अपना अस्तित्व खो रहा 'मूसाबाग का किला'


ABHISHEK TRIPATHI 03/03/2020 18:25:11
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Lucknow. प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दुबग्गा रोड पर मूसाबाग का किला है, जो नवाब आसफुद्दौला के दौर में सन् 1775-1797 तक 284 एकड़ क्षेत्रफल में तैयार हो गया था। आज इसके खण्डहरनुमा अवशेष ही शेष हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का गवाह रहा अवध का यह मशहूर, ऐतिहासिक व आखिरी मूसाबाग का किला अब अपना अस्तित्व धीरे-धीरे खाेता जा रहा है।

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सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में यह हवेली अंग्रेजों और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के बीच हुई गोलीबारी में तहस नहस हो गयी थी। जानकारी के मुताबिक, मूसा बाग का किला आसिफुद्दौला के लिए मोसियो मार्टिन ने बनवाया था। इसी ऐतिहासिक खण्डहर के पास एक मजार पर भी है, जिसका नाम कैप्टन बाबा की मजार है।कैप्टन बाबा की मजार पर लगे पत्थर से पता चलता है कि यह कब्र 21 मार्च, 1857 की लड़ाई में मारे गए कैप्टन एफ वेल्स की है।

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वर्ष 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक हादसे में मारे गए अंग्रेजी सेना के अधिकारी कैप्टन एफ वेल्स की मजार पर सिगरेट और शराब चढ़ाने के लिए हर गुरुवार श्रद्धालुओं का तांता लग रहता है। सालों से चली आ रही इस रीति के पीछे मान्यता है कि कप्तान बाबा की मजार पर सिगरेट और शाराब चढ़ाने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बताया जाता है कि कैप्टन एफ वेल्स सिगरेट और शराब के काफी शौकीन थे। इसलिए कैप्टन बाबा की  मजार पर सिगरेट और शराब चढ़ाई जाती है। वर्तमान समय में मूसा बाग की मजार और कैप्टन बाबा की  मजार पर दूर-दूर से श्रद्धालु और घूमने वालों का आवागमन लगा रहता है।

Web Title: Know the history of Musha Bagh and the famous Captain Baba's tomb in the capital Lucknow ( Hindi News From Newstimes)


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