शिक्षा के नाम पर छात्र-छात्राओं के जीवन से किया जा रहा खिलवाड़!


NP1357 13/02/2020 16:38:24
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सोनू यादव

बदायूं। एक ओर जहां केन्द्र सरकार व राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है। वहीं, अगर इसकी हकीकत ग्राउंड जीरो पर देखी जाए तो कुछ और ही है। जी हां, अगर बदायूं के राजकीय विद्यालयों की बात की जाए तो यहां आपको शिक्षा व्यवस्था के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही होती मिलेगी। फिर चाहें वो राजकीय हाईस्कूल हो या राजकीय इंटर कॉलेज या फिर महाविद्यालय, सभी की हालत लगभग एक जैसी ही है।

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पूर्ववर्ती सरकार ने बदायूं जिले में शिक्षा के क्षेत्र में तमाम कार्य किए थे, जिसमें कई इंटर कॉलेज व डिग्री कॉलेज समेत राजकीय पॉलीटेक्निक कालेज भी शामिल हैं, जहां करोडों रुपए की लागत से इन विद्यालयों की इमारतें तो खडी हो गई हैं, लेकिन इनमें छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं हैं। यह हाल किसी एक विद्यालय का नहीं है, बल्कि जिले भर के अधिकांश राजकीय विद्यालयों का है। जिले के नाधा स्थित राजकीय महाविद्यालय में मात्र दो अध्यापक हैं, उसमें एक के पास प्राचार्य पद की जिम्मेदारी है। वहीं, महाविद्यालय में एक भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है। साथ ही नाधा के राजकीय इंटर कॉलेज में करीब 600 सौ छात्र-छात्राओं का पंजीकरण है, लेकिन उनको पढ़ाने को महज एक अध्यापक की तैनाती है उन पर भी नाधा के साथ दानपुर के राजकीय हाईस्कूल का अतिरिक्त प्रभार है। 

यही हाल सहसवान के राजकीय कन्या इंटर व नसीरपुर के अल्पसंख्यक राजकीय इंटर कॉलेज का है। सहसवान में स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज की करोड़ों रुपए की लागत से बिल्डिंग तो बन गई है, लेकिन फर्नीचर व शिक्षकों के अभाव में कक्षाएं 60 किमी दूर अलापुर राजकीय पॉलीटेक्निकल कॉलेज में संचालित की जा रही हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जहां सरकार छात्र-छात्राओं से एडमीशन के नाम पर फीस तो वसूल रही है, लेकिन उनको पढ़ाने के लिए शिक्षकों की कोई व्यवस्था नहीं है।

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Web Title: Messing with the lives of students in the name of education! ( Hindi News From Newstimes)


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