पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Oraganisation) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलने के तरीकों को स्‍पष्‍ट करते हुए कहा था कि हवा से इस वायरस का संक्रमण नहीं फैलता है।
दो सौ से अधिक वैज्ञानिकों ने चेताया, हवा से भी फैलता है कोरोना

--धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

 विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Oraganisation) की अभी तक मान्‍यता थी कि नोवेल कोरोना वायरस (Coronavius) यानी कोविड-19 (COVID-19)  हवा से नहीं फैलता है, लेकिन हाल ही में दुनिया के सैकड़ों वैज्ञानिकों (Scientist) ने दावा किया है कि कोरोना (Coronavius) हवा से भी फैल सकता है। उनका कहना है कि कोविड-19 (COVID-19) हवा में फैलने वाला वायरस है। दरअसल, 32 देशों के 239 साइंटिस्टों ने रिसर्च के बाद यह दावा किया है।

ऐसे में अगर आप यह सोच रहे हैं कि किसी सुनसान इलाके में बिना मास्क लगाए खुले में घूम सकते हैं, जहां आप किसी दूसरे व्‍यक्ति के संपर्क में नहीं हैं, तो सावधान हो जाइए। 239 वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के छोटे-छोटे कण हवा में भी जिंदा रहते हैं और वे भी लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।

 बता दें कि पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Oraganisation) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलने के तरीकों को स्‍पष्‍ट करते हुए कहा था कि हवा से इस वायरस का संक्रमण नहीं फैलता है। डब्‍लूएचओ ने कहा था कि यह खतरनाक वायरस कफ, छींक और खांसने व बोलने से ड्रॉपलेट के रूप में शरीर से बाहर निकलता है और इसके संपर्क में आने वालों को संक्रमित करता है।

 

अब वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद अपने दावे में कहा है कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं, जिससे यह माना जाए कि इस वायरस के छोटे-छोटे कण हवा में तैरते रहते हैं, जो लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। पत्र लिखने वाले वैज्ञानिकों की टीम में शामिल ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रोफेसर लिडिया मोरावस्का कहना है कि ‘हम इस बात को लेकर 100 फीसदी आश्वस्त हैं।’ इन 239 वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को एक पत्र लिखकर मांग की है कि कोरोना वायरस को लेकर की गई सिफारिशों में संशोधन किया जाना चाहिए। यह पत्र ‘साइंटिफिक जर्नल’ में अगले हफ्ते प्रकाशित होगा।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NewYork Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, सैकड़ों वैज्ञानिकों ने डब्‍लूएचओ (WHO) को लिखे पत्र में दावा किया है कि हवा में कोरोना वायरस (Coronavirus) के छोटे कण मौजूद रहते हैं, जो लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने इस बात के सबूत दिए हैं कि हवा में मौजूद वायरस के छोटे-छोटे कण लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाले बड़े ड्रॉपलेट के साथ ही उसके सांस छोड़ने के दौरान बाहर आने वाली पानी की छोटी-छोटी बूंदें भी कमरे जितनी लम्बाई तक हवा में फैल सकती हैं और किसी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं। ऐसे में इन वैज्ञानिकों ने डब्‍लूएचओ से अपनी गाइडलाइंस (WHO guidelines) में संशोधन करने का अनुरोध किया है।

हालांकि, डब्‍लूएचओ (WHO) का कहना है कि वायरस के हवा में पाए जाने के जिन सबूतों की बात की जा रही है, उन पर अभी यकीन नहीं किया जा सका है। डब्‍लूएचओ  (WHO) की संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण टीम के तकनीकी प्रमुख डॉ. बेनेडेटा अलेग्रेंजी (Chief Dr. Benedetta Allegrenzi) ने इस संबंध में कहा, ‘विशेष रूप से पिछले कुछ महीनों में हम कई बार यह कह चुके हैं कि हवा से संक्रमण संभव है, लेकिन इसके ठोस या स्पष्ट प्रमाण अब तक नहीं मिले हैं।’

वैसे अगर वैज्ञानिकों की यह बात सच है तो हमें अतिरिक्‍त सावधानी बरतने की आवश्‍यकता है, क्‍योंकि ऐसे में बंद कमरे या ऐसी ही अन्य जगहों पर संक्रमण काफी तेजी से फैल सकता है। इस नए दावे के हिसाब से करीब 2 मीटर दूर बैठने पर भी लोग कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हो सकते हैं। ऐसे में बाजार, दुकान और ऐसी ही अन्य जगहों पर जाने या वहां काम करते समय हमें सुरक्षा के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।