अभी बिहार में चुनाव नहीं चाहती है आरजेडी! जानिए क्या है वजह
अभी बिहार में चुनाव नहीं चाहती है आरजेडी! जानिए क्या है वजह

Patna. बिहार (Bihar) में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच राजनीतिक दल (Political) विधानसभा चुनाव (Assembly Election) की तैयारियों में जुटे हुए हैं। लेकिन आरजेडी (RJD) ने इन परिस्थितियों में चुनाव को लेकर सवाल खड़े करते आयी है। वहीं, अब आरजेडी नेता (RJD leader) अब्दुल बारी सिद्धिकी (Abdul Bari Siddiqui) ने चुनाव आयोग (Election Commission) को पत्र लिख राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति से अवगत कराया है। साथ ही उन्होंने पूछा है कि करोड़ों लोगों के जान की कीमत पर चुनावी रस्म कितनी जरूरी है? 

पत्र को लेकर आरजेडी प्रवक्ता (RJD spokesman) मृत्युंजय तिवारी (Mrityunjay Tiwari) ने बताया कि आरजेडी (RJD) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्धिकी (Abdul Bari Siddiqui) ने पत्र के जरिए चुनाव आयोग से पूछा है कि अगर वे संतुष्ट हैं तो उसके कारण को आम जनता से साझा करें जिससे जनता भयमुक्त होकर चुनाव में भाग ले सकें। पत्र में सिद्धकी ने यह बात बताई है कि चुनाव के दिन करोड़ों लोग घर से बाहर निकलेंगे। जान की कीमत पर चुनाव का रस्म कितना जरूरी है?

सिद्धिकी ने पत्र के जरिये सवाल खड़े किए हैं कि अगर मतदान के बाद कोई मतदाता संक्रमित हो जाता है और उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो क्या चुनाव आयोग (Election Commission) मतदाताओं का जीवन बीमा कराने के बारे में चिंतित है? उन्होंने कहा कि बिहार में लगभग 13 करोड़ लोग हैं। लगभग साढ़े सात करोड़ मतदाता हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग चुनाव के दौरान मतदाताओं और चुनाव प्रबंधन में लगे लोगों के बीच 2 गज की दूरी किस तरह सुनिश्चित करेगा?  

बता दें कि बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव कराने की संभावना है। लेकिन चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इसको लेकर कोई घोषणा नहीं की गयी है। वहीं, प्रदेश में कोरोना संकट के बीच चुनाव को लेकर आरजेडी (RJD) सवाल उठाती रही है। इससे पहले बिहार के नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav) भी चुनाव कराने को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं। 

इसी महीने तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने कहा था कि 'आखिर चुनाव की इतनी जल्दबाजी क्यों है? किस बात की घबराहट है?' ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार इस संभावना के कारण चिंतित है कि उनका कार्यकाल समाप्त होने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। उन्होंने कहा 'मुझे लगता है कि यह उचित नहीं होगा। राज्य में स्थिति भयावह है और लोगों को महामारी से बचाने के बजाए उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। बिहार सरकार पर अस्पतालों को पर्याप्त सुविधाओं से लैस करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए तेजस्वी ने कहा कि ऐसा लगता है कि जानबूझकर जांच कम की जा रही हैं, जिससे संक्रमितों की सही जानकारी न मिल सके।