यह कैसा सिस्टमः जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं बच्चे !


RAM MISHRA 25/02/2020 17:12:35
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राम मिश्रा

Amethi. अमेठी में नाैनिहाल बच्चों की कतार हाईवे और रेलवे ट्रैक पर दिखाई देती है और डर के साए में बच्चे हाईवे और रेलवे ट्रैक को पार करते हुए अपने विद्यालय और घर पहुंचते हैं। अमेठी में लखनऊ-बनारसी हाईवे पर स्थित शासकीय प्राथमिक पाठशाला सराय सुलेमान में हर दिन देखने को मिलता है। ये नज़ारा वहां से गुजरने वाले वाहन चालक देखते हैं तो भी उनकी सांसे थम जाती हैं... क्योंकि स्कूल से घर पहुंचने के लिए बिना कोई सुरक्षा के मासूमों को हाईवे और रेलवे ट्रैक पार करना होता है। इस दौरान ट्रेनों का आवागमन होता रहता है। बता दें कि जिले की प्राथमिक पाठशाला सराय सुलेमान (पूरे भुवन) ऐसा स्कूल है, जहां बच्चों को पढ़ने के लिए हर दिन जान जोखिम में डालना पड़ता है। एक खतरा हाईवे का, जहां सैकड़ों वाहन अंधी रफ्तार से दौड़ते हैं। इसके बाद दूसरा खतरा रेलवे ट्रैक का है।

What kind of system Children go to school after risking their lives

बता दें कि ये नज़ारा अमेठी के लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग-56 का है, जहां राज्यमार्ग के चौड़ीकरण होने के बाद अब ये फोरलेन का रूप ले चुका है और जिस पर लग्जरी व भारी वाहन फ़र्राटे भर रहे हैं। इसके साथ ही संबंधित विभाग टोल टैक्स भी वसूल रहा है, लेकिन चौड़ीकरण के जद में आया प्राथमिक विद्यालय जमुवारी करीब 3 साल बीतने के बाद भी प्रशासनिक लापरवाही के चलते अस्तित्व में नहीं आ सका है, जिसके कारण कई नौनिहालों ने तो पढ़ाई से मुंह मोड़ कर मेहनत-मजदूरी का रास्ता अख्तियार कर लिया है। वहींं, करीब 2 दर्जन से अधिक बच्चे जान हथेली पर लेकर शिक्षा हासिल करने के लिए हाइवे व रेलवे लाइन पार कर स्कूल की दहलीज तक पहुंचते हैं। विडंबना है कि प्रशासन कमजोर तबके के बच्चों के बुनियादी शिक्षा मुहैया कराने की दिशा में सार्थक कदम नहीं उठा रहा है।

गौरतलब है कि प्राथमिक विद्यालय जमुवारी साल 2017 माह सितंबर में राष्ट्रीय राजमार्ग 56 के किनारे सराय सुलेमान गांव में स्थित था। लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग के चौड़ीकरण में इस विद्यालय का अधिग्रहण कर लिया गया था और राजमार्ग के चौड़ीकरण में प्रभावित प्राथमिक विद्यालय जमुवारी के विस्थापन हेतु 45 लाख 78 हजार 300 सौ रुपये की धनराशि शिक्षा विभाग में अवमुक्त होना था लेकिन यह राशि बेसिक शिक्षा विभाग में न पहुंचने के कारण नए विद्यालय का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। आरोप है कि कागजी खेल के चलते जहां बच्चों की सुरक्षा व भविष्य दांव पर लगा है और जिम्मेदार अधिकारी विभाग इस मामले में कतई गंभीर नहीं हैं।

What kind of system Children go to school after risking their lives

बताते चलें कि अमेठी के मुसाफिरखाना ब्लॉक के गांव सराय सुलेमान स्थित प्राथमिक विद्यालय जमुवारी में करीब 50 से अधिक बच्‍चे पढ़ते थे और उस समय विद्यालय से नजदीक गांव मोहनराम तिवारी का पुरवा, ओझा का पुरवा, गोसाई की मठिया, सराय सुलेमान आदि के बच्चे पढ़ने आते थे। विद्यालय के चौड़ीकरण की जद में आने से विद्यालय के पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है और करीब 23 छात्र और छात्राएं पढ़ने की ललक से गांव से दूर प्राथमिक विद्यालय सराय सुलेमान और जमुवारी तक, राष्ट्रीय राज्यमार्ग-731, राजकीय मार्ग व रेल क्रोसिंग पार कर पहुंच रहे हैं। खतरा इतना है कि जब तक बच्चे वापस सकुशल घर नहीं पहुंच जाते, अभिभावक अनहोनी की आशंका से सशंकित रहते हैं।

वहीं, पूरे मामले पर अमेठी के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की आख्या पर फोरलेन चौड़ीकरण में प्रभावित हुए विद्यालय को प्राप्त होने वाले प्रतिकर 45,78,300 रुपये की संस्तुति उपजिलाधिकारी मुसाफिरखाना ने डेढ़ वर्ष पहले कर दिया था, जिसके संबंध में बीते 4 फरवरी 2019 को खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा पत्र प्रतिलिपि भी प्राप्त की गई, लेकिन अभी तक धनराशि अवमुक्त न होने से दूसरे विद्यालय का निर्माण अधर में लटका हुआ है।

बोले जिम्मेदार-

बीएसए अमेठी विनोद कुमार मिश्र ने टेलीफोन के माध्यम से बताया कि मेरे कार्यालय से अथॉरटी से कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक धनराशि अवमुक्त न होने के कारण विद्यालय का निर्माण नहीं शुरू कराया जा सका।

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