सरकार का महत्वपूर्ण कदम


NP1509 10/02/2020 16:46:01
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Lucknow. उत्तर प्रदेश में दशकों से पुलिस रिफॉर्म और कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग उठती रही है। पिछली कई सरकारों ने इस दिशा में प्रयास भी किए लेकिन आईएएस लॉबी के दबाव में बात आगे नहीं बढ़ पाई। वर्तमान योगी सरकार के सामने भी तीन बार यह मांग उठी। अंतत: दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ इस सरकार ने दो शहरों-लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी। 14 जनवरी को सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुजीत कुमार पांडेय और आलोक सिंह को क्रमश: लखनऊ व नोएडा का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया। इस कदम को आईपीएस अफसर क्रांतिकारी बता रहे हैं।

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प्रदेश में कानून-व्यवस्था हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। योगी आदित्यनाथ भी सत्ता संभालने के साथ ही अपराधों पर अंकुश के लिए लगातार कड़े निर्देश देते रहे और ढेरों प्रयोग भी किए। जैसे 7 सितंबर, 2017 को क्रियान्वयन विभाग ने शासनादेश जारी कर कहा कि हर माह 7 तारीख को डीएम की अध्यक्षता में क्राइम मीटिंग होगी। फिर 09 मई, 2018 को तत्कालीन प्रमुख सचिव राजीव कुमार ने आदेश जारी किया कि थानेदारों और इंस्पेक्टर की नियुक्ति डीएम के लिखित अनुमोदन पर ही होगी। इन आदेशों पर आईपीएस एसोसिएशन ने विरोध जताया था। उसका कहना था कि ऐसे आदेश पुलिसिंग व्यवस्था में बाधा खड़ी करते हैं। दूसरी तरफ, नए साल की शुरुआत में नोएडा में तैनात एसएसपी का वीडियो वायरल होने पर पुलिस महकमे में हडक़म्प मचा गया। इसे लेकर एक प्रशासनिक अधिकारी पर आरोप लगे तो दूसरे अधिकारी ने सामने वाले को ही गलत और भ्रष्टाचार में लिप्त बता दिया। इसके अलावा कानून व्यवस्था को लेकर छह आईपीएस अफसरों के नाम सामने आए। इसके बाद बड़े शहरों में कमिश्नर प्रणाली लागू करने की चर्चा शुरू हुई। संभवत: इन्हीं कारणों से पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का फैसला किया गया।

पुरानी है पुलिस रिफॉर्म की मांग

अवकाश प्राप्त वरिष्ठ आईपीएस अफसर मंजूर अहमद के मुताबिक, प्रदेश में पुलिस रिफॉर्म की मांग अरसे से की जाती रही है। इस दिशा में सबसे पहले तत्कालीन डीजी एन.एस. सक्सेना ने काम शुरू किया था। दिल्ली में पुलिस कमीशन बनने के बाद यूपी में भी इसकी पुरजोर चर्चा हुई लेकिन इत्तेफाक से यह मुकाम तक नहीं पहुंच सकी। सरकार बदलने के साथ ही यह भी ठण्डे बस्ते में चला गया। बाद में पूर्व डीजी प्रकाश सिंह पुलिस रिफॉर्म के लिए जूझते रहे। वह हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार आने पर धर्मवीर आयोग ने अपनी रिपोर्ट में महानगरों में बेहतर पुलिस व्यवस्था के लिए कमिश्नर प्रणाली की संस्तुति की थी। इस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री रामनरेश यादव ने वासुदेव पंजानी को कानपुर का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया था। हालांकि उन्हें पद ग्रहण करने से पहले ही वापस बुला लिया गया। इसके बाद 2009 में मायावती सरकार और बाद में अखिलेश सरकार ने भी इस दिशा में प्रयास किए। मायावती सरकार नोएडा और गाजियाबाद को मिलाकर कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी में थी, लेकिन आईएएस लॉबी की नाराजगी को देखते हुए फैसला नहीं हो सका था। इसके बाद 2018 में डीजीपी सुलखान सिंह ने भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली के लिए आवाज बुलंद की थी।

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अब होगी इंटीग्रेटेड पुलिस

मंजूर अहमद का कहना है कि 27 दिसंबर, 2018 को ‘पुलिस वीक’ की रैतिक परेड में तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने भी प्रदेश सरकार से लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद समेत कई बड़े शहरों में प्रयोग के तौर पर कमिश्नर प्रणाली लागू करने की बात कही थी। हालांकि अब योगी सरकार ने कमिश्नर प्रणाली लागू कर बड़ा काम किया है। इससे पुलिस इंटीग्रेटेड होगी और जिम्मेदारी तय होगी। इसके लागू होने से पुलिस नेताओं के चंगुल से आजाद हो जाएगी और जनता को न्याय मिलना आसान हो जाएगा।
 
