शर्मनाक: यहां कक्षा पांच का छात्र गौशाला के पशुओं की देखभाल में खपा रहा बचपन


D. K. SHUKLA 14/02/2020 08:52:47
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. श्रम कानून की उड़ रही खुलेआम धज्जियां 
. अनिवार्य शिक्षा अधिनियम का भी उड़ रहा मखौल

Unnao. बाल श्रम उन्मूलन और अनिवार्य शिक्षा जैसी बातें कहने तक ही सीमित हैं। हकीकत के धरातल पर तस्वीर कुछ और ही देखने को मिलती है। कुछ ऐसे ही हालात जिले के औरास विकास खंड की ग्राम पंचायत विसवल में संचालित गौशाला में नुमाया हो रहे हैं। जहां पढ़ने लिखने की उम्र के बच्चों को मजदूरी पर रखा गया था। खास बात यह है कि एक बच्चे ने बगल के गांव के सरकारी स्कूल में दाखिला भी ले रखा है, लेकिन वहां सिर्फ उसकी हाजिरी ही लग रही है। शिक्षा अर्जित करने के बजाए यह बच्चा गौशाला में गोबर समेटने और चारा पानी करने में अपना बचपन खपा रहा है।

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यूं तो बच्चों से मजदूरी के नजारे आपने तमाम देखे होंगे, लेकिन सरकारी काम भी यह दृश्य दिखाई दें तो यह विचारणीय विषय है। जिले के औरास ब्लाक की विसवल ग्राम पंचायत में किसानों को आवारा मवेशियों के प्रकोप से बचाने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर पशु आश्रय स्थल खोला गया था। 

ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की संयुक्त जिम्मेदारी पर संचालित इस गौशाला में वर्तमान समय में तकरीबन आधा सैंकड़ा मवेशी मौजूद हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन मवेशियों की देखरेख की जिम्मेदारी प्राथमिक विद्यालय डल्लूखेंड़ा में कक्षा पांच के एक छात्र के नन्हें कंधों पर है। कापी किताब के बजाय हाथों में चारा और गोबर की डलिया थामे यह बच्चा पूरी व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते नजर आता है। यही नहीं यह दृश्य अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के स्याह पहलू को भी उजागर करता नजर आता है। 

केंद्र और राज्य सरकार अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अरबों रुपए पानी की तरह बहा रही है। बावजूद इसके सरकारी शिक्षा की तस्वीर सुधरने का नाम नहीं ले रही है। इस गौशाला में अमित यादव के अलावा डल्लूखेड़ा गांव के रहने वाले महादेव का बेटा रिंकू बीते 7 माह से गौशाला में गोबर करकट और चारा-पानी कर रहा है। 

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गुरूवार को रिंकू गौशाला के अन्दर ठेलिया खींचता हुआ पशुओं की चरही में चारा डालते नजर आया। पूछने पर रिंकू ने बताया कि खुद को डल्लूखेड़ा का रहने वाला बताया। उसने यह भी बताया कि वह गांव के ही प्राथमि​क विद्यालय में कक्षा 5 का छ़ात्र है। सुबह स्कूल पहुंच कर हाजिरी लगवाने के बाद वह गौशाला आ जाता है। उसने बताया कि गौशाला में काम करने के एवज में उसे प्रधान की ओर प्रतिदिन मजदूरी के 200 रुपए मिलते हैं।

एसडीएम बोले की जाएगी विधिक कार्रवाई

गौशाला में श्रम कानूनों की उड़ती धज्जियों और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के उड़ाए जा रहे मखौल के बाबत उप जिलाधिकारी हसनगंज प्रदीप वर्मा से बात हुई। गौशाला के दृश्य के बाबत सुनकर एक बार उनके भी कान खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह बेहद ही निंदनीय है। इस मामले की जांच करा कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। 

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Web Title: Embarrassing: here a student of class five is spending childhood in the care of cattle of Gaushala  ( Hindi News From Newstimes)


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