एक नए अध्‍ययन में सामने आया है कि साल 2100 तक दुनिया की आबादी संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए आकलन से दो अरब कम होगी।
वर्ष 2100 तक अनुमान से दो अरब कम होगी दुनिया की आबादी

--धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी

 

एक नए अध्‍ययन में सामने आया है कि साल 2100 तक दुनिया की आबादी संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए आकलन से दो अरब कम होगी। शोधकर्ताओं ने प्रजनन दर में कमी और वृद्धों की आबादी को देखते हुए यह अनुमान लगाया है। यह ताजा अध्‍ययन वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है।  

शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान में दुनिया की आबादी करीब 7.8 अरब है। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2064 तक यह बढ़ कर रिकॉर्ड 9.7 अरब हो जाएगी, लेकिन इसके बाद इसमें कमी आनी शुरू होगी और वर्ष 2100 तक यह गिर कर 8.8 अरब हो जाएगी। वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने जो रिपोर्ट प्रकाशित की थी, उसके अनुसार वर्ष 2100 तक आबादी के 10.9 अरब पहुंच जाने का अनुमान था। दूसरे शब्‍दों में, यह मौजूदा अनुमान से दो अरब ज्यादा था। इस नई रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र के अनुमान को गलत बताया है। उनका कहना है कि वर्ष 2100 तक 195 में से 183 देशों की जनसंख्या में कमी आएगी। 23 देशों की आबादी तो आधी हो जाएगी और 34 अन्य देशों की जनसंख्या में 25 से 50 फीसदी की कमी आएगी।

 

ब्रिटेन के प्रसिद्ध साइंस जर्नल ‘लैंसेट’ में छपी इस ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपने आकलन में गिरती प्रजनन दर और वृद्ध आबादी को ध्यान में जरूर रखा था, लेकिन नीतियों से जुड़े कुछ अन्य पैमानों को नजरंअदाज कर दिया था। शोधकर्ताओं के अनुसार, एक बार अगर आबादी कम होने लगे तो उसे रोकना नामुमकिन हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया में सत्ता के लिहाज से बड़े बदलाव भी देखे जाएंगे। जिन 23 देशों की जनसंख्या आधी हो जाने की बात कही गई है, उनमें जापान, स्पेन, इटली, थाईलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण कोरिया और पोलैंड शामिल हैं।

 

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2035 तक चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन जाएगा और वह अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा, लेकिन चीन की जनसंख्या में गिरावट के बाद अमेरिका फिर से अपनी जगह हासिल करने में कामयाब होगा। फिलहाल चीन की जनसंख्या 1.4 अरब है, लेकिन अगले 80 सालों में यह 73 करोड़ ही रह जाएगी। इस दौरान अफ्रीकी देशों में जनसंख्या वृद्धि देखी जाएगी। उप सहारा अफ्रीका में आबादी तीन गुना बढ़ कर तीन अरब हो सकती है। अकेले नाइजीरिया की ही आबादी 80 करोड़ हो जाने का अनुमान है। अगर ऐसा होता है तो साल 2100 तक वह भारत के बाद जनसंख्या के लिहाज से दूसरे स्थान पर होगा।  

रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था और सत्ता के लिहाज से अमेरिका, चीन, नाइजीरिया और भारत दुनिया के चार अहम देश होंगे। अनुमान के अनुसार, भारत की जनसंख्या में बहुत बड़े बदलाव नहीं देखे जाएंगे और जीडीपी के लिहाज से भारत तीसरे पायदान पर होगा। जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन दुनिया की 10 महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं में बने रहेंगे।

 

इस रिसर्च के मुख्य लेखक क्रिस्टोफर मुरे ने कहा, ‘यह पूर्वानुमान पर्यावरण के लिए अच्छी खबर है। इससे खाद्य उत्पादन प्रणालियों पर दबाव कम होगा, कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा और उप सहारा अफ्रीका के हिस्सों में अहम आर्थिक अवसर पैदा होंगे। हालांकि अफ्रीका के बाहर ज्यादातर देशों में आबादी घटेगी, वर्कफोर्स कम हो जाएगी और अर्थव्यवस्था पर इसका काफी बुरा असर होगा।’ मुरे का कहना है कि अगर उच्च आय वाले देश चाहते हैं कि ऐसा न हो, तो जनसंख्या स्तर को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि वे प्रवासियों को लेकर बेहतर नीतियां बनाएं और ऐसे परिवारों को आर्थिक सहयोग दें जो बच्चे चाहते हैं। हालांकि उन्हें डर है कि मौजूदा दौर में कई देश इसके ठीक विपरीत नीतियां बना रहे हैं, जिनके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

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