प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित सरस्वतीकुंज, निरालानगर में शनिवार को विद्या भारती ने फलदार वृक्षों का रोपण किया।
विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश परिसर में फलदार पौधों को रोपित किया गया

Lucknow. प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित सरस्वतीकुंज, निरालानगर में शनिवार को विद्या भारती ने फलदार वृक्षों का रोपण किया। वृक्षारोपण कार्यक्रम में पधारे विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री यतीन्द्र जी ने विद्या भारती के उस मिशन पर प्रकाश डाला, जिसमें ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए विद्या भारती के विद्यार्थियों को एक सप्ताह तक कार्यक्रम और प्रशिक्षण से जोड़ा जाता है। यतीन्द्र जी ने बताया कि यह विद्या भारती का राष्ट्रीय मिशन है। हमारा देश प्रकृति प्रेमी रहा है। विद्या भारती ने इसे हिन्दू जीवन दर्शन से लिया है, जिसके कारण हम पोषण करते हैं, शोषण नहीं। उन्होंने आगे कहा कि वृक्षों का संरक्षण जीवन कल्यााण के लिए है। इसलिए वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है।

यूपी गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. श्यामनन्दन सिंह ने कहा कि वृक्षारोपण कार्यक्रम से विद्यार्थी प्रेरित होते हैं। मनुष्य और प्रकृति का क्या सम्बन्ध है, यह जानना होगा और हम सब लोग इसको भूलते जा रहे हैं। विद्यार्थियों को प्रकृति के विषय में समझाना चाहिए कि प्रकृति को बनाकर रखना पडे़गा। हर घर में हर व्यक्ति को एक पौधा लगाना चाहिए प्रकृति हमारे  जीवन काल में कितनी आवश्यक है यह कोरोनाकाल में देखा जा सकता है। विद्या भारती का अभियान बहुत ही अच्छा है। विद्यार्थियों को इससे जोड़ा गया है। गाय के गोबर गो-मूत्र से जैविक खाद तैयार होती है। जैविक खाद पौधों के लिए बहुत आवश्यक है। जैविक खाद से जमीन स्वस्थ्य होती है। पौध रोपण के बाद इसी क्रम में प्रो0 श्याम नन्दन सिंह जी ने सरस्वतीकुंज की गौशाला का भी निरीक्षण किया।

सरस्वतीकुंज में पौध रोपण कार्यक्रम में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डाॅ. शैलेन्द्र राजन ने बागवानी के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए पौध रोपण और बागवानी उनकी विजुवलाइजेशन पर असर डालता है। वे सरलता से पौधों को पहचान सकते है। गाॅर्डेन को व्यवसायिक रूप से इस्तेमाल कर सकते है। विद्या भारती का प्रयास बहुत ही सराहनीय है। बच्चों को शुरूआत से जोड़ने पर उनकी रूचि बढ़ती है। पौधों की वैराइटी के बारे में उनको पता चलता है। विद्यार्थी ज्यादा प्रेक्टिकल बनेंगे। विद्यालय पोषण-वाटिका का माॅडल बन सकता है। अधिकाधिक फलदार वृक्षों की मांग इन दिनों विदेशों में बढ़ती जा रही है। 

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर पेड़ हमारी पहली सांस से लेकर अंतिम संस्कार तक मदद करते हैं। ऐसे परोपकारी संसार में सच्चे संत ही हो सकते हैं। जो सारी बाधाएं स्वयं झेलकर दूसरों की सहायता करते हैं। हमारे पौराणिक साहित्य से दो उद्धरण हैं- दस कुंओ के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र तथा दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष है।

वृक्षारोपण कार्यक्रम में विद्या भारती पूर्वी उप्र. के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचन्द्र जी, क्षेत्रीय मंत्री डाॅ. जय प्रताप सिंह जी, क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सौरभ मिश्र जी, हिन्दी दैनिक जागरण समाचार पत्र के सम्पादक सद्गुरू शरण अवस्थी, दैनिक जागरण संस्थान के जी.एम. मार्केटिंग कपिल जायसवाल, क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रमुख उमाशंकर जी, भारतीय शिक्षा समिति उप्र. के प्रान्तीय प्रदेश निरीक्षक राजेन्द्र बाबू जी, भारतीय शिक्षा परिषद के सचिव दिनेश कुमार सिंह जी आदि गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे।