किसानों को 40 साल पुरानी जमीन से बेदखल कर शासन से वाहवाही लूट रहा तहसील प्रशासन


NP1181 17/02/2020 12:07:20
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LUCKNOW. राजधानी की जिस तहसील मलिहाबाद के अधिकारियों ने आईजीआरएस पर दर्ज शिकायतों का फर्जी निस्तारण दिखाकर प्रदेश भर में वाहवाही लूटने का काम किया है उसी तहसील के अनेकों प्रकरण ऐसे हैं जिनमें फर्जी निस्तारण किया गया है। इस तहसील में जहां एक ओर जनता अधि​कारियों की कार्यशैली से परेशान है वहीं अधिकारी शासन और उच्च अधिकारियों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारी मौज कर रहे हैं और भ्रष्टाचार की शिकार हो रही है।

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जमीन जाने से सदमें में किसान बीमार
तहसील क्षेत्र के ग्राम कैथुलिया में करीब 40 साल पहले गांव के सुल्ताना, मोतीलाल,केदार व गंगाराम को खेती के लिए पट्टे पर जमीन दी गई थी जो अब संक्रमणीय हो चुकी है। बीते साल सरकार के निर्देश पर गांव की पशुचर भूमि पर पशु आश्रय स्थल बनाने का आदेश दिया गया उसके बाद इस क्षेत्र में तैनात लेखपाल ने इनमें से दो किसानों की पूरी और एक किसान की आधी जमीन चरागाह मेें बताकर पशुचर भूमि के साथ मिलाकर गोशाला बनवा दी। उसके बाद मोती लाल ने अपने ही भाई की 1/3 भाग बची भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया।

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तब से सुल्ताना ने तहसील दिवस सहित कई प्रार्थना पत्र अधिकारियों को दिए लेकिन आज तक उनको कहीं भी जमीन नहीं दी गई है। इस सदमे से आहत सुल्ताना की तबियत बिगड़ती जा रही है। मूलचन्द का कहना है कि यदि उनके पिता के साथ किसी प्रकार की आकस्मिक घटना होती है तो इसके लिए लेखपाल, तहसीलदार और एसडीएम जिम्मेदार होंगे, क्योंकि पहले तो उनकी खड़ी फसल को नष्ट कर गोशाला बना दी गई और अब तहसील के अधिकारी उनकी समस्या का निराकरण किए बिना ही फर्जी निस्तारण कर दे रहे हैं।
इसके अलावा मोतीलाल आदि ने भी तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र दिए लेकिन तहसील वाले ​इन पीड़ित किसानों की बात सुनने को ही तैयार नहीं हैं।

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कोटे के राशन से गोशाला में होता है भण्डारा,जानकर भी पुलिस,प्रशासन मौन
दूसरा प्रकरण मुजासा गांव का है जहां के कोटेदार के खिलाफ गांव वालों ने सैकड़ों प्रार्थना पत्र दिए जिनमें मुख्यमंत्री का पोर्टल और ​जिलाधिकारी, तहसील दिवस, आईजीआरएस पर दर्ज सभी प्रार्थना पत्रों को कागजों में निस्तारित कर दिया गया  है। जिलाधिकारी के प्रार्थना पत्र पर जब लेखपाल ने कोटेदार की जॉच की तो उसके अभिलेख अधूरे होने के साथ ही राशन भी नहीं मिला था। जिसकी रिपोर्ट उसने आपूर्ति विभाग और एसडीएम को दे दी लेकिन उस पर एसडीएम ने कार्रवाई करने से इन्कार कर दिया। इसी बीच चार दिन पहले कोटेदार ने दो डाला राशन बाजार में बेंचने के लिए ले जाते समय एक व्यक्ति ने उसका पीछा कर वीडियो बना ली। और उनमें से एक डाले का राशन गौशाला मलिहाबाद में रात के अंधेरे में उतार दिया गया। और उसको बताया गया कि गोशाला में भण्डारा है इसलिए यहां राशन आया है। इसकी शिकायत सीओ, प्रभारी निरीक्षक, उपजिलाधिकारी मलिहाबाद से ​की गई लेकिन किसी भी अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की और सभी ने उसमें लीपापोती करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसके अलावा यह कोटेदार लगातार उपभोक्ताओ से अधिक पैसे वसूल रहा है लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी उसकी जांच तक करने नहीं जा रहे हैं।
राजधानी की नामी गिरामी तहसील के तो यह कुछ उदाहरण हैं यहां ऐसे  सैकड़ों मामले कागजों में ही दफन करके वाहवाही लूटी जा रही है।  

Web Title: Tehsil administration was robbed of accolades from the government by evicting farmers from 40 years old land ( Hindi News From Newstimes)


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