बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षकों का पकड़ा जाना बदस्तूर जारी है। पहले अनामिका फिर प्रीति यादव और अब इसी कड़ी में एक और मामला सामने आया है।
UP: शिक्षा विभाग में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा, एक ही पैन कार्ड पर काम कर रहे ढाई हजार शिक्षक

Lucknow. बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) में फर्जी शिक्षकों का पकड़ा जाना बदस्तूर जारी है। पहले अनामिका फिर प्रीति यादव और अब इसी कड़ी में एक और मामला सामने आया है। दरअसल, बेसिक शिक्षा परिषद स्कूल में एक ही पैन नंबर पर करीब ढाई हजार शिक्षक काम कर रहे थे। इन सभी शिक्षकों की जांच शिक्षा प्रशासन ने एसटीएफ को सौंपी है। बेसिक शिक्षकों (Basic teachers) का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप (Human Resources Portal and Inspiration App) पर अपलोड कराया जा रहा, ऐसे में हर दूसरे दिन शिक्षकों के फर्जी नौकरी करने के मामले सामने आ रहे हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Department) में नया फर्जीवाड़ा सामने आने से सभी अधिकारी हरकत में आए और शिक्षक की रिपोर्ट एसटीएफ को सौंपी है। जब से शिक्षकों का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर अपलोड होने लगा है, तब से सौ से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दो शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। पूरे मामले की जांच के लिए पहले गृह विभाग को पत्र लिखा गया। इसके बाद सीएम के निर्देश पर एसटीएफ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने पिछले साल विभाग में मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप (Inspiration App and Human Wealth Portal) को लागू किया था। उन्होंने परिषदीय स्कूल में कार्यरत हर शिक्षक को अपना डाटा प्रेरणा एप और मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे।

पहले 30 जून तक पोर्टल पर डाटा अपलोड कर उसका सत्यापन करना था, इसकी अवधि 15 जुलाई तक बढ़ाई है। मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप (Human Resources Portal and Inspiration App) पर डाटा अपलोड कराने के दौरान सामने आया कि 2008 से 2019 के बीच करीब ढाई हजार शिक्षकों ने अपना पैन नंबर बदला है।

नियुक्ति के समय पैन नंबर अलग और पोर्टल पर अपना डाटा अपलोड करते वक्त एक ही पैन नंबर का किसी दूसरे शिक्षक के नाम दर्ज होना फर्जी का जीता जागता सुबूत है। विभाग से मिली खबरों के मुताबिक, 15 जुलाई तक सभी शिक्षकों को अपना डाटा इस प्रेरणा एप और मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना है, ऐसे में और भी कई मामले सामने आने की उम्मीद है। 

हर बार होती थी फर्जी शिक्षकों की भर्ती

इनकी संख्या चार से पांच हजार तक पहुंच सकती है। विभाग की अपर मुख्य सचिव (Additional Chief Secretary)  रेणुका कुमार खुद प्रतिदिन जांच की समीक्षा कर रही हैं। उन्होंने सोमवार को कानपुर मंडल और आगरा मंडल की समीक्षा की। मंगलवार को मिर्जापुर मंडल सहित कुल 11 जिलों की समीक्षा की।

योगी सरकार (Yogi Sarkar)  में अब तक बेसिक शिक्षा विभाग (Basic education department)  में दो बड़ी भर्ती निकली हैं। हालांकि परिषदीय स्कूल के लिए शिक्षक भर्ती प्रकरण में हमेशा फर्जी भर्ती के कई मामले सामने आए हैं। पहले इस स्कूलों में  दसवीं, 12वीं, स्नातक, बीटीसी, बीएड या अन्य कोर्स के प्राप्तांक से तैयार मैरिट के आधार पर शिक्षक भर्ती होती थी। ऐसे में जो गिरोह फर्जी शिक्षक भर्ती कराने के काम करता था उसके पास पहले से कार्यरत शिक्षकों का पूरा डाटा होता था जिसके आधार पर वह आगे शिक्षक भर्ती के लिए दस्तावेज और प्रमाण पत्र जुटाकर फर्जी शिक्षक नियुक्त कराता था। 

दो शिक्षकों का एक बैंक खाता

उसमें केवल फोटो ही फर्जी शिक्षक की लगती थी, जबकि अंक तालिकाएं, प्रमाण पत्र, डिग्री, पैन कार्ड नंबर पहले से कार्यरत शिक्षक का ही होता था। अधिकारियों का कहना है कि 1995 से लेकर 2010 तक हुई लगभग सभी सहायक अध्यापकों की भर्ती में ऐसे अनेक मामले सामने आएंगे।

शिक्षा विभाग में ऐसा ही एक और नया मामला सामने आया है। जिसमें दो शिक्षकों का वेतन एक ही बैंक खाते में आ रहा था। दोनों शिक्षक या तो एक ही जिले के थे या तो दो अलग - अलग जिले के थे। लेकिन विभाग का मानना है कि इन दोनों में से एक शिक्षक फर्जी है, लेकिन वह अकेला ही दो लोगों की सैलरी उठा रहा था। 

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