योगी सरकार के प्रमुख अधिकारियों ने फॉर्मा इंडस्ट्रीज की बड़ी कंपनियां जूबिलेंट लाइफ़ साइंसेज़, सिपला, जायडस हेल्थकेयर और एल्कैम के साथ फॉर्मा इंडस्ट्रीज की समस्याओं के समाधान और विकास के लिए वेबिनार के माध्यम से चर्चा की
विदेशी निवेशकों ने उत्तर प्रदेश के फ़ार्मा सेक्टर में निवेश की रुचि ज़ाहिर की

पंकज मौर्य

Lucknow. योगी सरकार के प्रमुख अधिकारियों ने फॉर्मा इंडस्ट्रीज की बड़ी कंपनियां जूबिलेंट लाइफ़ साइंसेज़, सिपला, जायडस हेल्थकेयर और एल्कैम के साथ फॉर्मा इंडस्ट्रीज की समस्याओं के समाधान और विकास के लिए वेबिनार के माध्यम से चर्चा की। करीब दो घंटे तक चली इस वेबिनार में लंदन के कई निवेशकों ने उत्तर प्रदेश के फ़ार्मा सेक्टर में निवेश की रुचि ज़ाहिर की है। निवेशकों ने सरकार से बिजली, पानी और ज़मीन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति के साथ इनकी दरों में रियायत की इच्छा जाहिर की है।  

प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई) नवनीत सहगल ने कहा कि पीलीभीत व ललितपुर में फ़ार्मा पार्क बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया जारी है। साथ ही नोएडा, गाज़ियाबाद, गोरखपुर, इलाहाबाद में मेडिकल उपकरणों के निर्माण की योजनाएं प्रस्तावित हैं। 

साथ ही दवा उद्योग से जुड़े उद्यमी व मुल्तानी फार्मास्यूटिकल के चेयरपर्सन प्रदीप मुल्तानी ने कहा कि दवा उद्योग से जुड़े उद्यमियों को 40 से ज़्यादा विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम की स्थापना से यह गतिरोध हटाना चाहिए। 

इन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को पंजाब सरकार के मॉडल से सबक़ लेना चाहिए, जहां फैक्ट्री के निरीक्षण से पहले उद्यमी को सूचित करना अनिवार्य है। इस पर राज्य सरकार ने कहा कि उद्यमियों के साथ संवाद बढ़ाकर हम फ़ार्मा उद्योग से जुड़ी समस्यायों को हल करने का पूरा प्रयास करेंगे। 

फ़ार्मा क्षेत्र के विशेषज्ञ, दवा निर्माता कंपनियों व विदेशी निवेशकों के साथ उत्तर प्रदेश अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल व प्रमुख सचिव अनीता सिंह ने फ़ार्मा उद्योग के विकास के लिए वेबनार मीटिंग की। उद्यमियों ने चीन के मुक़ाबले भारतीय उद्योग को खड़ा करने के लिए नयी फ़ार्मा पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाएँ और सब्सिडी की मांग। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश में 16,217 करोड़ रूपए की दवाओं का सालाना कारोबार होता है। फ़ार्मा पॉलिसी 2018 मुख्यतः एपीआई और बल्क ड्रग तक ही सीमित था, लेकिन अब इसमें आयुर्वेदिक दवाओं को भी शामिल किया गया है। यक़ीन करना मुश्किल है, लेकिन आज़ादी के 73 साल बाद भी भारत दवा बनाने के लिए 80 फीसदी से ज़्यादा बेसिक केमिकल चीन से आयात करता है। 

प्रमुख एंटीबायोटिक व पैरासिटामॉल जैसी आम दवाओं के निर्माण के लिए भी हम चीन पर निर्भर हैं। इस तथ्य के बावजूद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा निर्माता है। इसलिए योगी सरकार उत्तर प्रदेश में दवा के ज़रूरी स्टार्टिंग मटेरियल के निर्माण को बढ़ावा देकर कारोबार और रोज़गार के अवसर सृजन करना चाहती है। इसके साथ ही राज्य सरकार इसे प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुधारने का सुनहरा मौक़ा भी मान रही है।