#NewstimesTrending : रिकवरी पब्लिक प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश, अब जेल में नहीं संपत्ति जब्त कर सड़क पर लाए जाएंगे दंगाई


Gaurav Shukla 14/03/2020 10:58:51
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Lucknow. यूपी में जारी पोस्टर विवाद के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार दंगाईयों से वसूली के लिए नया कानून लेकर आई है। शुक्रवार (13 मार्च 2020) को हुई कैबिनेट की बैठक में यूपी रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टीज आर्डिनेंस-2020 को मंजूरी भी दे दी गयी। यह अध्यादेश सरकार विरोध प्रदर्शनों, आंदोलनों, जुलूसों और धरनों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान की भरपाई के लिए लाई है। 

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अध्यादेश को लेकर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की रिट याचिका (क्रिमिनल) संख्या-77/2007 और इसके साथ संलग्न याचिका (क्रिमिनल) संख्या-73/2007 की सुनवाई करते हुए विशेष रूप से राजनीतिक जुलूसों, विरोधी प्रदर्शनों, हड़तालों एवं आंदोलनों के दौरान संपत्तियों को क्षति पहुंचाने की गतिविधियों की वीडियोग्राफी करवाकर दोषियों को भरपाई कराने का आदेश दिया था। फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने यह अध्यादेश लाने का फैसला किया है। उनका कहना था कि अध्यादेश को अमली जामा पहनाने के लिए जल्द ही नियमावली भी बनाई जाएगी। 

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रिकवरी पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश

उत्तर प्रदेश रिकवरी पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश के तहत यदि यूपी में धरना प्रदर्शन के दौरान सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो इसकी क्षतिपूर्ति इस कानून के तहत दंगाईयों से होगी। दंगाई से नुकसान की पूरी भरपाई के लिए उसकी संपत्ति तक नीलाम की जाएगी। सरकार कानून को जल्द ही विधानसभा में रखेगी। यह कानून बनाने वाला यूपी वह पहला प्रदेश होगा जहां दंगाईयों को न केवल जेल में रखा जाएगा बल्कि उनकी संपत्ति जब्त कर उन्हें सड़क पर ला दिया जाएगा। इस अध्यादेश का सिर्फ यही उद्देश्य है कि दंगाई हिंसा करने से पहले लाख बार सोचें।  

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पोस्टर को लेकर कोर्ट में उठे थे सवाल 

अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें देश की सबसे बड़ी अदालत ने गुरुवार(12 मार्च 2020) को कहा था कि कोई भी ऐसा कानून नहीं है जिसके तहत सड़क के किनारे लगे पोस्टरों को जायज ठहराया जा सके। इन पोस्टरों में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ करने वालों की फोटो लगी हुई थी। 

 

 

गौरतलब है कि दिसंबर 2019 में लखनऊ में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान जमकर तोड़फोड़ हुई थी। जिसमें सार्वजनिक संपत्तियों का नुकसान हुआ था। इस नुकसान को लेकर सरकार ने भरपाई के लिए कई लोगों को नोटिस भेजा था और कुछ जगहों पर आरोपियों के पोस्टर भी लगवाए थे। लगवाए गये इन पोस्टरों का स्वतः संज्ञान इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से लिया गया था और फैसला सुनाते हुए कहा गया था कि सभी पोस्टर हटाए जाएंगे। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 

कोर्ट में जस्टिस ललित ने यह भी पूछा था कि अगर दंगा या सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान किसी संगठन के लोग करते हैं तो उन पर ऐक्शन अलग चीज है, लेकिन इंसान की तस्वीर लगाने के पीछे का क्या तर्क है? 

Web Title: NewstimesTrending Yogi Adityanath government passes ordinance for recovery of damage to public, private properties in UP ( Hindi News From Newstimes)


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