महाभियोग से मुक्ति, लेकिन ट्रंप के आगे दुश्वारियां और भी...


NP1509 18/02/2020 13:18:55
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New Delhi. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महाभियोग की फांस से छुटकारा पा गए हैं। इसमें शायद ही किसी को संदेह रहा होगा, क्योंकि सीनेट में उनका बहुमत था। इस कामयाबी के बाद वह काफी उत्साहित और अपने विरोधी डेमोके्रट्स पर आक्रामक भी हैं। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि वे इस कामयाबी को नवम्बर में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव में भुनाने में कोई कोर-कसर छोड़ेंगे। इसके बावजूद यह नहीं कहा जा सकता कि दुश्वारियों ने उनका पूरी तरह पीछा छोड़ दिया है। व्यवसायी से नेता और फिर राष्ट्रपति बने ट्रंप के आगे दो मोर्चों पर मुसीबतें मुंह बाए खड़ी हैं। पहली, अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के खिलाफ जांच के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने का मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि इसके सरोकार देश की विदेश नीति से हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेट नेताओं का संकल्प है कि वे इस मामले की जांच के लिए दबाव बनाए रहेंगे। वित्तीय रिकार्ड जानने के लिए वे कोर्ट में ट्रंप के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हैं। उन्हें आशा है कि महाभियोग के दौरान ट्रंप के कार्यों के बारे में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके सहारे वे जनता को समझाने में कामयाब होंगे कि वे उन्हें दोबारा राष्ट्रपति पद न सौंपें।

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अगर हारते तो पद छोडऩा पड़ता

अगर सीनेट ट्रंप को पद के दुरुपयोग और कांग्रेस (संसद) की कार्रवाई बाधित करने के आरोपों से बरी नहीं करती और आरोप सिद्ध हो जाते तो उन्हें अपना कार्यभार उपराष्ट्रपति माइक पेंस को सौंपना पड़ता। कई हफ्ते तक जांच के बाद उनके खिलाफ आरोप सीनेट में भेजे गए थे। ट्रंप को हटाने के लिए 100 सदस्यीय सीनेट में दो तिहाई बहुमत के अभाव में महाभियोग प्रस्ताव गिर गया। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाले सीनेट में पद के दुरुपयोग के मामले में 52 सांसदों ने ट्रम्प को बरी करने के लिए और 48 ने उनके खिलाफ वोट डाला। वहीं कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की कार्रवाई बाधित करने के आरोप से ट्रंप को बरी करने के लिए 53 और उन्हें इस मामले में दोषी करार देने के लिए 47 सांसदों ने वोट किया। सीनेट में रिपब्लिकन मिट रोमनी ने पद के दुरुपयोग के मामले में ट्रंप के खिलाफ वोट डाला, लेकिन कांग्रेस की कार्यवाही बाधित करने के मामले में उन्होंने ट्रंप को बरी करने के पक्ष में वोट दिया।

डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत वाले निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति पर पद के दुरुपयोग और कांग्रेस की कार्रवाई बाधित करने का अभियोग दिसंबर में लगाया था। इससे पहले डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले कांग्रेस सदन में शक्तियों का दुरुपयोग करने के लिए ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव को 230-197 के बहुमत से पास किया था। उन पर पहला आरोप था-2020 के राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन को बदनाम करने के लिए उनके खिलाफ जांच कराने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया। दूसरा आरोप, कांग्रेस (संसद) के काम में दखलंदाजी की।

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पार्टी की उम्मीदवारी के लिए जूझ रहे ट्रंप

