पीडि़तों को उनका हक दिलाने में कारगर साबित हो रहीं उपभोक्ता अदालतें


NP1509 18/02/2020 13:05:23
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Lucknow. उपभोक्ता आयोग पीडि़तों को उनका हक दिलाने में लगातार कारगर साबित हो रहा है। सामूहिक रूप से छल-छद्म के साथ अनुचित व्यापार के मामलों में किसी अन्य की शिकायत पर भी उपभोक्ता अदालतें उपभोक्ताओं को राहत दिलाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती हैं। इस तरह के एक चर्चित मामले में भोपाल जिला प्रशासन की ओर से दायर वाद में 9 साल तक चली सुनवाई के बाद वर्ष 2018 में उनसे वसूले गए अतिरिक्त पैसे वापस करने का आदेश इंडियन ऑयल के डीलर को दिया था। भोपाल जिला प्रशासन ने इंडियन ऑयल के डीलर के खिलाफ उपभोक्ताओं से अधिक पैसे वसूलने की शिकायत की थी। उपभोक्ता अदालत ने उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीलर और इंडियन ऑयल कार्पोरेशन को 187 लोगों से गलत ढंग से वसूले गए 8-8 रुपये वापस करने और 50-50 रुपये मानसिक पीड़ा के लिए हर्जाने के तौर पर देने का आदेश दिया था। आइए ऐसे कुछ फैसलों के आधार पर जानते हैं कि उपभोक्ता अदालतें किस तरह उपभोक्ता हितों की रक्षा करती हैं।

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केस-1 - बुक नहीं कराया गया सामान चोरी होने पर रेलवे जिम्मेदार नहीं

रेलयात्रा के दौरान अक्सर चोर-उचक्के यात्रियों के कीमती सामानों पर हाथ साफ कर देते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग इसके लिए रेलवे को जिम्मेदार ठहराने से बाज नहीं आते हैं। लेकिन अपने हितों की रक्षा करने के संदर्भ में उपभोक्ताओं के लिए यह जानना आवश्यक है कि रेलयात्रा के दौरान अगर किसी सामान की बुकिंग नहीं कराई गई है तो रेलवे उसके प्रति जिम्मेदार नहीं होगा, यानी ऐसे किसी मामले में रेलवे की कोई जवाबदेही नहीं होगी। उपभोक्ता कानूनों के मुताबिक, इसके लिए रेलवे को कतई जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। ऐसे मामलों में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) का एक मामला नजीर है।

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एनसीडीआरसी ने एक मुकदमे में ममता अग्रवाल नाम की उस महिला को कोई राहत देने से इनकार कर दिया, जिसका सूटकेस ट्रेन से सफर के दौरान गायब हो गया था। आयोग ने कहा कि सामान बुक नहीं कराए जाने और उसकी रसीद जारी नहीं होने की स्थिति में रेलवे उक्त सामान के लिए जिम्मेदार नहीं है। शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने यह आदेश निचले आयोग के उस आदेश को रद्द करते हुए दिया था, जिसमें रेलवे से ममता अग्रवाल को मुआवजा देने को कहा था। महिला पश्चिम बंगाल की निवासी हैं और वर्ष 2011 में लोकमान्य तिलक शालीमार एक्सप्रेस ट्रेन में सफर के दौरान उनका सूटकेस कथित तौर पर चोरी हो गया था। एनसीडीआरसी ने छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जिला उपभोक्ता आयोग के एक फैसले को कायम रखते हुए रेलवे को आदेश दिया गया था कि वह यात्री को बतौर हर्जाना 1.30 लाख रुपये अदा करे।

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सुनवाई के दौरान एनसीडीआरसी ने रेलवे की इस दलील पर सहमति जताई कि रेल अधिनियम 1989 की धारा-100 के मुताबिक यात्रा के दौरान किसी सामान के गायब हो जाने, नष्ट हो जाने, क्षतिग्रस्त हो जाने अथवा किसी सामान के नहीं मिलने पर रेलवे तब तक जिम्मेदार नहीं होगा, जब तक कि रेलवे ने सामान बुक नहीं किया हो और उसकी समुचित रसीद जारी न की हो। गौरतलब है कि शिकायत के मुताबिक, सफर के दौरान ममता के सूटकेस में सोने की तीन चेन, हीरे की दो अंगूठियां और एक सााधारण अंगूठी सहित लगभग तीन लाख रुपये की कीमती वस्तुएं थीं। इसके अलावा उसमें 15,000 रुपये नकद और बच्चों के कपड़े भी रखे थे।

केस-2 - उपभोक्ता आयोग ने दो मामले में दिलवाया हर्जाना

जिला उपभोक्ता फोरम महोबा ने फरवरी 2018 में दो अलग-अलग मामलों में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें हर्जाना दिलवाया था। पहले मामले में, एक यात्री के वैध टिकट लेकर यात्रा करने के बावजूद उससे रेलवे कर्मचारी के अवैध ढंग से पैसे वसूलने के मामले में यात्री के पक्ष में फैसला सुनाया था। यात्रा के दौरान रेलवे कर्मचारी के अवैध वसूली के खिलाफ यात्री ने जिला उपभोक्ता फोरम (अब आयोग) महोबा में दावा प्रस्तुत किया था।

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रेलवे ने इस फैसले के खिलाफ राज्य आयोग में अपील दायर की थी, जिसमें राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता फोरम के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी थी। अन्त में रेलवे ने जिला उपभोक्ता फोरम महोबा के खाते में 6,260 रुपये जमा कराए थे। परिवादी को उपरोक्त धनराशि चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया गया। दूसरे मामले में, बीमित धनराशि अदा न करने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम महोबा ने जीवन बीमा निगम से पीडि़ता को बीमित धनराशि दिलवाई थी। पीडि़ता ने बीमा की धनराशि अदा न करने पर भारतीय जीवन बीमा निगम के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम महोबा में वाद दायर किया था। फोरम ने सुनवाई करने के बाद परिवादिनी के पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद भारतीय जीवन बीमा निगम ने पीडि़ता को 67,975 रुपये जिला उपभोक्ता फोरम के पक्ष में भुगतान किया। बाद में जिला उपभोक्ता फोरम ने चेक के माध्यम से पीडि़ता को उक्त धनराशि अदा कर दी। 

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Web Title: Consumer courts are proving effective in getting the victims their rights ( Hindi News From Newstimes)


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