सरकार का तर्क एनसीआरबी के आंकड़े से उलट

कमिश्नर प्रणाली लागू करने के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे पुलिसिंग बेहतर और स्मार्ट होगी और अपराध नियंत्रण के लिए बेहतर ढंग से काम होगा। हालांकि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े सरकार के तर्क के उलट हैं। ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, उन महानगरों, मेट्रो सिटी व शहरों की स्थिति अपेक्षाकृत खराब है, जहां कमिश्नर प्रणाली लागू है।

उदाहरण के लिए मुंबई और दिल्ली को लिया जा रहा है। कमिश्नरी प्रणाली के बावजूद अपराध के मामले में ये दोनों महानगर देश में अव्वल हैं। देश में आईपीसी के तहत दिल्ली में 29.78 लाख और स्पेशल एंड लोकल लॉ (एसएलएल) के तहत 18.55 लाख मामले दर्ज हुए। इनमें क्राइम रेट रेशियो में दिल्ली सबसे ऊपर है। वहां प्रति एक लाख की आबादी पर 974 अपराध का रिकार्ड है। यह आंकड़ा किसी भी महानगर से ज्यादा है। वहीं, साइबर क्राइम के लिहाज से मुंबई सबसे असुरक्षित शहर है। यहां 2014 में साइबर क्राइम के कुल 9622 प्रकरण दर्ज किए गए। वहीं 2015 में यह आंकड़ा बढक़र 11592 और 2016 में 12317 तक पहुंच गया। ऐसे में अभी दावा नहीं किया जा सकता कि कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद स्थिति सुधर जाएगी।  

क्या है पुलिस कमिश्नर सिस्टम?

देश में पुलिस आयुक्त प्रणाली बहुत पुरानी है। ब्रिटिश काल में व्यापारिक महत्व के केंद्र- कलकत्ता (कोलकाता), बॉम्बे (मुंबई) और मद्रास (चेन्नई) में सबसे पहले इसे लागू किया गया था। फिलहाल देश के 71 महानगर, मेट्रो सिटी व शहरों में कमिश्नर प्रणाली लागू है, लेकिन अब भी ज्यादातर शहरों की पुलिस 1861 के अधिनियम पर आधारित व्यवस्था में काम कर रही है। इसके अधिनियम, 1861 के भाग-4 के तहत जिलाधिकारी के पास पुलिस पर नियंत्रण के कुछ अधिकार हैं। इसके अतिरिक्त सीआरपीसी, एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को कानून-व्यवस्था को विनियमित करने की कुछ शक्तियां मिली हैं। इसका सीधा और व्यावहारिक अर्थ है कि पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। वे आकस्मिक परिस्थितियों में भी डीएम या मंडलायुक्त या फिर शासन के आदेश तहत ही काम करते हैं, लेकिन पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने से ये अधिकार पुलिस अधिकारियों को मिल जाते हैं।

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बड़े शहरों में अक्सर अपराध नियंत्रण और बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस को तत्काल निर्णय लेना होता है। ऐसे में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को अधिक कारगर माना जाता है। इसमें पुलिस मजिस्ट्रेट की भूमिका भी निभाती है। इसके अलावा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के पास सीआरपीसी के तहत कई अन्य अधिकार भी आ जाते हैं। साथ में पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ जाती है।

कमिश्नर प्रणाली के बाद पुलिस को मिले ये अधिकार

-अब पुलिस खुद धारा 144 व कफ्र्यू लगा सकती है।
-शांति भंग (धारा 151) की आशंका में किसी को गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए जेल भेज सकती है।
-107/16 की निरोधात्मक कार्रवाई का अधिकार पुलिस के पास होगा।
-गुंडा व गैंगस्टर एक्ट, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम मामलों में अब पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकेगी।
-कारागार से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार मिला।
-गिरोहबंद अपराध और समाज विरोधी अपराध पर कार्रवाई में पुलिस सीधे फैसला लेने में सक्षम।
-राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई करने का अधिकार।
-15 अन्य अधिनियम के तहत कार्रवाई के अधिकार भी पुलिस को मिल गए हैं।
-धरना-प्रदर्शन की अनुमति देने न देने का अधिकार मिला।  
-सरकारी गोपनीयता भंग करने वालों पर पुलिस सीधी कार्रवाई कर सकेगी।

बनेगी पुलिस कोर्ट

पुलिस द्वारा कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद धारा-151 और 107/16 के तहत पाबन्द किए जाने के लिए पुलिस कोर्ट बनेगी। उसमें पुलिस के कानून-व्यवस्था संबंधी अधिकारों को अनुपालन कराने के लिए निर्णय किए जाएंगे। बाकी अन्य आपराधिक मामलों के लिए न्यायिक न्यायालय ही सुनवाई करेगी।

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डीएम के पास रहेंगे ये अधिकार

कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद आम्र्स एक्ट लाइसेंस देने/रद्द करने, आबकारी के सभी निर्णय, डेवलपमेंट का फैसला और जमीन संबंधी मामले, राजस्व का अधिकार जिलाधिकारी के पास रहेंगे।

कमिश्नर प्रणाली के तहत दो पुलिस जिलों में बंटा लखनऊ

नई पुलिस व्यवस्था के तहत लखनऊ को लखनऊ नगर एवं लखनऊ ग्रामीण नाम से पुलिस जिलों में बांटा गया है। लखनऊ नगर में कुल 40 थाने और लखनऊ ग्रामीण में 5 थाने शामिल होंगे।

लखनऊ नगर : आलमबाग, अलीगंज, अमीनाबाद, आशियाना, बाजारखाला, बंथरा, चौक, कैंट, चिनहट, गोमतीनगर, गुडम्बा, गाजीपुर, गौतमपल्ली, गोसाईंगंज, हसनगंज, हजरतगंज, हुसैनगंज, इंदिरानगर, जानकीपुरम, कैसरबाग, कृष्णानगर, महानगर, मानक नगर, मडिय़ांव, नाका, पारा, पीजीआई, सआदतगंज, सरोजनी नगर, तालकटोरा, ठाकुरगंज, विभूतिखंड, विकास नगर, वजीरगंज, काकोरी, नगराम, महिला थाना, मोहनलालगंज, सुशांत गोल्फसिटी, गोमती नगर विस्तार।

लखनऊ ग्रामीण : बक्शी का तालाब, इटौंजा, मलिहाबाद, निगोहा, माल।

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इन्हें मिली जिम्मेदारी

पूजा यादव को डीसीपी साउथ बनाया गया है। उनके कार्यक्षेत्र में आने वाल छह थाने हैं- नगराम, गोसाईगंज, सुशांत गोल्फ सिटी, पारा और काकोरी।

अरुण श्रीवास्तव को डीसीपी वेस्ट बनाया गया है। उनके कार्यक्षेत्र में आने वाले नौ थाने हैं- वजीरगंज, चौक, ठाकुरगंज, सआदतगंज, बाजारखाला, तालकटोरा, कैसरबाग, अमीनाबाद और नाका।

दिनेश सिंह को डीसीपी सेंट्रल बनाया गया है। उनके कार्यक्षेत्र में आने वाले नौ थाने हैं- हजरतगंज, गौतमपल्ली, हुसैनगंज, महिला थाना, आलमबाग, मानक नगर, कृष्णानगर, सरोजनी नगर और बंथरा।

सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी को डीसीपी नॉर्थ बनाया गया है। उनके कार्यक्षेत्र में आने वाले नौ थाने हैं- अलीगंज, मडिय़ांव, जानकीपुरम, गाजीपुर, गुडम्बा, इंदिरा नगर, महानगर, हसनगंज और विकासनगर।

सोमेन वर्मा को डीसीपी ईस्ट बनाया गया है। उनके कार्यक्षेत्र में आने वाल सात थाने हैं- कैंट, आशियाना, पीजीआई, गोमतीनगर, गोमतीनगर विस्तार, विभूति खंड और चिनहट।

इसके अलावा चारू निगम को डीसीपी (यातायात), प्रमोद कुमार तिवारी को डीसीपी (अपराध), शालिनी को डीसीपी (महिला अपराध), ओम प्रकाश सिंह को डीसीपी (अभिसूचना एवं सुरक्षा), रईस अख्तर डीसीपी (मुख्यालय) बनाया गया है।

एडीसीपी के कार्यक्षेत्र

लखनऊ में डीसीपी के अलावा चार जोन के एडीसीपी की भी तैनाती की गई है। एडीसीपी अपराध दिनेश कुमार पुरी, एडीसीपी सुरक्षा हाईकोर्ट रुचिता चौधरी, और एडीसीपी विधानसभा/सचिवालय सुरक्षा शैलेन्द्र कुमार राय को बनाया गया है। डिफेंस एक्सपो तक ट्रैफिक के लिए शहर में दो एडीसीपी ऑफ पुलिस सुरेश चन्द्र रावत और पूर्णेन्दु सिंह होंगे। एक्सपो होने के बाद इनमें से एक को एडीसीपी दक्षिणी की जिम्मेदारी दी जाएगी।

तैनात किए गए 7 एसीपी

लखनऊ में सात एसीपी की तैनाती की गई है। इनमें विवेक रंजन राय, अनिल कुमार, इंद्र प्रकाश सिंह, स्वतंत्र कुमार सिंह, राजकुमार, श्वेता श्रीवास्तव और त्रिपुरारी पांडेय का नाम शामिल है। आईपी सिंह का अयोध्या के लिए हुआ तबादला निरस्त किया है। वहीं, स्वतंत्र कुमार सिंह को ग्रामीण लखनऊ से नगर में लाया गया है।

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