जानकारों का मानना है कि महाभियोग प्रस्ताव के खिलाफ अपनी जीत को ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव में भुनाने का प्रयास करेंगे। हालांकि उन्हें अभी रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वियों से जूझना पड़ रहा है। इसी कड़ी में तीन फरवरी को आयोवा कॉकस चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। इसके साथ ही नवम्बर में होने जा रहे इस चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई। प्राप्त अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, ट्रंप को पार्टी कॉकस में 95 प्रतिशत समर्थन मिला। एसोसिएट प्रेस के मुताबिक, ट्रंप को 97 प्रतिशत मत मिले, वहीं 8 प्रतिशत परिसीमा में उन्होंने जीत दर्ज की। इलिनॉयस से प्रतिनिधि सभा के पूर्व सदस्य जो वाल्स को 1.4 फीसदी मत मिले, जबकि एक और प्रतिद्वंद्वी मैसाच्युसेट्स के पूर्व गवर्नर बिल वेल्ड को 1.2 प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा। इस जीत से उत्साहित ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए बनाए गए आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा गया है-‘रिपब्लिकन पार्टी कभी इतनी एकजुट नहीं थी।’

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली में राजनीतिक दलों को सभी 50 प्रांतों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। यह प्रक्रिया कॉकस या प्राइमरी के जरिए होती है। इसके जरिए राजनीतिक दल राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार चुनते हैं। प्राइमरी के विजेताओं को अंतत: डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियां अपना-अपना उम्मीदवार घोषित करती हैं। पहले किनके ऊपर चला महाभियोग?

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अमेरिका के 243 सालों के इतिहास में यह तीसरा मौका था, जब किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग की कार्यवाही चली। 19वीं सदी में एंड्रयू जॉनसन और 20वीं सदी में बिल क्लिंटन पर महाभियोग चला। 21वीं सदी में ट्रंप पर महाभियोग की यह कार्यवाही चली। इसके पूर्व जिन दोनों राष्ट्रपतियों पर महाभियोग चला, उन दोनों का ही दूसरा कार्यकाल था। इसके विपरीत ट्रंप के खिलाफ उनके पहले कार्यकाल में ही महाभियोग लाया गया। पहले जिन दो राष्ट्रपतियों पर महाभियोग चला, उनमें 17वें राष्ट्रपति डेमोक्रेटिक पार्टी के जॉनसन के खिलाफ अपराध और दुराचार के आरोप लगे थे और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में महाभियोग प्रस्ताव पास हुआ था। सीनेट में जॉनसन के पक्ष में वोटिंग हुई और वे अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहे। ऐसे ही 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को ज्यूरी के सामने झूठी गवाही देने और न्याय में बाधा डालने के मामले में महाभियोग का सामना करना पड़ा था। 1974 में राष्ट्रपति निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था, लेकिन उन्होंने महाभियोग से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उन्हें पता था कि सीनेट में मामला जाने पर इस्तीफा देना पड़ेगा।

हमें नरक से होकर गुजरना पड़ा : ट्रंप  

महाभियोग से मुक्ति के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्साह से लबरेज रहे, लेकिन ह्वाइट हाउस में चहेतों के बीच मन की पीड़ा भी साझा की - ‘हमें नर्क से होकर गुजरना पड़ा है, यह अनुचित है। यह एक बुराई थी, यह सब मेरे दुश्मनों का किया धरा है। मैंने ऐसा कोई गलत काम किया ही नहीं, जिसके लिए मुझे अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ती। इसके बावजूद मीडिया कहती है ट्रंप दोष मुक्त हो गए। यह क्या है?’ उनकी कामना थी कि भविष्य में किसी राष्ट्रपति को महाभियोग की ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े। व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में अपने मित्रों के साथ चर्चा के बारे में मीडिया के सवाल पर उन्होंने कई बार तंज कसे। जैसे, ‘मित्रों के साथ जश्न मना रहे हैं।’ ...‘लीजिए, मुझे एक और खूबसूरत शब्द याद आया है। मुझे कभी लगा ही नहीं कि यह शब्द इतना अच्छा हो सकता है। जानते हैं, यह क्या शब्द है? यह है पूर्णतया मुक्ति।’ ट्रंप ने अपनी ही पार्टी के सीनेटर और राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार मिट रोमनी को भी जमकर कोसा।
उपलब्धियां भी गिनाईं

