बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो रही है, वैसे वैसे पाला बदल का खेल तेज होने का अंदेशा है। तीसरे मोर्चे के गठन से इस आशंका को और बल मिला है क्योंकि लालू और नीतीश दोनों खेमों में टिकट बंटवारे के लिए खींचतान चल रही है।
बिहार चुनाव: अब पाला बदल का खेल और तेज होगा

--शिव प्रसाद सिंह 

बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो रही है, वैसे वैसे पाला बदल का खेल तेज होने का अंदेशा है। तीसरे मोर्चे के गठन से इस आशंका को और बल मिला है क्योंकि लालू और नीतीश दोनों खेमों में टिकट बंटवारे के लिए खींचतान चल रही है। लालू यादव की पार्टी-राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पुराने नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, पार्टी उपाध्यक्ष विजेंद्र यादव और अन्य नेताओं का इस्तीफा इस खेल की शुरुआत भर है। 

उधर, लोकजन शक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने भी नीतीश कुमार पर ज्यादा सीटों की मांग का दबाव बढ़ाने के लिए अपने समर्थकों से अकेले चुनाव लडऩे के लिए भी तैयार रहने का आवाहन किया है। इसके जवाब में लोकजन शक्ति पार्टी को किनारे करने के लिए नीतीश कुमार हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को अपने पाले यानी एनडीए में शामिल कराने की कोशिश में हैं।

चिराग पासवान दबाव बनाने की कोशिश में

लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को कहा कि बिहार में गठबंधन का स्वरूप बदल रहा है, ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चिराग ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आवाहन किया कि उन्हें विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी तैयारी रखनी चाहिए। अगर जरूरत पड़ी तो एलजेपी को अकेले चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। चिराग पासवान के इस बयान से बिहार में आने वाले चुनाव से पहले एक बार फिर से कयास लगने शुरू हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि लोक जनशक्ति पार्टी की सबसे बड़ी चिंता एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर है। उसकी मांग है कि उसे कम से कम 42 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का मौका दिया जाए। मगर एनडीए चिराग पासवान की पार्टी को 30 से 35 सीट ही देने के मूड में है।

नीतीश-चिराग में खटपट

चिराग पासवान इन दिनों सीएम नीतीश कुमार से भी खफा-खफा से चल रहे हैं। दरअसल मौजूदा विधानसभा में लोक जनशक्ति पार्टी के दो विधायक हैं, बावजूद इसके सरकार में पार्टी की कोई भी भागीदारी नहीं है। बिहार में कानून-व्यवस्था का मुद्दा हो या फिर प्रवासी मजदूरों के राज्य वापस लौटने का, इन सभी मुद्दों पर चिराग पासवान ने नीतीश कुमार की आलोचना की है। इसके अलावा उनको पत्र लिखकर बार-बार मुश्किल में डाल दिया है। पिछले ही दिनों चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीएम उम्मीदवारी पर भी सवाल खड़े करते हुए कह दिया था कि वह उसी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार मानेंगे जिसके नाम का चयन भाजपा करेगी।

क्या एनडीए में आएंगे जीतन राम मांझी?

कुछ दिन पहले यह भी खबर आई कि नीतीश कुमार हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को एनडीए में शामिल कराकर चिराग पासवान की पार्टी को निपटाना चाहते हैं। इन सभी घटनाक्रम से साफ है कि नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में चिराग पासवान का पार्टी नेताओं को यह संदेश देना कि गठबंधन का स्वरूप बदल सकता है, चुनाव से पहले बिहार में आने वाली सियासी तपिश की ओर इशारा कर रही है।

विजेंद्र यादव ने भी पार्टी छोड़ी

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उपाध्यक्ष विजेंद्र यादव ने पार्टी और पद दोनों से इस्तीफा दे दिया है। यादव ने कहा है कि पार्टी में अब पुराने नेताओं की कोई इज्जत नहीं रही। विजेंद्र यादव को आरजेडी में ‘किंगमेकर’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। पूर्व विधायक विजेंद्र यादव ने पार्टी  छोड़ने  के साथ ही अपने पद से भी त्यागपत्र दे दिया है। वे लालू यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं के काफी करीबी नेताओं में रहे हैं। विजेंद्र यादव ने कहा कि "लालू जी भी अब वो नहीं रहे जो 1990 और 2000 के दशक में हुआ करते थे, वे भी बदल गए हैं। इसलिए बदलाव वक्त का तकाजा है, जिसे देखते हुए मैं इस्तीफा दे रहा हूं।"

यशवंत सिन्हा का तीसरा मोर्चा

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद नाराज होकर भारतीय जनता पार्टी से अलग हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार के दिग्गज नेता यशवंत सिन्हा दो साल बाद एक बार फिर सक्रिय राजनीति में लौटे हैं। उन्होंने पटना में अप्रत्याशित रूप से तीसरे मोर्चा का ऐलान किया है। इस प्रकार बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की पार्टी राजद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले भाजपा के गठबंधन के अलावा एक और गठबंधन मैदान में उतर आया है। सिन्हा ने शनिवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बिहार की खस्ता स्थिति को देखते हुए उन्होंने यह मोर्चा गठित किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह और पूर्व सांसद अरुण कुमार और अन्य कई नेता भी मौजूद थे। इस तीसरे मोर्चे में ज्यादातर ऐसे नेता शामिल हुए हैं, जो न तो महागठबंधन का हिस्सा हैं और न ही एनडीए का। 

अब तक इस तीसरे मोर्चे में पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव, पूर्व बिहार मंत्री नरेंद्र सिंह और रेनू कुशवाहा, पूर्व सांसद अरुण कुमार और नागमणि जैसे नेता शामिल हुए हैं। यशवंत सिन्हा ने मोर्चा की घोषणा के साथ ही ऐेलान किया है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में यह तीसरा मोर्चा चुनाव लड़ेगा। इस मोर्चे का मुख्य उद्देश्य मौजूदा सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना होगा। हालांकि, यशवंत ने अभी यह नहीं बताया कि वह खुद विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं। उनका कहना था कि जो भी मोर्चा में शामिल होना चाहता है, उसका स्वागत है। मोर्चा के गठन का उद्देश्य बेहतर बिहार के निर्माण के लिए संघर्ष करना है इसलिए मोर्चा पूरी ताकत के साथ आगामी विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरेगा। हालांकि, अभी यशवंत ने अपनी पार्टी के नाम का ऐलान नहीं किया है। इस बारे में उन्होंने कहा कि अभी इसको लेकर फैसला नहीं हुआ है, लेकिन जल्द ही वह पार्टी के नाम का ऐलान करेंगे।

सिन्हा ने बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को राज्य की खराब स्थिति के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने ‘बेहतर बिहार बनो और बेहतर बिहार बनाओ’ का नारा दिया। नीतीश सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि राजग सरकार ने लगभग 15 सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद विकास नहीं किया। राज्य की खराब स्थिति के लिए भी मौजूदा सरकार ही जिम्मेदार है। उनका कहना था कि राज्य सरकार को भंग करना बेहतर बिहार बनाने के लिए पहला कदम होगा।