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‘स्टेट ऑफ द यूनियन एड्रेस’ में भी ट्रंप काफी उत्साहित दिखे। उनका दावा था कि उनके नेतृत्व में नौकरियां बढ़ रही हैं, आय बढ़ रही है, गरीबी कम हुई है और हमारा देश बेहद सम्मानित तरीके से आगे बढ़ रहा है। खराब अर्थव्यवस्था के साल अब लद गए हैं... झूठे वादों, बेरोजगारी और अमेरिकियों की सम्पत्ति, ताकत और प्रतिष्ठा में कमी आने की बहानेबाजी के दिन भी अब बीत गए। केवल तीन साल के उनके कार्यकाल में ही उनके प्रशासन ने अमेरिकियों की मानसिकता बदल दी है। ट्रंप ने अपने करीब एक घंटे के संबोधन में कहा, ‘हम उस रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं, जिसकी कुछ समय पहले तक कल्पना करना मुश्किल था और अब हम पीछे नहीं मुडऩे वाले। ...तीन साल पहले हमने ग्रेट अमेरिकन कमबैक की शुरुआत की थी। अमेरिका के दुश्मन भाग रहे हैं, अमेरिका की किस्मत बुलंद और भविष्य उज्ज्वल है।’ ट्रम्प ने उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था बेहतर होने का जिक्र करते हुए कहा, ‘अमेरिका का सपना लौट आया है और यह पहले से अधिक मजबूत है।’

विदेशी मोर्चे पर भी कामयाब बताया

ट्रंप ने विदेशी मोर्चे पर अपने अपनी कामयाबी गिनाते हुए कहा- ‘अमेरिकी प्रशासन राष्ट्रीय सुरक्षा का दृढ़ता से बचाव कर रहा है और अमेरिकी नागरिकों का बचाव करते हुए, हम पश्चिम एशिया में अमेरिकी युद्ध को खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं।’

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उन्होंने मैक्सिको के साथ लगी दक्षिणी सीमा की रक्षा करने के उनके प्रशासन द्वारा उठाए गए अभूतपूर्व कदमों पर जोर देते हुए कहा, ‘देश कानून का पालन करने वालों का अभयारण्य होना चाहिए न कि अपराधियों का।’ गैरकानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले हर एक व्यक्ति को तुरन्त बाहर किया जाएगा। हमने मैक्सिको, होंडुरास, अल सल्वाडोर और ग्वाटेमाला की सरकारों के साथ ऐतिहासिक सहयोग समझौते किए हैं। हमारे अभूतपूर्व प्रयासों का ही नतीजा है कि मई से गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करने की घटनाओं में 75 प्रतिशत कमी आई है। जैसे-जैसे दीवार ऊंची होती जाएंगी, मादक पदार्थ की बरामदगी बढ़ेगी और गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करने की घटनाओं में कमी आती जाएगी।’

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ईरान के दिवंगत सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी को ‘निर्दयी कसाई’ बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘बिना किसी चूक के सटीक हमला’ करने के लिए अमेरिकी सेना की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि हमले में सुलेमानी मारा गया और ‘आतंक का उसका घिनौना युग हमेशा के लिए’ खत्म हो गया। वहीं चीन के साथ अमेरिका के संबंधों पर उनका कहना था कि चीन दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाता रहा और ‘अब हमने वह बदल दिया है लेकिन अब हमारे चीन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पहले से कहीं अच्छे संबंध हैं।’ चीन से समझौते पर उनका दावा है- ‘कुछ दिन पहले, हमने चीन के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्तक्षर भी किए थे, जो हमारे कर्मचारियों का बचाव करेगा, बौद्धिक सम्पदा की रक्षा करेगा, अरबों डॉलर हमारे कोष में लाएगा और अमेरिका में बने उत्पादों के लिए नए विशाल बाजार खोलेगा।’

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Web Title: Donald Trump gets rid of impeachment in presidential election ( Hindi News From Newstimes)


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